द फ्लाइंग डचमैन हॉरर शिप – Horror Story In Hindi

Horror Story In Hindi – समुद्र किसे पसंद नहीं होता। समुद्र में यात्रा करना, बड़ी बड़ी लहरें देखना, वेहल मछलियां देखना सभी को अच्छा लगता है लेकिन क्या हो जब आपका यही आनंद भरा सफर किसी अनजाने जहाज को देखकर बर्बाद हो जाए वो भी ऐसा जहाज जो पल में दिखकर पल में गायब हो जाए।

हमारी आज की इस Horror Story में हम बात करेंगे एक ऐसे मिस्टीरियस जहाज के बारे में जिसने कई 100 सालों पहले अपनी यात्रा शुरू तो की लेकिन कभी उस यात्रा को खत्म नहीं कर सका और आज भी यह मिस्टीरियस जहाज समुद्री जहाजों को दिखाई देता रहता है।

समुद्र में इस श्रापित जहाज का दिखना एक ऐसी बदनसीबी है जिसका सामना कोई नहीं करना चाहता। माना जाता है कि इस जहाज का दिखाई देना एक बुरा संकेत है। आज तक जिन को भी यह जहाज दिखाई दिया है उन जहाजों और जहाज़ियों के साथ कुछ ना कुछ जरूर बुरा हुआ। यह एक रियल हॉरर स्टोरी है जिसे पढ़कर आप भी सोचेंगे की दुनियां में कुछ अनसुलझी अनसुनी घटनाएं हैं जो अबतक छुपी-दबी हुयी हैं  .तो चलिए शुरू करते हैं Horror Story इस भूतिया और रहस्यमयी जहाज की।

द फ्लाइंग डचमैन – Horror Story In Hindi

यह Horror Story शुरू होती है 11 जुलाई 1881 को जब “एचएमएस बखाटे” नाम के एक जहाज में किंग जॉर्ज अपने भाई अल्बर्ट विक्टर के साथ यात्रा कर रहे थे। अपनी यात्रा में ऑस्ट्रेलियन समुद्र के पास लगभग सुबह 4:00 बजे उन्हें दूर समुद्र में एक तेज लाल रोशनी दिखाई दी और फिर अचानक उस लाल रोशनी में एक जहाज प्रकट हुआ और फिर कुछ ही देर में वो रोशनी और वो जहाज दोनों ही गायब हो गए।

जहाज पर उस वक्त मौजूद लगभग 13 लोगों ने इस जहाज को अचानक प्रकट होते हुए और गायब होते हुए देखा था। जहां पर मौजूद लोगों को ये अंदाजा हो चुका था कि उन्होंने अभी-अभी कुछ मिस्टीरियस देखा है लेकिन वह शापित जहाज “द फ्लाइंग डचमैन” था इसका पता उन्हें तब लगा जब ठीक भी उसी सुबह “एचएमएस बखाटे” के उस क्रू मेंबर कि जहाज पर ही दर्दनाक मौत हो गई जिसने सबसे पहले मिस्टीरियस जहाज को देखा था।

उन लोगों ने यह मान लिया की “द फ्लाइंग डचमैन” दिखाई देने की वजह से ही ये अपशगुन हुआ है। वही “द फ्लाइंग डचमैन” जिसकी एक समय दहशत पूरे अफ्रीकन समुद्र पे थी। दहशत भी इतनी की समुद्र यात्रा के पहले जहाज़ी यात्रा के दौरान मौसम साफ रहने की प्रार्थना किया करते थे क्योंकि ऐसा माना जाता था कि खराब मौसम के दौरान लोगों को यह भुतहा जहाज हवा में उड़ता हुआ दिखाई देता था।

ऐसा माना जाता था कि जिस किसी को भी यह जहाज दिखाई देता था उसके साथ कुछ ना कुछ बेहद गंभीर और विनाशकारी घटना ज़रूर घटी थी। “द फ्लाइंग डचमैन” की साइटिंग का दावा आज तक अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग लोगों ने किया है।

लेखक “निकोलस मॉन्सर्रेट” ने अपने नॉवल “द क्रुएल सी” में वर्ल्ड वॉर 2 के दौरान इस भुतहा जहाज को पैसेफिक ओसियन में दिखाई देने का दावा किया था। जब वह रॉयल नेवी में नेवी ऑफिसर के पद पर पोस्टेड थे। वर्ल्ड वॉर 2 के दौरान एक जर्मन सबमरीन ने भी इस भुतहा जहाज को देखने का दावा किया था।

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कुछ ऐसे ही दावे साउथ अफ्रीका के केपटाउन के निवासियों और “कैप ऑफ़ गुड हॉप” सफर करने वाले जहाजों ने भी किया था लेकिन यह जहाज कहां से था और कहां गायब हो जाता था इस बात की मालूमात किसी को भी नहीं थी। कई लोग इसे एक मिथक मानते थे और कई लोग इसे एक डरावनी सच्चाई लेकिन असल सच क्या है इसका ठोस दवा आज तक कोई नहीं कर पाया है।

“द फ्लाइंग डचमैन” वर्चस्व में कैसे आया और क्या था उसका इतिहास इसके अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग संस्करण पाए जाते हैं लेकिन एक आम धारणा के अनुसार “द फ्लाइंग डचमैन” वास्तव में एक वेसल था। जिसके कैप्टन का नाम हेनरीक वैन द डेकन जिसे लोग डचमैन के नाम से भी जानते थे।

सन 1641 में कैप्टन हेनरीक डेकन अपने जहाज को हौलैंड से ईस्ट इंडीज़ की ओर व्यापर यात्रा के लिए लेकर निकले और अपनी सफल यात्रा के बाद घर वापसी लौट रहे थे लेकिन लौटते वक्त बीच रास्ते में ही कैप्टन हेनरीक ने रुट में कुछ बदलाव कर दिए और जहाज को “कैप ऑफ़ गुड हॉप” की ओर मोड़ने का आदेश दे दिया।

क्रू मेंबर कैप्टन हेनरीक के इस फैसले से बेहद नाखुश थे हैं कि वह जल्द से जल्द वापस अपने घर पहुंचना चाहते थे लेकिन कैप्टन ने किसी की भी एक नहीं सुनी और जहाज को कैप ऑफ़ गुड हॉप ओर आगे बढ़ते रहने के आदेश दे दिया लेकिन दुर्भाग्यवश इस जहाज का सामना एक बेहद भयानक तूफ़ान से हुआ। जिसने इस जहाज को निस्तेनाबूत कर दिया और आखिर में कैप्टन हेनरीक, उनका जहाज और सभी ग्रुप मेंबर्स को उस भयावह समुद्र ने निगल लिया।

इस दुखद त्रासदी का असली जिम्मेदार कैप्टन हेनरीक को ही माना गया। उन क्रू मेम्बर्स की बद्दुआओं ने इस जहाज को एक भूतिया श्रापित जहाज बना दिया। जो हमेशा किनारे की तलाश में भटकता रहता है। इस कहानी के अलावा इस जहाज के भूतिया जो जाने की अन्य कई कहानियां लोगों में प्रचलित हैं।

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लेकिन भले ही इस जहाज की श्रापित और भूतिया होने की असल कहानी कोई हो लेकिन इसका सामना करने वालों का हशर एक जैसा ही जोता है। इन अवधारणाओं के विपरीत अगर मॉडर्न साइंस की दृष्टि से “द फ्लाइंग डचमैन” घोस्ट शिप की साइटिंग को देखा जाए तो इन रहस्य्मयी साइटिंग को साइंस के एक छोटे से फिजिक्स फिनोमिना के द्वारा समझा जा सकता है जिसका नाम है “बेटा मुर्गाना” जो कि वास्तव में एक मिराज होता है।

मिराज एक तरह का ऑप्टिकल इल्यूजन यानी दृष्टि भ्रम होता है जिसमें लाइट रेज़ के बेंड होने और रिफ्लेक्शन के कारण यह दृष्टि भ्रम पैदा होता है। बेटा मुर्गाना भी ऐसे ही एक मिराज है जिसमें समुद्री सतह के अलग-अलग एयर टेंपरेचर और पृथ्वी के होराइजन पर लाइन के बैंड होने के कारण ऐसा ऑप्टिकल इल्यूजन बनता है मानो दूर कोई जहां स्थित हो।

लेकिन असल में वहां कुछ नहीं होता। फिजिक्स का यह सिद्धांत अभी यह समझाने में विफल है कि फ्लाइंग डचमैन को देखने वाले लोगों की मौत होने और उनके पागल हो जाने की असल वजह क्या है। तो क्या फ्लाइंग डचमन से जुड़ी इन घटनाओं में वाकई कोई सच्चाई हो सकती है या यह संयोग की महज एक श्रंखला ही है। क्या वाकई फ्लाइंग डचमैन एक भूतिया जहाज है या भौतिक विज्ञान का केवल एक सिद्धांत। क्या ये सबकुछ सच है या एक मिथ।


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