Bhuj: The Pride of India Real Story In Hindi

Bhuj: The Pride of India Real Story

Bhuj: The Pride of India Real Story In Hindi – दोस्तों भारत जैसे देश में कई ऐसे गुमनाम हीरो हैं जिनकी कहानियां अभी हम तक नहीं पहुंची है लेकिन वास्तव में वे हमारी आन बान शान के ख़ातिर अपनी जानी की क़ुर्बानी देने में कभी नहीं हिचके वहीँ कुछ ऐसे भी जिनके ज़िंदा होने के बावजूब वे आज भी कहीं गुमनामी की घुल तले दबे हैं।

आज सिनेमा हमें एक नया माध्यम मिला है जिसके ज़रिये कुछ कहानियां हमारे सामने कभी कभार आ ही जाती है ऐसे ही हज़ारों कहानियों में से एक कहानी पर फिल्म बानी है “Bhuj The Pride Of India” जिसमे गुजरात बॉर्डर पर तैनात भारतीय जवानों और गुजरात धरती पर पैदा हुयी 300 से भी अधिक साहसी और वीर महिलाओं की कहानी बताई गयी है।

भारत एक मात्र ऐसा देश है जिसने अपने पिछले 10 हज़ार सालों के इतिहास में कभी किसी दुसरे देश पर आक्रमण नहीं किया लेकिन फिर 1947 भारत के नीति निर्माताओं से एक गलती हो गयी कुछ नेताओं ने देख ले लोगों को भड़का कर एक अलग देश की मांग की और कुछ भोले राजनेताओं ने ना जाने किस पागलपन में या फिर कहे की नादानी में भारत के तीन टुकड़े कर दिए पकिस्तान, भारत और ईस्ट पाकिस्तान और इसी गलती की सजा भारत आज तक भुगत रहा है। तो चलिए शुरू करे हैं bhuj movie real story in hindi और देखते हैं क्या हुआ था सन 1971 में जिसने इतिहास रच दिया था।

1971 भारत पाकिस्तान युद्ध –

पाकिस्तान बार बार भारत पर कायराना हमला करता है और वापस अपने बिल में जाकर छुप जाता है ऐसी ही एक गलती उसने 1971 में की थी। 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध छिड़ गया जिसमे भारत जीता और पाकिस्तान से ईस्ट पाकिस्तान को आजाद करा कर आज का बांगलदेश बनाया गया।

इसी युद्ध में गुजरात बॉर्डर पर भुज नाम के स्थान की कहानी है “Bhuj The Pride Of India” फिल्म में अजय देवगन ने Squadron Leader विजय कुमार कार्णिक का रोल अदा किया है। Squadron Leader विजय कुमार कार्णिक ने सं 1971 की जंग में जो किया उसे सुनकर आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे।

इंडियन एयरफोर्स के बेस पर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान लगातार 14 दिनों तक बम बरसा रहा था उस ऑपरेशन को पाकिस्तान ने चंगेज़ खान नाम दिया था। 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान एयरफोर्स की तरफ से ऑपरेशन चंगेज़ खान लांच किया गया था। भारत के साथ यह ऑपरेशन युद्ध की शुरुवात था।

भारत की वायुसेना दुनिया की सबसे मज़बूत वायुसेनाओं में आती है 1971 की जंग भारत ने इसी मज़बूत वायुसेना के बल पर जीती थी। पाकिस्तान का इरादा था की भारत की मजबूती को ही उसकी कमज़ोरी बना दिया जाए। पाकिस्तान ने सोचा की क्या हो भारत का एक भी फाइटर प्लेन हवा में उड़ान न भर पाए। ना तो भारत हवाई हमला कर पायेगा और ना ही युद्ध सामग्री हवाई रस्ते से भारतीय सैनिकों तक पहुँच पायेगी।

इसी लिए पाकिस्तान वायुसेना ने भारतीय वायुसेना के 11 एयरफील्ड्स को निशाना बनाया था जिसमे कश्मीर में स्थित संस्थान भी शामिल था। पाकिस्तान वायुसेना ने अमृतसर, अंबाला, आगरा, अवंतीपुरा, बीकानेर, हलवारा, जोधपुर, जैसलमेर, पठानकोट, भुज, श्रीनगर, और उत्तर तलाई के अलावा अमृतसर स्थित एयरडिफेंस रेडर और फरीदकोट में भी हमला किया था।

उस समय तत्कालीन प्रधान मंत्री इंद्रा गाँधी ने देश के अपने संबोधन पे युद्ध की घोषणा कर दी थी। पाकिस्तान ने सोचा था की भारत के सभी एयरफील्ड्स को निस्तेनाबूत कर दिया जाए। कई जगहों पर हमले के साथ पाकिस्तान ने गुजरात के कच्छ में स्थित भुज के रुद्रमाता एयरफोर्स फील्ड्स पर भी हमला बोला था।

पाकिस्तान ने इस एयरफोर्स पर 14 दिनों तक 35 बार हमला किया था हमले में उसने 92 बमों और 22 रॉकेट्स को दागा। इससे पाकिस्तान अपनी योजना में कुछ हद तक सफ़ल भी हुआ और पाकिस्तान ने जो सोचा वो हो भी रहा था। लेकिन जो भारतीयों ने किया उसकी कल्पना पाकिस्तान ने अपने सपने में भी नहीं की थी।

इस एयरबेस की कमान Squadron Leader विजय कुमार कार्णिक के हाथों में थी। विजय कुमार कार्णिक 1962 में भारतीय वायुसेना में नियुक्त हुए थे। 1971 आते आते उन्होंने 1965 की जंग देख ली थी और उनके लिए युद्ध कोई नयी बात नहीं थी।

8 दिसंबर 1971 की रात पाकिस्तान ने सेबर्जेट के 8 Squadron भेजे और भुज एयरबेस पर 14 नापलाम बम गिरा दिए जिससे भारतीय वायुसेना की हवाई पट्टी तहस नहस हो गयी। युद्ध के बीच एयरबेस वापस चालु करना ज़रूरी था उसके लिए हवाई पट्टियों की मरम्मत की आवश्यकता थी लेकिन युद्ध की उस स्थिति में समय कम था और मरम्मत करने वाले भी कम थे।

जंग की उस रात विजय कुमार कार्णिक धैर्य और शातिर दिमाग की परीक्षा थी। उन्होंने हवाई पट्टी की मरम्मत के लिए स्थानीय लोगों की मदद लेने का फैसला लिया और उन्होंने भुज के माधापर गांव के 300 से भी ज्यादा महिलाओं को इस काम को करने के लिए मन लिया। इन 300 महिलाओं को 72 घंटे के अंदर हवाई पट्टियों की मरम्मत करने का जिम्मा सौपा गया।

Squadron Leader विजय कुमार कार्णिक ने अपने 2 ऑफिसर और 50 वायुसैनिक और डिफेंस सिक्युरिटी के 60 जवानो के साथ मिलकर पाकिस्तान की तरफ से बमबारी के बीच सिर्फ़ 72 घंटे के अंदर इस एयरबेस को ऑपरेशनल रखने का मिशन पूरा किया।

एयरफील्ड्स पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी लेकिन Squadron Leader विजय कुमार कार्णिक के नेत्रित्व में फिर से तैयार हो चुकी थी। जिससे ऑफिसर और जवानों को लेकर आ रही फ्लाइट सुरक्षित तरीके से उतर चुकी थी। एयरफील्ड्स ऑपरेशनल होने के तुरन्त बाद भारत ने जवाबी कार्यवाही शुरू की 16 दिसंबर आते आते पाकिस्तान के हाथ पाँव फूल गए और उसने हथियार दाल दिए। वहीं बाद में सरकार ने एयरबेस की मरम्मत करने वाली महिलाओं को पुरस्कार सहित 50-50 हज़ार नगद देकर सम्मानित किया।

वहीं इस फ़िल्म में एक और महत्पूर्ण शख्सियत है रणछोरदास रबारी जिसका रोल निभाया है संजय दत्त ने। इस शख्श के बारे में जानने के लिए आपको जाना पड़ेगा सन 2008, आप फिल्ड मार्शल मानेकशॉ को तो जानते ही होंगे वो 1971 भारत-पाकिस्तान की जंग के दौरान भारत के चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ थे वो इंडियन आर्मी के पहले ऑफिसर थे जिन्हें फिल्ड मार्शल की रैंक से नवाज़ा गया था।

2008 से फिल्ड मार्शल मानेकशॉ सुवेलिंग्टन हॉस्पिटल तमिलनाडु में भर्ती थे वो बेहद ही ज़्यादा बीमार थे। अर्धमूर्छित अवस्था में वे फिर भी एक नाम अक्सर लेते रहते थे “पागी”। डॉक्टरों से भी रहा नहीं गया और आखिरकार उन्होंने पूछ ही लिए की सर कौन है ये पागी।

पागी कौन थे ?

उन्होंने बताया 1971 की वॉर में भारत युद्ध जीत चूका था जनरल मानेकशॉ ढाका में थे। आदेश दिया गया की पागी को बुलाओ डिनर आज उनके साथ ही करेंगे हेलीकॉप्टर भेजा गया हेलीकॉप्टर पे सवार होते समय पागी की एक थैली नीचे रह गयी जिसे उठाने के लिए हेलीकॉप्टर नीचे उतारा गया।

अधिकारीयों ने नियम अनुसार हेलीकॉप्टर में रखने से पहले थैली को खोलकर देखा तो देखकर दंग रह गए उसमे 2 रोटी, प्याज़ और बेसन का एक पकवान भरा था। डिनर में एक रोटी पागी ने कई और दूसरी उन्होंने ने।

अब आते हैं 2015 में उत्तर गुजरात के सुईगाओ इंटरनेशनल बॉर्डर की एक बॉर्डर पोस्ट को रणछोरदास पोस्ट नाम दिया गया। यहाँ पहली बार हुआ की किसी आम आदमी ने नाम पर सेना की कोई पोस्ट हो और साथ ही उसकी मूर्ति भी लगायी गयी हो। पागी का अर्थ होता है “मार्गदर्शक” अर्थात वह व्यक्ति जो रेगिस्तान में रास्ता दिखाए।

रणछोरदास रबारी को जनरल सेम माणिक सोइसी नाम से बुलाते थे। रणछोरदास गुजरात के बनासकाठा जिले के पाकिस्तान सीमा से सठे गांव पेथापुर गठरो के निवासी थे। वे भेड़ बकरी और ऊँट पालन का काम करते थे। उनके जीवन में बदलाव तब आया जब उन्हें 58 वर्ष की उम्र में बनासकाठापुलिस अदीक्षाक वनराज सिंह झाला ने उन्हें पुलिस के मार्गदर्शक के रूप में रख लिया।

उनमे हुनर इतना था की ऊँट के पैरों के निशान देखकर ही बता देते थे की उसपर कितने आदमी सवार हैं। इंसानी पैरों के निशान देखकर वज़न से लेकर उम्र तक का अंदाज़ा लगा लेते थे। कितनी देर पहले का निशान है और कितनी दूर गया होगा सब एकदम सटीक आंकलन जैसे कोई मशीन हो।

1965 के युद्ध के आरम्भ में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय गुजरात में कच्छ सीमा पर स्थित विधकोट पर कब्ज़ा कर लिया। इस मुठभेड़ में लगभग 100 भारतीय सैनिक हतात हो गए थे और भारतीय सेना की एक 10 हज़ार सैनिकों वाली तुकडी को 3 दिन में छारकोट पोहचना ज़रूरी था तब आवश्यकता पड़ी थी पहली बार रणछोरदास पागी की।

रेगिस्तानी रास्तों पर अपनी पकड़ की बदौलत उन्होंने सेना को तय समय से 12 घंटे पहले ही मंज़िल तक पोहचा दिया था। सेना के मार्दर्शन के लिए उन्हें सेम साहब से खुद चुना था और सेना में एक विशेष पद श्रजित किया गया। पागी अर्थात पद अथवा पैरों का जानकार।

भारतीय सीमा में छुपे 1200 पाकिस्तानी सैनिकों की लोकेशन और उनकी अनुमानित संख्या केवल उनके पद चिन्हो से पहचानकर भारतीय सेना को बता दी थी। और इतना की काफी था भारतीय सेना के लिए मोर्चा जीतने के लिए। 1971 की जंग में सेना के मार्गदर्शन के साथ साथ अग्रिम मोर्चे तक गोलाबारूद पोहचना भी पागी के काम का हिस्सा था।

पाकिस्तान के पालीनगर शहर में जो भारतीय तिरंगा फेहराया था उस जीत में पाएगी की अहम् भूमिका थी। सेम साहब ने स्वयं 300 रुपए नगद पुरस्कार अपनी जेब से दिया था पागी साहब को। पागी को 3 सम्मान भी मिले। 27 जून 2008 को सेम मानेकशॉ का देहांत हो गया और 2009 में पागी ने भी सेना से स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले ली। तब पागी की उम्र 108 वर्ष थी जी हाँ 108 वर्ष की में स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति और सन 2013 में 112 वर्ष की उम्र पागी का देहांत हो गया।

Bhuj: The Pride of India फिल्म में Squadron Leader विजय कुमार कार्णिक का किरदार अजय देवगन निभा रहे हैं, पागी का किरदार संजय दत्त निभा रहे हैं और 300 महिलाओं का नेतृत्व करने वाले महिला का किरदार सोनाक्षी सिन्हा निभा रही है जबकी एक भारतीय जासूस कर किरदार निभा रही है नोरा फ़तेहि।


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