भूतिया ट्रेन: True Horror Story In Hindi (2021)

True Horror Story In Hindi – रहस्य क्या होता है? इस सवाल का कोई एक जवाब नहीं हो सकता। हर इंसान के लिए इस शब्द का मतलब अलग है अगर सरल शब्दों में इसे समझा जाए तो रहस्य का मतलब होता है “जो समझ से परे हो” या “जिसे समझाया ना जा सके” कि आखिर यह कैसे हुआ यह क्यों हुआ।

ऐसी ही कई मिस्ट्रीज और रहस्य है जो इंटरनेट पर घटित हुई है जिन्हें हम इंटरनेट मिस्ट्रीज के नाम से जानते हैं जिसे समझाने में यह समझने में पूरी दुनिया आज तक विफल है। आज हम ऐसी ही एक ट्रेन की सच्ची घटना के बारे में बात करेंगे जो आज से करीब 16 साल पहले जापान में घटित हुई। कैसे एक ट्रेन किसी पैसेंजर को एक ऐसे अज्ञात स्टेशन पर छोड़ देती है जिसके बारे में कोई नहीं जानता।

उसकी स्टेशन की जानकारी ना तो इंटरनेट पर मौजूद थी, ना किसी मैप पर और ना ही जापान के रेल विभाग के पास उस स्टेशन पर ना ही कोई है और ना ही कोई उस पैसेंजर तक मदद पहुंचा सकता है। स्टेशन पर बस एक बोर्ड है जिस पर लिखा है “किसारगी स्टेशन” जिसका अर्थ होता है “डिमोन स्टेशन’ आखिर क्या है यह डिमोन स्टेशन।

वो Ghost Train यहां आकर ही क्यों रुकी और उस पैसेंजर के साथ आगे क्या क्या हुआ। यह एक रियल लाइफ हॉरर स्टोरी इन हिंदी है तो आईये इस अजीबोगरीब भूतिया रहस्य को जानने की कोशिश करते हैं।

भूतिया ट्रेन: True Horror Story In Hindi

यह बात है 2004 की उस वक्त इंटरनेट अपने शुरुआती चरण में था और लोग आज की ही तरह इंटरनेट से जुड़े रहना चाहते थे। चाहे अपना पर्सनल एक्सपीरियंस शेयर करना हो या अपनी राय देनी हो या कोई दूसरा विचार-विमर्श करना हो इन सब के लिए लोग इंटरनेट फोरम की ओर रुख करते थे इन फोरम पर कोई भी व्यक्ति अपनी बात रख सकता था और बाकी के लोग उस पर कमेंट करके एक दूसरे से बात कर सकते थे।

8 जनवरी 2004 को जापान की एक प्रॉब्लम वेबसाइट “2 चैन” पर रात के करीब 11:14 पर एक पोस्ट पब्लिश होता है। इस पोस्ट में एक यूजर लोगों से कुछ अजीब सी बात शेयर करता है “हो सकता है यह मेरा कोई वेहम हो पर क्या मेरी कोई हेल्प कर सकता है” उस अज्ञात यूजर ने बस इतना लिखा और फोरम पर उस वक्त ऑनलाइन लोग उत्सुकता और मदद के भाव से उसकी हेल्प के लिए तैयार हो गए।

उस घबराए हुए अज्ञात यूजर ने कई मैसेजेस उस पोस्ट पर किए और बाकी के लोग कमेंट के द्वारा उसकी हेल्प करने लगे। मैसेज के ज़रिये ही पता लगा यह अज्ञात यूजर एक जापानी महिला है। जिसका नाम हासूमी था। 8 जनवरी 2004 को हासूमी ने शिन हमामात्सु स्टेशन से रात के समय ट्रेन पकड़ी और यह ट्रेन वो अक्सर इस्तेमाल किया करती थी।

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पर आज वो ट्रेन लगभग 30 मिनिँट से रुकी नहीं थी जबकि जिस ट्रेन में वो बैठा करती थी वो हर 5 से 7 मिनट में रुका करती थी। घबराहट और परेशानी ने उस लड़की के दिमाग में घर बना लिया था उसे समझ नहीं आ रहा था की ऐसा कैसे हो सकता है। कहीं वह किसी गलत ट्रेन में तो नहीं चढ़ गई या कहीं ट्रेन अपने रूट से भटक गई हो ऐसे कई सवाल उसके मन में उमड़ रहे थे और उसे परेशान किए जा रहे थे।

उसके साथ पांच लोग और उस ट्रेन में थे और वह सभी के सभी सोए हुए थे और वह उन्हें जगह कर परेशान नहीं करना चाहती थी। यह सभी बातें वो मैसेजेस के द्वारा वह अन्य लोगों से शेयर कर रही थी तभी एक अन्य यूजर ने सुझाया कि ट्रेन के आखरी कंपार्टमेंट में कंडक्टर का रूम होगा वहां जाकर कंडक्टर से पूछो वह ज्यादा अच्छे से बता सकता है।

उस व्यक्ति की बात मानते हुए हासूमी ट्रेन के आखरी कंपार्टमेंट में कंडक्टर के पास गई और वहां कंडक्टर के रूम में पर्दा लगा हुआ था और ऐसा लग रहा था मानो उस रूम में कोई है ही नहीं। उसने विंडो पर खटकाया भी लेकिन वहां कोई नहीं था। करीब 1 घंटा बीत चुका था और ट्रेन रुकने का नाम नहीं ले रही थी। हासूमी ने खिड़की से बाहर जाकर देखा तो उसे अंधेरा और बस पहाड़ दिखाई दिए। बीच-बीच में कुछ घर भी दिखते है पर ऐसा लगता है कि मानो उनमे कोई नहीं रहता।

थोड़ा और देखने पर दूर एक माध्यम रोशनी दिखती है और वह भी ऐसी लग रही है जैसे दूर सी होती जा रही है। हासूमी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह क्या करें, किसकी मदद ले, या कहां जाए। वह ऐसी ट्रेन में है जो 1 घंटे से रुकी नहीं है जो उसे किसी अंजान सी जगह ले जा रही है। जिसे उसने पहले कभी नहीं देखा। उसका बस एक ही सहारा था वह था उसका फोन।

उसने अपने फोन से इस जगह के बारे में पता लगाने की कोशिश की पर वह उसमें कामयाब नहीं रही उसे अपने फोन का जीपीएस ऑन करके देखा और जीपीएस से भी कुछ भी मदद नहीं मिली। जीपीएस ने मानो जैसे काम करना ही बंद कर दिया हो। थोड़ा समय और बीता और एक मैसेज फिर उस पोस्ट पर आया की ट्रेन एक टनल से निकली है और अब थोड़ी सी स्लो हो रही है। हो सकता है की ये रुकने वाली है पर शिन हमामात्सु के रूट पर कोई टनल नहीं है।

कुछ देर बाद ट्रेन रुकी। स्टेशन एकदम वीरान है यहां कोई नहीं है बस एक बोर्ड लगा हुआ है जिस पर किसारगी स्टेशन लिखा है। जो लोग मेरे साथ हैं वह अभी भी सो रहे हैं, परेशान हासूमी ने मैसेज में लोगों से पूछा, “मुझे क्या करना चाहिए क्या मैं स्टेशन पर उतर जाऊं या किसी से मदद मांगू” कुछ लोगों ने उसे उतर जाने की सलाह दी और कुछ नहीं उसे ऐसा ना करने की।

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उत्सुकता के चलते हासूमी उस स्टेशन पर उतर गई और उसने पाया कि वह स्टेशन पूरी तरह से खाली पड़ा है। ना वहां कोई दूसरा पैसेंजर था और ना ही कोई स्टेशन मास्टर। किसारगी स्टेशन वेब पर सर्च किया तो उन्हें कुछ भी नहीं मिला ना ही इस नाम से कोई स्टेशन पूरे जापान में है।

हासूमी ने उस अनजान से स्टेशन पर इधर उधर देखा टेक्सी की खोज में स्टेशन से बाहर जाकर भी देखा पर वहां कोई भी नहीं था। जब वो स्टेशन पर वापस आई तो उसने देखा कि वह ट्रेन वहां से जा चुकी थी हासूमी परेशानी और भी बढ़ गई वह रात के समय एक ऐसी जगह पर है जिसका उसे कुछ भी नहीं पता। यहां तक कि वह जगह तो पूरे जापान में किसी मैप या इंटरनेट पर है ही नहीं।

तभी उस पोस्ट पर एक मैसेज आया और हासूमी की हालत उस मैसेज को पढ़कर और भी ज्यादा खराब हो गई। उस मैसेज में लिखा था कि, “मैंने किसारगी के बारे में थोड़ा और सर्च किया और पाया कि किसारगी का असली मतलब ओनी होता है। ओनी पुरानी जापानी कथाओं का डेमोनिक क्रिएचर है।

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बेचैनी की हालत में हासूमी ने अपने घर पर कॉल किया और उसे वहां से ले जाने को कहा पर उसके पेरेंट्स को भी उस जगह के बारे में कुछ भी नहीं पता था उन्होंने उसे सांत्वना देते हुए बोला कि हम मैप की मदद से तुम तक पहुंच रहे हैं पर हासूमी कि बेचैनी और चिंता अब डर का रूप ले चुकी थी।

इस डर के कारण उसने पुलिस को भी फोन किया उसने पुलिस को पूरे घटना की जानकारी दी पर पुलिस ने उसकी एक बात नहीं मानी। उन्हें लगा यह कोई प्रैंक कॉल है। वहीं पोस्ट में हासूमी की मदद के लिए लोग लगातार मैसेज किए जा रहे थे। किसी ने उसे आसपास किसी होटल को खोजने किसी ने फोन पर तलाश करने तो किसी ने सुबह तक उसी जगह पर रहने की सलाह दी।

एक यूजर ने उसे ट्रेन जिस तरफ से आयी है वही से पटरियों का सहारा लेकर वापिस आने की सलाह दी इससे वो जिस स्टेशन से आई है वह वापस जा सकती है। वहीं अन्य लोगों ने ऐसा ना करने की सलाह दी। रात के अंधेरे में अकेले जंगल के रास्ते में ट्रेन के ट्रैक पर जाना वह भी एक असामान्य रास्ते पर जिसका किसी को नहीं पता है।

हासूमी को उस वक़्त यही सही लगा उसने उस यूजर की बात मानी और ट्रेन ट्रैक के रास्ते टनल की ओर चल दी। कुछ दूर चलने के बाद कहीं दूर से उसे ड्रम्स की और घंटियों की आवाज आने लगी। जबकि वहां दूर-दूर तक घने कोहरे जंगल के अलावा ना कोई घर और ना ही कोई मंदिर था। उसने उन आवाजों को नजरअंदाज किया और टनल की ओर बढ़ने लगी। कुछ दूर और चलने के बाद उसे टनल का मुहाना दिखाई दिया वह टनल की और बढ़ ही रही थी की तभी उसे पीछे से किसी ने आवाज लगाई।

उसने पीछे मुड़कर देखा तो वहां एक बुड्ढा आदमी जिसकी एक टांग नहीं थी उससे करीब 10 मीटर की दूरी पर खड़ा था।हासूमी ने घबराए हुए शब्दों में उससे उस जगह के बारे में पूछा पर उस आदमी ने उसे चेतावनी देते हुए ट्रेन ट्रैक से हट जाने को कहा और टनल में ना जाने की सलाह दी।

इतना कह कर वह आदमी जंगल के गुप्त अंधेरे में कहीं गायब सा हो गया। देखशत से भरी हासूमी ने उस बुड्ढे की बात ना मानते हुए टनल की तरफ आगे बढ़ने लगी। अब वो ड्रम्स की आवाज़ जो कहीं दूर से आ रही थी ऐसा लग रहा था मानो पास से ही कहीं आ रही हो। उसके मन में ख्याल आया कि मुझे इन ड्रम्स की आवाज़ का पीछा करना चाहिए। शायद कोई मदद के लिए मिल जाए लेकिन एक अनजान जगह में होने की वजह से ऐसा ना कर के उसमें टनल की तरफ जाने का ही फैसला किया।

हिम्मत करके हासूमी आगे बढ़े और किसी तरह के उस टनल के मुहाने तक पहुंच गई घंटियों और ड्रम्स की आवाज अब और तेज हो चुकी थी मानो वो उसी टनल में से आ रही हो। टनल के आस पास देखने पर उसे एक बोर्ड दिखा जिस पर “इसानुखी” लिखा हुआ था। सभी चेतावनीयों को नजरअंदाज कर के हासूमी ने आगे बढ़ने का फैसला किया और वो टनल के अंदर अंधेरे में अकेले ही निकल पड़ी।

अब वो ड्रम्स की आवजें जो बहुत जोर जोर से आ रही थी। एकदम से बंद हो गई घबराई हुई हासूमी धीरे-धीरे आगे बढ़ती रही और प्रार्थना करती गयी कि वह यहां से कैसे भी सुरक्षित निकल जाए और सही सलामत अपने घर पहुंच जाएं। जैसे तैसे हिम्मत करके हासूमी उस टनल के दूसरे छोर तक पहुंची और वहां उसे एक आदमी खड़ा हुआ दिखाई दिया।

रात के अंधेरे में जंगल में उस आदमी को खड़ा देखकर हासूमी डर गयी। डर के कारण हासूमी मदद के भाव से उससे बात करने की कोशिश करने लगी बात चीत से पता लगा कि वह एक टैक्सी ड्राइवर है और उसे पास ही के हीना स्टेशन छोड़ सकता है। हासूमी उस जगह से कैसे भी निकलना चाहती थी इसलिए उसने उस आदमी की मदद ली और उसकी टैक्सी में बैठ गयी। वो अनजान आदमी उसे पहाड़ों की तरफ ले जाने लगा।

टैक्सी में बैठने के बाद हासूमी ने पोस्ट किया कि यह टैक्सी ड्राइवर एक भला इंसान लगता है और अब हम पहाड़ों की ओर बढ़ रहे हैं लेकिन इसके कुछ ही देर बाद हासूमी का एक और पोस्ट आया जिसमें हासूमी ने कहा कि अभी तक सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन अब यह ड्राइवर कुछ अजीब सी हरकतें कर रहा है और मन ही मन कुछ बड़बड़ा रहा है जिसे समझ में समझने में असमर्थ हूं मौका मिलते ही मैं इस कार से निकल जाउंगी।

यही हासूमी की तरफ से आया आखरी पोस्ट था इस पोस्ट के बाद हासूमी का कोई अता पता नहीं लग पाया। हासूमी कहां लापता हुयी, क्या वो उस कार से निकल पाई, या उसके साथ कोई अनहोनी हो गई थी, वो उस वक़्त कहाँ थी ये आज तक भी एक अबूझी पहेली है। आखिर हासूमीी के साथ उस रात क्या हुआ था, आखिर कैसे वो जिस ट्रेन से रोज़ सफर करती थी वो ट्रेन उसे ऐसे सफर पर ले गई जो बहुत मिस्टीरियस और अकल्पनीय थी।

शिन हमामात्सु से निशिका जीमा स्टेशन के बीच कोई टनल नहीं थी तो आखिर उस दिन रास्ते में टनल कहां से आई, क्या वो ट्रेन किसी अज्ञात रास्ते पर निकल गई थी और वह पांच अन्य लोग कौन थे जो उस रात हासूमी के साथ ट्रेन में सफर कर रहे थे।

घंटियों और ड्रम्स की आवाजें कहां से आ रही थी और वह बूढ़ा आदमी और टनल के बाद वो आदमी कौन कौन था। क्या वो ट्रेन किसी Parallel World की यात्रा पर निकल चुकी थी। ऐसा अंदेशा इसलिए लगा था क्योंकि वास्तविक दुनिया में ना तो शिन हमामात्सु से निशिका जीमा के बीच कोई टनल है और ना ही कोई किसारगी नाम का रेलवे स्टेशन। कुल मिलाकर यह घटना इतनी पेचीदा और मिस्टीरियस है की इस घटना को परत दर परत जितना भी खोलने की कोशिश की जाए यह उतना ही उलझती जाती है।


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