Best Hindi Kavita | Best Poem In Hindi (2021)

Best Hindi Kavita | Hindi Poem

हेलो दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस blog में आज हम आपके लिए लेकर आए हैं Best Hindi Kavita. भारत में एक से बढ़कर एक महान कवियों ने जन्म लिया (famous hindi poets) और अपनी कलम की रौशनी से पूरी दुनियाँ में ज्ञान का एक अनोखा प्रकाश फ़ैलाया। ऐसे ही कुछ महान कवियों में से एक कवि हैं हरिवंश राय बच्चन और दुसरे हैं रामधारी सिंह दिनकर।

आज हम आपके लिए इन दोनों महान कवियों की सबसे अच्छी कविता लेकर आये हैं। वैसे तो कविता अनेक भाषाओँ में मिल जाती हैं लेकिन कविता हिंदी में लिखी हुई अक्सर आकर्षण का केंद्र होती हैं। यह Hindi Kavita उन लोगों के लिए Best Hindi Kavita है जो लोग बहुत जल्दी हार मान लेते हैं या वो जो अपनी ज़िन्दगी में छोटी छोटी घटनाओं से परेशान हो जाते हैं।


जो बीत गई सो बात गई (Harivansh Rai Bachchan Best Poems)

जीवन में एक सितारा था
माना वो बेहद प्यारा था
वो डूब गया तो डूब गया
अम्बर के आनंद को देखो
कितने इसके तारे टूटे

कितने इसके प्यारे छूटे
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अम्बर शोक मनाता हैं
जो बीत गई सो बात गई

जीवन में वो था एक कुसुम
थे उस पर नित्य निछावर तुम
वो सूख गया तो सूख गया
मधुबन की छाती को देखो
सूखी कितनी इसकी कलियाँ

मुरझाई कितनी वल्लरियाँ
जो मुरझाई फिर कहाँ खिली
पर बोलो सूखे फूलों पर
कब मधुबन शोर मचाता है
जो बीत गई सो बात गई

जीवन में मधु का प्याला था
तुमने तन मन दे डाला था
वो टूट गया तो टूट गया
मद्रालय का आनंद देखो
कितने प्याले हिल जाते हैं

गिर मिट्टी में मिल जाते हैं
जो गिरते हैं अब उठते हैं
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मद्रालय पछताता है
जो बीत गई सो बात गई

मधु मिट्टी के है बने हुए
मधुघट फूटा ही करते हैं
लघु जीवन लेकर आए हैं
प्याले टूटा ही करते हैं

फिर भी मद्रालय के अंदर
मधु के घट है मधुप्याले हैं
जो मदाक्ता के मारे हैं
वे मधु लूटा ही करते हैं

वो कच्चा कोने वाला है
जिसकी ममता घटप्यालों पर
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है चिल्लाता है
जो बीत गई सो बात गई

आशा का दीपक (Ramdhari Singh Dinkar Best Poems)

वो प्रदीप जो दिख रहा है
झिलमिल दूर नहीं है
थक कर बैठ गए क्या भाई
मंज़िल दूर नहीं है

चिंगारी बन गयी लहू की
बूँद गिरी जो तन से
चमक रहे पीछे मुड़ देखो
चरण चिन्ह जग मग से

बाकी होश तभी तक
जब तक जलता तूर नहीं है
थक कर बैठ गए क्या भाई
मंज़िल दूर नहीं है

अपनी हड्डी की मशाल से
ह्रदय चीरते तमका
सारी रात चले तुम
दुःख झेलते कुडुश निर्मम का

एक खेह है शेष
किसी विधि तार उसे कर जाओ
वो देखो उस तार चमकता है
मंदिर प्रियतम का

आकर इतने पास फिरे
वो सच्चा शूर नहीं है
थक कर बैठ गए क्या भाई
मंज़िल दूर नहीं है

दिशा दीप्त हो उठी
प्राप्त कर पुण्यप्रकाश तुम्हारा
लिखा जा चूका अमल अक्षरों में
इतिहास तुम्हारा

जिस मिट्टी में लहू गया
वो फूल खिलाएगी ही
अम्बर पर घन बन छाएगा ही
उच्छ वास तुम्हारा
और अधिक ले जांच
देवता इतना क्रूर नहीं है
थक कर बैठ गए क्या भाई
मंज़िल दूर नहीं है

वीर (Ramdhari Singh Dinkar Best Poems)

सच है विपत्ति जब आती है
कायर को ही दहलाती है
सूरमा नहीं विचलित होते
छन एक नहीं धीरज खोते

विघनों को गले लगाते हैं
काँटों में राह बनाते हैं
मुँह से ना कभी उफ़ कहते हैं
संकट का चरण न गहते हैं

जो आ पड़ता सब सहते हैं
उद्योग निरत नित रहते हैं
शूलों का मूल नसाते हैं
वो खुद विपत्ति पर छाते हैं

हैं कौन विघ्न ऐसा जग में
टिक सके आदमी के मग में
खमठोक खेलता है जगमर
पर्वत के जाते पाँव उखड़

मानव ज़ोर लगाता है
पत्थर पानी बन जाता है
गुण बड़े एक से एक प्रखर
छिपे मानवों के भीतर

मेहंदी में लाली हो
वर्तिका बीच उजियाली हो
बत्ती जो नहीं जलाता है
रौशनी नहीं वो पाता है

आगे बढिये अपने हिस्से के उजाले
मांगने से ना मिले तो छीन लीजिये
लेकिन पंखा और रस्सी आपके लिए नहीं बाने
जीते रहिये लड़ते रहिये


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