Hindi Kavita For Kids | Best Kavita In Hindi

Hindi Kavita For Kids | Best Kavita In Hindi | बच्चों की कविताएं

हेलो दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस blog में आज हम आपके लिए लेकर आए हैं Hindi Kavita For Kids. बच्चों को ज्ञानवर्धक जानकारी देने का एक अच्छा ज़रिया है Hindi Poem जिससे आप बच्चो को अच्छे संस्कार दे सकते है वो भी मनोरंजक तरीके से। हम सभी दादी-नानी से राजाओं की, परियों की, पशु-पक्षियों की आदि की Hindi Kavita सुन-सुन कर बड़े हुए हैं।

बेशक आज ज़माना बदल गया है और इसलिए हम digital तरीके से आपके लिए लेकर आए हैं Child Poem in Hindi और ये Hindi Kavita For Kids आप कभी भी कहीं भी अपने laptop, mobile, tablet आदि पर पड़ सकते हैं। Hindilikh एक ऐसी website है जहाँ आपको न सिर्फ Hindi Mein Kavita बल्कि इसके साथ आपको Bhutiya kahani, Hindi Kahaniyan और Mahabharat और Ramayan ki kahani जैसी अच्छी-अच्छी कहानियां पढ़ने को मिलेंगी। तो चलिए शुरू करते है आज की Best Kavita In Hindi और सीखते हैं कुछ नया इन Hindi Poem के ज़रिया।

पहाड़ खड़ा है (Hindi Kavita For Kids)

Hindi Kavita For Kids | Best Kavita In Hindi
Hindi Kavita For Kids | Best Kavita In Hindi

पहाड़ खड़ा है
स्थिर सर उठाए
जिसे देखता हूँ हर रोज़
आत्मीयता से

बारिश में नहाया
या फिर सर्द रातों की रिमझिम के बाद
बर्फ से ढका पहाड़
सुकुन देता है

लेकिन जब पहाड़ थरथराता है
मेरे भीतर भी
जैसे बिखरने लगता है
न ख़त्म होने वाली आदि-तिरछी
ऊँची-नींची पगडंडियों का सिलसिला

गहरी खाईयों का डरावना अँधेरा
उतर जाता है मेरी साँसों में

पहाड़ जब धंसकता है
टूटता मैं भी हूँ
मेरे रातों के अँधेरे और घने हो जाते है

जब पहाड़ पर नहीं गिरती बर्फ
रह जाता हूँ प्यासा जलविहीन मैं
सूखी नदियों का दर्द
टीसने लगता है मेरे सीने में

ये अलग बात है
इतने वर्षों के साथ है
फिर भी मैं गैर हूँ
अनचिन्हे प्रवासी-पक्षी तरह
जो बार-बार लौट कर आता है
बसेरे की तलाश में

मेरे भीतर कुनमुनाती चीटियों का शोर
खो जाता है शोर में
प्रश्नों के उगते जंगल में

फिर भी ओ मेरे पहाड़!
तुम्हारी हर कटान पर कटता हूँ मैं
टूटता-बिखरता हूँ
जिसे देख पाना
भले ही मुश्किल है तुम्हारे लिए
लेकिन
भाषा में तुम शामिल हो
पारदर्शी शब्द बनकर

मेरा विश्वाश है
तुम्हारी तमाम कोशिश के बाद भी
शब्द जिन्दा रहेंगे
समय की सीढ़ियों पर
अपने पाँव के निशान
गोदने के लिए
बदल देने के लिए
हवाओं का रुख

स्वर्णमंडित सिंहासन पर
आध्यात्मिक प्रवचनों में
या फिर संसद के गलियारों में
अखबारों की बदलती प्रतिबध्दताओं में
टीवी और सिनेमा की कल्पनाओ में
कसमसाता शब्द
जब आएगा बाहर
मुक्त होकर

सुनाई पड़ेंगे असंख्य धमाके
विखंडित होकर
फिर-फिर जुड़ने लगेंगे

बंद कमरे में भले ही
न सुनाई पड़े
शब्द चारों और कासी
सांकल के टूटने की आवाज़

खेत-खलियान
कच्चे घर
बाढ़ में डूबती फसलें
आत्म हत्या करते किसान
उत्पीड़ित जानो की सिसकियों में
फिर भी शब्द की चीख
गूंजती रहती है हर वक़्त
गहरी नींद में सोए
अलसाये भी जाग जाते है
जब शब्द आग बनकर
उतरता है उनकी साँसों में

मौज-मस्ती में डूबे लोग
सहम जाते है

थके-हारे मजदूर की फुसफुसाहटों में
बामन की धुत्तकार सहते
दो घुट पानी के लिए मिन्नतें करते
पीड़ित जानो की आह में
जिन्दा रहते है शब्द
जो कभी नहीं मरते
खड़े रहते है
सच को सच कहने के लिए

क्योकि
शब्द कभी झूठ नहीं बोलते

तब तुम क्या करोगे (Hindi Kavita For Kids)

Hindi Kavita For Kids | Best Kavita In Hindi
Hindi Kavita For Kids | Best Kavita In Hindi

यदि तुम्हे,
धकेलकर गांव से बाहर कर दिया जाये

पानी तक ना लिए जाने दे कुँए से
दुत्कारा फटकारा जाये चिल-चिलाती दोपहर में
कहा जाये तोड़ने को पत्थर
काम के बदले
दिया जाये खाने को झूठन
तब तुम क्या करोगे ?

यदि तुम्हे,
मरे जानवर को खीचकर
ले जाने के लिए कहा जाये
और कहा जाये ढोने को
पूरे परिवार का मैला
पहनने को दी जाये उतरन
तब तुम क्या करोगे ?

यदि तुम्हे,
पुस्तकों से दूर रखा जाये
जाने नहीं दिया जाये
विद्या मंदिर की चौखट तक
ढिबरी की मंद रौशनी में
काली पुती दीवारों पर
ईसा की तरह टांग दिया जाये
तब तुम क्या करोगे ?

यदि तुम्हे,
रहने को दिया जाये
फूस का कच्चा घर
वक़्त-बे-वक़्त फूक कर जिसे
स्वाहा कर दिया जाये
वर्षा की रातों में
घुटने-घुटने पानी में
सूने को कहा जाये
तब तुम क्या करोगे ?

यदि तुम्हे,
नदी के तेज़ बहाव में
उल्टा बहना पड़े
दर्द का दरवाज़ा खोलकर
भूख से जूंझना पड़े
भेजना पड़े नई नवेली दुल्हन को
पहली रात ठाकुर की हवेली
तब तुम क्या करोगे ?

यदि तुम्हे,
अपने ही देश से नकार दिया जाये
मानकर बधुआ
छीन लिए जाये अधिकार सभी
जला दी जाये समूची सभ्यता तुम्हारी
नोच नोच कर फेक दिए जाये
गौरव में इतिहास के पृष्ठ तुम्हारे
तब तुम क्या करोगे ?

यदि तुम्हे,
वोट डालने से रोका जाये
कर दिया जाये लहू-लुहान
पीट-पीट कर लोकतंत्र के नाम पर
याद दिलाया जाये जाति का ओछापन
दुर्गन्ध भरा हो जीवन
हाथ में पड़ गए हो छाले
फिर भी कहा जाये
खोदो नदी नाले
तब तुम क्या करोगे ?

यदि तुम्हे,
सरे आम बेइज़्ज़त किया जाये
छीन ली जाये सम्पत्ति तुम्हारी
धर्म के नाम पर
कहा जाये बनने को देवदासी
तुम्हारी स्त्रियों को
कराई जाये उनसे वेश्यावृत्ति
तब तुम क्या करोगे ?

साफ़ सुथरा रंग तुम्हारा
झुलस कर सांवला पड़ जाये
खो जाये आँखों का सलोनापन
तब तुम काग़ज़ पर
नहीं लिख पाओगे
सत्यम शिवम् सुंदरम !
देवी देवताओं के वंशज तुम
हो जाओगे लूले लंगड़े और अपाहिज
जो जीना पड़ जाये युगों युगों तक
मेरी तरह ?
तब तुम क्या करोगे ?

अँधेरे में शब्द (Hindi Kavita For Kids)

रात गहरी और काली है
अकालग्रस्त त्रासदी जैसी

जहाँ हजारों शब्द दफन है
इतने गहरे
कि उनकी सिसकियाँ भी
सुनाई नहीं देती

समय के चक्रवात से भयभीत होकर
मृत शब्दो को पुनर्जीवित करने की
तमाम कोशिशे
हो जाएँगी नाकाम
जिसे नहीं पेहचान पाएगी
समय की आवाज भी

ऊँची आवाज में मुनादी करने वाले भी
अब चुप हो गए हैं
गोद में बच्चा
गाँव में ढिंढोरा
मुहावरा भी अब
अर्थ खो चुका है

पुरानी पड़ गई है
ढोल की धमक भी

पर्वत कन्दराओं की भीत पर
उकेरे शब्द भी
अब सिर्फ रेखाएँ भर हैं

जिन्हें चिहिनत करना
तुम्हारे लिए वैसा ही है
जैसा ‘काला अक्षर भेस बराबर ‘
भयभीत शब्द ने मरने से पहले
किया था आर्तनाद
जिसे न तुम सुन सके
न तुम्हारा व्याकरण ही

कविता में अब कोई
ऐसा छन्द नहीं है
जो बयान कर सके
दहकते शब्द की तपिश

बस ,कुछ उच्छवास हैं
जो शब्दों के अंधेरों से
निकल कर आए हैं
शून्यता पाटने के लिए!

बिटिया का बस्ता घर से निकल रहा था
दफ्तर के लिए
सीढ़ियां उतरत हुए लगा
जैसे पीछे से किसी ने पुकारा
आवाज परिचित आत्मीयता से भरी हुई
जैसे बरसों बाद सुनी ऐसी आवाज
कंधे पर स्पर्श का आभास

मुड़ कर देखा
कोई नहीं
एक स्मृति भर थी

सुबह -सुबह दफ्तर जाने से पहले
जैसे कोई स्वप्न रह गया अधूरा
आगे बढ़ा
स्कूटर स्टार्ट करने के लिए
कान में जैसे कोई फिर से फुसफुसाया

अधूरी किताब का आखरी पन्ना लिखने पर
पूर्णता का अहसास
जैसे पिता की हिलती मूँछें
जैसे एक नए काम की शुरुआत
नया दिन पा जाने की विकलता

रात की खौफनाक ,डरावनी प्रतिध्वनियों
और खिड़की से छन कर आती पीली रोशनी से
मुक्ति की थरथराहट
भीतर कराहते
कुछ शब्द
बचे-कूचे हौसले
कुछ होने या न होने के बीच
दरकता विश्वास

कितना फर्क है होने
या न होने में

सब कुछ अविश्वसनीय -सा
जोड़ -तोड़ के बीच
उछल -कूद की आतुरता
तेज ,तीखी प्रतिध्वनि में
चीखती हताशा

भाषा अपनी
फिर भी लगती है पराई सी
विस्मृत सदियों-सी कातरता
अवसादों में लिपटी हुई

लगा जैसे एक भीड़ है
आस-पास बेदखल होती बदहवास
चरों और जलते घरों से उठता धुआँ
जलते दरवाज़े खिड़कियाँ
फ़र्ज़, अलमारी
बिटिया का बस्ता
जैसे सहेजकर रखती थी करीन से
एक एक चीज़

पेंसिल, रबर और कटर
कॉपी किताब
हेयर पिन, फ्रेंडशिप बैंड

बस्ता नहीं एक दुनिया थी उसकी
जिसमे झाकने या खंगालने का हक़
नहीं था किसी को

जल रहा है सबकुछ धुआँ-धुआँ
बिटिया सो नहीं रही है
अजनबी घर में
जहाँ नहीं है उसका बस्ता
गोहान की चिरायंध
फैली है हवा में

जहाँ आततायी भांज रहे है
लाठी सरिये, गँड़ासे
पटाखों की लड़ियाँ
दियासलाई की तिल्ली
और जलती आग में झुलसता भविस्य

गर्व भरे अट्ठहास में
पंचायती फरमान
बारूदी विस्फोट की तरह
फटते गैस सिलेंडर
लूट पात और बरजोरी

तमाशबीन
शहर, पुलिस, संसद
खामोश, कानून, किताब
और धर्म
कान में कोई फुसफुसाया

सावधान जले मकान की राख में
चिंगारी अभी बाकी है


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