Top 4 Hindi Kahani For Childrens In Hindi

Hindi Kahani For Children’s In Hindi

हेलो दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस Blog में आज हम आपके लिए लेकर आए हैं Hindi Kahani For Childrens In Hindi. बच्चों को ज्ञानवर्धक जानकारी देने का एक अच्छा ज़रिया है Hindi Kahaniyan जिससे आप बच्चो को अच्छे संस्कार दे सकते है वो भी मनोरंजक तरीके से। हम सभी दादी-नानी से राजाओं की, परियों की, पशु-पक्षियों की और भूतप्रेत,जिन्न आदि की कहानियां सुन-सुन कर बड़े हुए हैं।

बेशक आज ज़माना बदल गया है और इसलिए हम Digital तरीके से आपके लिए लेकर आए हैं Hindi Kahani For Childrens In Hindi और ये Hindi Kahaniyan आप कभी भी कहीं भी अपने Laptop, Mobile, Tablet आदि पर पड़ सकते हैं। Hindilikh एक ऐसी Website है जहाँ आपको न सिर्फ Hindi Kahani For Kids बल्कि इसके साथ आपको Bhutiya Kahani, Hindi Kavita और Mahabharat और Ramayan Ki Kahani जैसी अच्छी-अच्छी कहानियां पढ़ने को मिलेंगी। तो चलिए शुरू करते है आज की New Hindi Kahani For Kids और सीखते हैं कुछ नया इन Hindi Kahaniyon के ज़रिया।

बदसूरत ऊंट (Education Story In Hindi)

 

एक ऊंट था। दूसरों की निंदा करने की उसकी बुरी आदत थी। वह हमेशा दुसरे जानवरों और चिड़ियों की शकल-सूरत की खिल्ली उड़ाता रहता था। उसके मुँह से कभी किसी जानवर किब तारीफ नहीं सुनाई देती थी।

गाय वह कहता, “ज़रा अपनी शकल तो देखो। कितनी बदसूरत हो तुम। हड्डियों का ढांचा मात्र है तुम्हारा शरीर। लगता है तुम्हारी हड्डियाँ खाल फाड़कर किसी क्षण बाहर निकल आएगी।”
भैंस से वह कहता, “तुमने तो विधाता के साथ ज़रूर कोई शैतानी की होगी। तभी तो उसने तुझे काली-कलूटी बनाया है। तुम्हारे टेड़े-मेढे सींग तुम्हे और भी बदसूरत बना देते है।”

हाथी को चिढ़ाता हुआ वह कहता, “तुम तो सभी जानवरों में कार्टून जैसे दिखते हो। विधाता मज़ाक-मज़ाक में तुम्हे बनाया होगा। तुम्हारे शरीर के अंगों में किसी प्रकार का संतुलन नहीं है। तुम्हारा शरीर कितना विशाल है और पूँछ कितनी छोटी ! तुम्हारी आँखे कितनी छोटी है और कान इतने बड़े-बड़े सूप जैसे। तुम्हारी सूंड, पैर और शरीर के अन्य अंगों के बारे में तो मैं बस चुप रहूं, यही ठीक रहेगा।”
तोते से वह कहता, “तुम्हारी टेढ़ी और लाल रंग की चोंच बना कर विधाता ने वाकई तुम्हारे साथ मज़ाक किया है।”

इस तरह ऊंट हमेशा हर जानवर की खिल्ली उड़ाता रहता था। एक बार ऊंट की मुलाकात एक लोमड़ी से हों गयी। वह बड़ी ही मुंहफट थी और किसी को भी खरी बात सुनाने से नहीं हिचकती थी। ऊंट उसके बारे में उल्टा-सीधा बोलना शुरू करे, इसके पहले ही लोमड़ी ने कहा,

“अरे ऊंट, तू सभी जानवरो बारे में उल्टी-सीधी बातें करने की अपनी गन्दी आदत छोड़ दे। ज़रा अपनी शकल-सूरत तो देख। तुम्हारा लंम्बा चेहरा, पत्थर जैसी तुम्हारी आँखे, पीले-पीले गंदे दांत, टेढ़े-मेढे भद्दे पैर और तुम्हारी पीठ पर यह भद्दा सा कूबड़। सभी जानवरों में सबसे बदसूरत तू ही है। दुसरे जानवरों में तो एक-दो खामियाँ है, पर तुममे तो बस खामियाँ-ही-खामियाँ है।”लोमड़ी की खरी-खरी बातें सुन कर ऊंट का सिर शर्म झुक गया। वह चुपचाप वहाँ से खिसक गया।

शिक्षा*****

|| दूसरों की कमियाँ ढूंढ़ने के पहले अपनी कमियों पर नज़र डालिऐ ||

पहाड़ और चूहा (Hindi Kahani For Childrens In Hindi)

पहाड़ और चूहा Hindi Kahani For Childrens In Hindi
पहाड़ और चूहा Hindi Kahani For Childrens In Hindi

एक बार पहाड़ और चूहे में बहस छिड़ गई। दोनों अपनी -अपनी बहादुरी की डींग हाँकने लगे।
पहाड़ ने कहा ,”तुम बहुत ही असहाय और तुच्छ प्राणी हो !”

चूहे ने जवाब दिया ,”मुझे पता है ,मैं तुम्हारे जितना बड़ा नहीं हूँ। पर एक बात है। तुम भी मेरे जितने छोटे नहीं हो। ”
पहाड़ ने कहा ,”इससे क्या हुआ ? बड़े कद के बड़े फायदे हैं। मैं आकाश में उमड़ते – घुमड़ते बादलों को भी रोक सकता हूँ। ”

चूहे ने कहा ,”तुम आकाश के बादलों को जरूर रुक सकते हो। पर मैं अपने नन्हे -नन्हे दाँतो से तुम्हारी जड़ में बड़े – बड़े बिल खोद डालता हूँ। लेकिन तुम मुझे रोक नहीं सकते। बोलो , क्या रोक सकते हो? ”

नन्हे चूहे ने अपनी चतुराई से पहाड़ का मुँह बंद कर दिया।

शिक्षा*****

|| छोटा हो या बड़ा, अपनी-अपनी जगह सब महत्वपूर्ण होते है ||

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चतुर चित्रकार (Hindi Kahani For Childrens In Hindi)
चतुर चित्रकार Hindi Kahani For Childrens In Hindi
चतुर चित्रकार Hindi Kahani For Childrens In Hindi

एक धनवान बुढ़िया थी। एक बार उसने एक नामी चित्रकार से अपना चित्र बनाने के लिए कहा। चित्रकार ने उसका चित्र बनाने के लिए कई दिनों तक कड़ी मेहनत की। जब चित्र बन कर तैयार हो गया ,तो चित्रकार ने उस महिला को अपने स्टूडियो में चित्र देखने के लिए बुलवाया।

इससे बुढ़िया बहुत खुश हुई। वह चित्र देखने के लिए चित्रकार के स्टूडियो पहुँची। वह अपने साथ अपने कुत्ते को भी ले आए थी। बुढ़िया ने वह चित्र अपने कुत्ते को दिखाते हुए कहा ,” टामी डार्लिंग ,देख तो ,ये तेरी मालकिन हैं !”पर कुत्ते ने उसमें कोई रूचि नहीं दिखाई।

धनवान बुढ़िया ने चित्रकार की ओर मुड़ते हुए कहा ,”मुझे नहीं चाहिए यह चित्र। मेरा चतुर कुत्ता तक चित्र में मुझे पहचान नहीं सका।

चित्रकार बहुत व्यवहारकुशल और बुद्धिमान था। वह अमीरों की इस तरह की सनक से भलीभाँति परिचित था। उसने नम्रतापूर्वक कहा ,”मैडम ,आप कल फिर आइए !कल मैं इसे इतना स्वाभाविक रूप दे दूँगा कि यह चित्र आपकी शक्ल-सूरत से हूबहू मिलता -जुलता बन जाएगा। फिर आपका टामी इसे देख कर दुम हिलाता हुआ ऐसे चाटने लगेगा। ”

दूसरे दिन बुढ़िया फिर अपने कुत्ते को ले कर चित्रकार के स्टूडियो पहुँची। कुत्ता चित्र को देखते ही अपनी दुम हिलाता हुआ दौड़ कर उसके पास पहुँचा और उसे चाटने लगा।

बुढ़िया यह देख कर पुलकित हो उठी। उसने कहा ,”वाह !कितना खूबसूरत चित्र बनाया है ,आपने !मेरे टामी को यह पसंद आ गया है ,इसलिए मुझे भी यह पसंद है। लाइए ,इसे बाँध कर मुझे दे दीजिए।” चित्रकार ने चित्र के लिए मोटी रकम की माँग की और महिला ने खुशी -खुशी पैसे अदा कर दिए।

जब बुढ़िया चित्र ले कर चली गई ,तो चित्रकार को बहुत हँसी आई। उसने पहले वाले चित्र में कुछ भी नहीं बदला था। उसने इस चित्र पर केवल मसालेदार गोश्त का एक टुकड़ा ले कर रगड़ दिया था,बस। गोश्त की महक नाक में जाते ही कुत्ता चित्र को चाटने लगा था।

शिक्षा*****

|| सूझबूझ से काम लेने पर बिगड़ी बात भी सुधर जाती है||

धोखेबाज़ दोस्त (Education Story In Hindi)
धोखेबाज़ दोस्त Education Story In Hindi
धोखेबाज़ दोस्त Education Story In Hindi

एक गांव में गुलाब और सतीश नामक दो दोस्त रहते थे. वे परदेस से धन कमाकर लाये तो उन्होंने सोचा कि धन घर में न रखकर कहीं और रख दें, क्योंकि घर में धन रखना खतरे से खाली नहीं है। इसलिए उन्होंने धन नींम के पेड की जड में गड्ढा खोदकर दबा दिया।

दोनों में यह भी समझौता हुआ कि जब भी धन निकालना होगा साथ-साथ आकर निकाल लेंगे। गुलाब भोला, इमानदार और नेक दिल इंसान था जबकि सतीश बेईमान था। वह दूसरे दिन चुपके से आकर धन निकालकर ले गया, उसके बाद वह गुलाब के पास आया और बोला – कि चलो कुछ धन निकाल लाये। दोनों मित्र पेड के पास आये तो देखा कि धन गायब है।

सतीश ने आव देखा न ताव फौरन मनोहर पर इल्जाम लगा दिया कि धन तुमने ही चुराया है. दोनों मे झगडा होने लगा. बात राजा तक पहूंची तो राजा ने कहा – कल नींम की गवाही के बाद ही कोई फैसला लिया जायेगा। ईमानदार गुलाब ने सोचा कि ठीक है नीम भला झूठ क्यों बोलेगा ?

सतीश भी खुश हो गया। दूसरे दिन राजा उन दोनों के साथ जंगल में गया. उनके साथ ढेरों लोग भी थे। सभी सच जानना चाहते थे. राजा ने नीम से पूछा – हे नीमदेव बताओं धन किसने लिया है ? गुलाब ने!! नीम की जड से आवाज आई।

यह सुनते ही गुलाब रो पडा और बोला – महाराज! पेड झूठ नहीं बोल सकता इसमें अवश्य ही कुछ धोखा है. कैसा धोखा ? मैं अभी सिद्ध करता हूं महाराज। यह कहकर गुलाब ने कुछ लकड़ियाँ इकट्ठी करके पेड के तने के पास रखी और फिर उनमें आग लगा दी।

तभी पेड़ से बचाओ बचाओ की आवाज़ आने लगी। राजा ने तुरंत सिपाहियों को आदेश दिया कि जो भी हो उसे बाहर निकालों। सिपाहियों ने फौरन पेड़ के खों में बैठे आदमी को बाहर खिच लिया। उसे देखते ही सब चौंक पडे. वह सतीश का पिता था। अब राजा सारा माजरा समझ गया।

शिक्षा*****

|| विपरीत परिस्थितियों में हमेशा शान्ति और सोच समझकर काम करना चाहिए ||


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