Ganesh Chalisa Meaning In Hindi | श्री गणेश चालिसा का अर्थ

Ganesh Chalisa Meaning In Hindi

हेलो दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस Blog में आज हम आपके लिए लेकर आए हैं Ganesh Chalisa Meaning In Hindi. हम सभी Ganesh Chalisa पढ़ते हैं लेकिन सभी को Ganesh Chalisa का मतलब नहीं पता होता क्योंकि अधिकतर लोगों को संस्कृत नहीं आती तो इसलिए आज हम आपके लिए लेकर आये हैं Ganesh Chalisa Meaning In Hindi और साथ ही हम आपको आज गणेश चालीसा के फायदे को भी समझ पाएंगे जिससे आप और भी भक्ति भाव के साथ श्री गणेश जी की पूजा को सम्पूर्ण कर सकेंगे तो चलिए शुरू करते हैं Ganesh Chalisa Meaning With Lyrics.


Ganesh Chalisa Lyrics With Meaning In Hindi

॥दोहा॥

जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥

अर्थ: हे सद्गुणों के सदन भगवान श्री गणेश आपकी जय हो, कवि भी आपको कृपालु बताते हैं। आप कष्टों का हरण कर सबका कल्याण करते हो, माता पार्वती के लाडले श्री गणेश जी महाराज आपकी जय हो।

॥चौपाई॥

जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥

अर्थ: हे देवताओं के स्वामी, देवताओं के राजा, हर कार्य को शुभ व कल्याणकारी करने वाले भगवान श्री गणेश जी आपकी जय हो, जय हो, जय हो।

जै गजबदन सदन सुखदाता।
विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥

अर्थ: घर-घर सुख प्रदान करने वाले हे हाथी से विशालकाय शरीर वाले गणेश भगवान आपकी जय हो। श्री गणेश आप समस्त विश्व के विनायक यानि विशिष्ट नेता हैं, आप ही बुद्धि के विधाता है बुद्धि देने वाले हैं।

वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

अर्थ: हाथी के सूंड सा मुड़ा हुआ आपका नाक सुहावना है पवित्र है। आपके मस्तक पर तिलक रुपी तीन रेखाएं भी मन को भा जाती हैं अर्थात आकर्षक हैं।

राजत मणि मुक्तन उर माला।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥

अर्थ: आपकी छाती पर मणि मोतियां की माला है आपके शीष पर सोने का मुकुट है व आपकी आखें भी बड़ी बड़ी हैं।

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥

अर्थ: आपके हाथों में पुस्तक, कुठार और त्रिशूल हैं। आपको मोदक का भोग लगाया जाता है व सुगंधित फूल चढाए जाते हैं।

सुन्दर पीताम्बर तन साजित।
चरण पादुका मुनि मन राजित॥

अर्थ: पीले रंग के सुंदर वस्त्र आपके तन पर सज्जित हैं। आपकी चरण पादुकाएं भी इतनी आकर्षक हैं कि ऋषि मुनियों का मन भी उन्हें देखकर खुश हो जाता है।

धनि शिव सुवन षडानन भ्राता।
गौरी लालन विश्व-विख्याता॥

अर्थ: हे भगवान शिव के पुत्र व षडानन अर्थात कार्तिकेय के भ्राता आप धन्य हैं। माता पार्वती के पुत्र आपकी ख्याति समस्त जगत में फैली है।

ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे।
मुषक वाहन सोहत द्वारे॥

अर्थ: ऋद्धि-सिद्धि आपकी सेवा में रहती हैं व आपके द्वार पर आपका वाहन मूषक खड़ा रहता है।

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।
अति शुची पावन मंगलकारी॥

अर्थ: हे प्रभु आपकी जन्मकथा को कहना व सुनना बहुत ही शुभ व मंगलकारी है।

एक समय गिरिराज कुमारी।
पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥

अर्थ: एक समय गिरिराज कुमारी यानि माता पार्वती ने पुत्र प्राप्ति के लिए भारी तप किया।

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।
तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥

अर्थ: जब उनका तप व यज्ञ अच्छे से संपूर्ण हो गया तो ब्राह्मण के रुप में आप वहां उपस्थित हुए।

अतिथि जानी के गौरी सुखारी।
बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥

अर्थ: आपको अतिथि मानकार माता पार्वती ने आपकी अनेक प्रकार से सेवा की।

अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥

अर्थ: जिससे प्रसन्न होकर आपने माता पार्वती को वर दिया।

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।
बिना गर्भ धारण यहि काला॥

अर्थ: आपने कहा कि हे माता आपने पुत्र प्राप्ति के लिए जो तप किया है, उसके फलस्वरूप आपको बहुत ही बुद्धिमान बालक की प्राप्ति होगी और बिना गर्भ धारण किए इसी समय आपको पुत्र मिलेगा।

गणनायक गुण ज्ञान निधाना।
पूजित प्रथम रूप भगवाना॥

अर्थ: जो सभी देवताओं का नायक कहलाएगा, जो गुणों व ज्ञान का निर्धारण करने वाला होगा और समस्त जगत भगवान के प्रथम रुप में जिसकी पूजा करेगा।

अस कही अन्तर्धान रूप हवै।
पालना पर बालक स्वरूप हवै॥

अर्थ: इतना कहकर आप अंतर्धान हो गए व पालने में बालक के स्वरुप में प्रकट हो गए।

बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना।
लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥

अर्थ: माता पार्वती के उठाते ही आपने रोना शुरु किया, माता पार्वती आपको गौर से देखती रही आपका मुख बहुत ही सुंदर था माता पार्वती में आपकी सूरत नहीं मिल रही थी।

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।
नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥

अर्थ: सभी मगन होकर खुशियां मनाने लगे नाचने गाने लगे। देवता भी आकाश से फूलों की वर्षा करने लगे।

शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं।
सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥

अर्थ: भगवान शंकर माता उमा दान करने लगी। देवता, ऋषि, मुनि सब आपके दर्शन करने के लिए आने लगे।

लखि अति आनन्द मंगल साजा।
देखन भी आये शनि राजा॥

अर्थ: आपको देखकर हर कोई बहुत आनंदित होता। आपको देखने के लिए भगवान शनिदेव भी आये।

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।
बालक, देखन चाहत नाहीं॥

अर्थ: लेकिन वह मन ही मन घबरा रहे थे ( दरअसल शनि को अपनी पत्नी से श्राप मिला हुआ था कि वे जिस भी बालक पर मोह से अपनी दृष्टि डालेंगें उसका शीष धड़ से अलग होकर आसमान में उड़ जाएगा) और बालक को देखना नहीं चाह रहे थे।

गिरिजा कछु मन भेद बढायो।
उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥

अर्थ: शनिदेव को इस तरह बचते हुए देखकर माता पार्वती नाराज हो गई व शनि को कहा कि आप हमारे यहां बच्चे के आने से व इस उत्सव को मनता हुआ देखकर खुश नहीं हैं।

कहत लगे शनि, मन सकुचाई।
का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥

अर्थ: इस पर शनि भगवान ने कहा कि मेरा मन सकुचा रहा है, मुझे बालक को दिखाकर क्या करोगी? कुछ अनिष्ट हो जाएगा।

नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।
शनि सों बालक देखन कहयऊ॥

अर्थ: लेकिन इतने पर माता पार्वती को विश्वास नहीं हुआ व उन्होंनें शनि को बालक देखने के लिए कहा।

पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।
बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥

अर्थ: जैसे ही शनि की नजर बालक पर पड़ी तो बालक का सिर आकाश में उड़ गया।

गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी।
सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥

अर्थ: अपने शिशु को सिर विहिन देखकर माता पार्वती बहुत दुखी हुई व बेहोश होकर गिर गई। उस समय दुख के मारे माता पार्वती की जो हालत हुई उसका वर्णन भी नहीं किया जा सकता।

हाहाकार मच्यौ कैलाशा।
शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥

अर्थ: इसके बाद पूरे कैलाश पर्वत पर हाहाकार मच गया कि शनि ने शिव-पार्वती के पुत्र को देखकर उसे नष्ट कर दिया।

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।
काटी चक्र सो गज सिर लाये॥

अर्थ: उसी समय भगवान विष्णु गरुड़ पर सवार होकर वहां पंहुचे व अपने सुदर्शन चक्कर से हाथी का शीश काटकर ले आये।

बालक के धड़ ऊपर धारयो।
प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥

अर्थ: इस शीष को उन्होंनें बालक के धड़ के ऊपर धर दिया। उसके बाद भगवान शंकर ने मंत्रों को पढ़कर उसमें प्राण डाले।

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥

अर्थ: उसी समय भगवान शंकर ने आपका नाम गणेश रखा व वरदान दिया कि संसार में सबसे पहले आपकी पूजा की जाएगी। बाकि देवताओं ने भी आपको बुद्धि निधि सहित अनेक वरदान दिये।

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।
पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥

अर्थ: जब भगवान शंकर ने कार्तिकेय व आपकी बुद्धि परीक्षा ली तो पूरी पृथ्वी का चक्कर लगा आने की कही।

चले षडानन, भरमि भुलाई।
रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥

अर्थ: आदेश होते ही कार्तिकेय तो बिना सोचे विचारे भ्रम में पड़कर पूरी पृथ्वी का ही चक्कर लगाने के लिए निकल पड़े, लेकिन आपने अपनी बुद्धि लड़ाते हुए उसका उपाय खोजा।

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।
तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥

अर्थ: आपने अपने माता पिता के पैर छूकर उनके ही सात चक्कर लगाये।

धनि गणेश कही शिव हिये हरषे।
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥

अर्थ: इस तरह आपकी बुद्धि व श्रद्धा को देखकर भगवान शिव बहुत खुश हुए व देवताओं ने आसमान से फूलों की वर्षा की।

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।
शेष सहसमुख सके न गाई॥

अर्थ: हे भगवान श्री गणेश आपकी बुद्धि व महिमा का गुणगान तो हजारों मुखों से भी नहीं किया जा सकता।

मैं मतिहीन मलीन दुखारी।
करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥

अर्थ: हे प्रभु मैं तो मूर्ख हूं, पापी हूं, दुखिया हूं मैं किस विधि से आपकी विनय आपकी प्रार्थना करुं।

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।
जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥

अर्थ: हे प्रभु आपका दास रामसुंदर आपका ही स्मरण करता है। इसकी दुनिया तो प्रयाग का ककरा गांव हैं जहां पर दुर्वासा जैसे ऋषि हुए हैं।

अब प्रभु दया दीना पर कीजै।
अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥

अर्थ: हे प्रभु दीन दुखियों पर अब दया करो और अपनी शक्ति व अपनी भक्ति देनें की कृपा करें।

॥दोहा॥

श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥

अर्थ: श्री गणेश की इस चालीसा का जो ध्यान से पाठ करते हैं। उनके घर में हर रोज सुख शांति आती रहती है उसे जगत में अर्थात अपने समाज में प्रतिष्ठा भी प्राप्त होती है।

सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश॥

अर्थ: सहस्त्र यानि हजारों संबंधों का निर्वाह करते हुए भी ऋषि पंचमी (गणेश चतुर्थी से अगले दिन यानि भाद्रप्रद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी) के दिन भगवान श्री गणेश की यह चालीसा पूरी हुई।

Shri Ganesh Chalisa Video 

गणेश चालीसा के फायदे (Benefits Of Ganesh Chalisa)

1. प्रतिदिन गणेश चालीसा का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा एवं बुरी आत्माओं से मुक्ति मिलती है।

2. प्रतिदिन गणेश चालीसा का पाठ करने से बुद्धि में वृद्धि होती है।

3. गणेश चालीसा का पाठ करने से सारे काम सुख पूर्वक संपन्न हो जाते हैं।

4. प्रतिदिन श्री गणेश चालीसा का पाठ करने से घर में सकारात्मकता आती है और साथ ही माँ लक्ष्मी घर में विराजमान रहती हैं।

5. अगर में घर में किसी तरह की परिवारिक कलह हो तो प्रतिदिन श्री गणेश चालीसा का पाठ करने से परिवारिक कलह का भी नाश होता है।

6. किसी भी तरह की परेशानी को दूर करने के लिए श्री गणेश चालीसा का पाठ ज़रूर करना चाहिए। परेशानी किसी भी तरह की हो स्वस्थ संबंधी, धन संबंधी, शत्रु संबंधी, मानसिक व शारारिक किसी भी तरह की कोई भी परेशानी श्री गणेश चालीसा का पाठ करने से दूर हो जाती हैं।

7. प्रतिदिन श्री गणेश चालीसा का पाठ करने से मनुष्य में आत्मविश्वास बढ़ता है।

8. प्रतिदिन श्री गणेश चालीसा का पाठ करने से दिमाग से बुरे विचारों का नाश हो जाता है और दिमागी शक्ति में बढ़ोतरी होती है।

9. हमारे बहुत से प्रयास करने के बावजूत भी हमारे काम पूरे नहीं हो पाते और बहुत सी अड़चन आती रहती है, प्रतिदिन श्री गणेश चालीसा का पाठ करने से हमारे कार्य में आने वाली अड़चन दूर हो जाती हैं और सभी प्रकार के कामों में सफलता प्राप्त होती है।

गणेश जी को खुश करने के उपाय –

आज हम जिस समाज में रह रहे हैं वो कुछ ऐसा है की लोग भक्ति से ज्यादा अंधभक्ति करते हैं। आज कल ये बात आम हैं की घर में माँ बाप भूखे होते हैं और लोग बाहर खूब दान धरम करते हैं। जिस घर में माँ बाप या बुज़ुर्गों का सम्मान नहीं होता उस घर में कभी भगवन नहीं आते तो इस बात का ध्यान ज़रूर रखें की पहले माँ बाप खुश हो फिर बाद में भगवान।

गणेश जी को खुश करने के आप किसी भी बुधवार से शुरुवात कर सकते हैं। गणेश जी की आराधना करने के लिए सबसे पहले आप गणेश जी की मूर्ति को एक लकड़ी की चौपाई पर पीला कपड़ा बिछाकर ईशान कोण में स्थापित करें। मूर्ति इस तरह स्थापित करें। गणेश जी को भोग लगाने के लिए उनका मनपसंद भोग यानी मोदक का प्रयोग करे और साथ ही दूर्वा (एक विशेष प्रकार ही घांस) का भी प्रयोग करें।

सबसे पहले सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नहा कर एक आसान पर बैठकर एक साफ़ पात्र में गणेश जी की मूर्ति रखें और श्री गणेश जी का शक्कर के पानी से अभिशेक करें और अभिशेक करते हुए “ॐ गं गणपतये नमः” करें। अभिशेक करने के बाद गणेश जी को चौपाई पर स्थापित करें और गणेश जी को चंदन और कुमकुम लगाएं, दूर्वा और पीले पुष्प चढ़ाएं, प्रसाद के रूप में मोदक अर्पित करें, तांबे के पात्र में गणेश जी के लिए पानी रखे, धुप जलाएं और देसी गाय के घी से दीपक जलाकर आरती करें।

गणेश जी को खुश करने का मंत्र –

गणेश जी वैसे तो बहुत जल्दी खुश हो जातें हैं और गणेश जी को खुश करने के लिए ज़्यादा परेशानी नहीं होती। मगर अच्छे मन से किये याद किये जाने पर भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं। श्री गणेश जी को खुश करने के लिए आप रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करके “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें। इस मंत्र का जाप 108 बार ही करें उससे कम नहीं।

गणेश जी की मूर्ति कैसी होनी चाहिए –

जब भी कोई गणेश जी की मूर्ति लेने जाता है तो अक्सर ये सवाल मन में उठता है की श्री गणेश की मूर्ति की प्रकार की होनी चाहिए। वैसे तो भगवन का हर रूप ही शुभ है। कई बार लोग सोचते हैं की गणेश जी की मूर्ति में सूढ़ की दिशा में होना शुभ होता है। गणेश जी की सूंढ़ चाहे दाहिनी दिशा में हो या फिर बायीं दिशा में दोनों ही शुभ है। दाहिनी सूंढ़ वाले गणेश जी विनायक या सिद्धि विनायक के नाम से जाने जाते हैं और बायीं सूंढ़ वाले वक्रतुण्ड कहलाते हैं।

गणेश जी की मूर्ति मिट्टी की बनी होनी चाहिए और बैठी हुयी मुद्रा में होनी चाहिए। खड़ी हुयी गणेश जी की मूर्ति चलाईमान मानी जाती है और पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता इसलिए हमेशा मूर्ति बैठी हुयी लेना चाहिए।

गणेश जी की आरती (Shri Ganesh Aarti)

Shri Ganesh Aarti

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी।
माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी।।

पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा।।

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।।

सूरश्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊँ बलिहारी।।

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

यह भी देखें:- हनुमान चालीसा का अर्थ, फायदे एवं आरती। 

यह भी देखें:- दुर्गा चालीसा का अर्थ, फायदे एवं आरती। 


हम आशा करते हैं आपको हमारी आज की ये Shri Ganesh Chalisa Meaning In Hindi पसंद आयी होगी. अगर आप ऐसी ही Chalisa और Chalisa Meaning In Hindi पढ़ना चाहतें हैं तो Hindilikh Website को Bookmark कर सकतें हैं या Website को Subscribe भी कर सकतें हैं. Durga Chalisa, Hanuman Chalisa के साथ साथ हम Moral Stories In Hindi For Kids और Short Story For Kids In Hindi हमारी Website पर पब्लिश करते रहतें हैं. Hindi Kahani के अलावा Hindilikh Website पर आपको Ramayan Story In Hindi और Mahabharat Story In Hindi आदि भी आपको देखने को मिलेंगी आप चाहें तो इन्हें भी पढ़ सकतें हैं।

Leave a Comment