अधूरा इश्क़ – Love Story In Hindi | New Kahani

Love Story In Hindi – प्यार एक ऐसी ताकत है जो आदमी को क्या से क्या बना देता है। प्यार मिल जाए तो पागल भी ठीक हो जाया करते हैं और प्यार बिछड़ने पर अच्छा भला इंसान भी पागल हो जाय करता है। हमारी आज की Sad Story In Hindi भी एक ऐसे ही लड़के की है जिसे प्यार ने वो बना दिया जिसकी कल्पना करना भी उसके लिए नामुमकिन था।

अधूरा इश्क़ – Love Story In Hindi

ये Short Love Story In Hindi है समीर की जो एक स्टूडेंट था। समीर एक अच्छे रईस खानदान से ताल्लुख रखता था। समीर के पिता जी एक Bussiness Man थे। समीर ने अपना कॉलेज ख़तम किया और फिर ऍम बी ए (MBA) करने के लिए एक दुसरे कॉलेज में अड्मिशन लिया।

समीर पढ़ाई में अच्छा था जिस वजह से उसका ज्यादातर समय लाइब्रेरी में ही निकलता था। जिस कॉलेज में समीर ने ऍम बी ए (MBA) करने के लिए अड्मिशन लिया था उसी कॉलेज में एक लड़की ने भी अड्मिशन लिया जिसका नाम था प्रिया।

प्रिया एक मध्यम वर्गीय परिवार से थी। प्रिया के माता पिता कुछ पुराने ख़यालात के थे। प्रिया के पिताजी एक सरकारी दफ्तर में क्लर्क थे और उसकी माता जी भी हाउस वाइफ थी। प्रिया के घर का माहौल किसी मिलिटरी कैंप की तरह था। जहाँ सब एक निश्चित वक़्त पर खाना खाते, सोते उठते, और हर चीज़ भगवान् का नाम लेकर शुरू करते थे।

समीर ने प्रिया को पहली बार क्लास में देखा था और समीर उसी वक़्त प्रिया को अपना दिल दे बैठा। उसे ना तो उसका नाम पता था, ना उसके बारे में कोई और जानकारी बस उसे देखा और अपना दिल हार गया। जैसे तैसे वक़्त गुज़रा और 1 सेमेस्टर पूरा हुआ।

एग्जाम के बाद एक दिन समीर लाइब्रेरी में बैठा अपने नोट्स बना रहा था तभी वहां प्रिया आयी प्रिया ने जैसे ही लाइब्रेरी में कदम रखा उसकी पायल की आवाज़ से लाइब्रेरी में फैली ख़ामोशी टूटी और समीर की नज़र प्रिया पर गयी। समीर जो काम कर रहा था उसको छोड़कर चोरी चुपके बस प्रिया को ही देखे जा रहा था और फिर ना जाने उसको क्या सूझा समी अचानक नीचे आने के लिए उठा और सीढ़ियों से उतरते हुए प्रिया की तरह देखा और उसका पैर फिसल गया।

समीर सीधे नीचे आ गिरा और ये देख प्रिया सीधे उसकी तरह दौड़ी की कहीं उसको ज़्यादा तो नहीं लगी उस वक़्त लाइब्रेरी में कोई और नहीं था सो प्रिया ने खुद समीर को उठाया और कुर्सी पर बैठाया। प्रिया पानी लेकर आयी और समीर को दिया। पानी पीने के बाद प्रिया ने समीर से पुछा की क्या उसे ज़्यादा लगी है तो समीर ने कहाँ नहीं बस हलकी खरोंच आयी है।

जब प्रिया ने समीर का हाथ देखा तो उससे खून निकल रहा था प्रिया तुरंत जाकर फर्स्ट एड बॉक्स लेकर आयी और समीर को दवाई लगायी और पट्टी बंधी। फिर प्रिया ने समीर से पुछा की वो कहाँ रहता है तो पता चला की समीर प्रिया के घर जाने के रास्ते ही रहता है सो प्रिया और समीर दोनों एक साथ कॉलेज से निकल गए।

प्रिया और समीर ने बाहर आकर ऑटो लिया और निकल गए समीर को घर के बाहर छोड़कर प्रिया भी अपने घर चली गयी। उस रात समीर सो नहीं पाया एक तो वो वैसे ही प्रिया से प्यार करता था और आज जब प्रिया ने उसको छुआ तो समीर खुद को संभाल नहीं पा रहा था।

उसके कुछ दिन बाद तक समीर कॉलेज नहीं गया। फिर जब 1 हफ्ते बाद समीर कॉलेज गया तो प्रिया ने उसका हाल पुछा और वहां से समीर और प्रिया की बातचीत शुरू हुयी। अब समीर और प्रिया साथ साथ कॉलेज आते और साथ साथ कॉलेज से जाते। समीर प्रिया के साथ ना होने पर भी उसके ही खाब देखता रहना था।

दूसरा सेमेस्टर ख़तम होने से खुश दिन पहले ही समीर का जन्मदिन था। उस दिन भी रोज़ की तरह समीर और प्रिया साथ थे। उस दिन समीर ने जैसे तैसे हिम्मत जुटाई और अपने प्यार का इज़हार प्रिया से कर दिया। प्रिया जिस माहौल में पली बड़ी थी उसने कभी सोचा भी नहीं था की वो कभी किसी की गर्लफ्रेंड बनेगी लेकिन आज प्रिया खुद को रोक नहीं पायी और उसने समीर को हाँ कह दिया।

अब यहाँ पर पता चलता है की प्रिया और समीर में 4 सालों का अंतर था। प्रिया समीर से 4 साल बड़ी थी लेकिन प्यार ना उम्र देखता, ना रंग, ना पैसा, ना ज़ात बस प्यार हो जाता है सो दोनों को एक दुसरे से हो गया।

कुछ दिन बीते और समीर की माँ को समझ आ गया की समीर किसी से प्यार करता है लेकिन समीर के माँ पापा ने समीर का सपोर्ट किया और उससे कहाँ की वो उसकी शादी प्रिया से ज़रूर करेंगे और फिर एक दिन समीर प्रिया को अपने माँ पापा मिलवाने भी लाया और प्रिया को देखकर मिलकर वो भी खुश हो गए।

अब दो सेमेस्टर ख़तम हो चुके थे और तीसरा भी लगभग आधा ख़तम हो चूका था की एक दिन समीर के माँ पापा प्रिया के घर उसके माँ पापा से मिलने पहुँचे। पहले तो प्रिया के माँ पापा कुछ समझ नहीं पाए लेकिन जब उन्हें पता चला की वो लोग समीर और प्रिया की शादी की बात करने के लिए आए हैं तो प्रिया के घर वालों ने समीर के माँ पापा के साफ़ साफ़ मन कर दिया।

यहाँ पर सबको पता चलता है की प्रिया मांगलिक है और प्रिया के घर वाले तो वैसे ही इन सब चीज़ों पर बहुत ज़्यादा यकीन करते थे। दूसरा परेशानी ये भी थी की समीर के पिताजी एक अमीर आदमी थे तो उन्हें समीर को एक बिगड़ा रईस कहने भी भी वक़्त नहीं लगा।

प्रिया के घर से बातें सुनकर समीर के माँ पापा घर आ गए और घर आकर समीर को सारी बात बताई। समीर के पैरों के नीचे से जैसे ज़मीन ही निकल गयी थी वो यकीन ही नहीं कर पा रहा था की प्रिया से उसकी शादी नहीं हो सकती। कुछ दिन तक प्रिया और समीर मिल नहीं पाए और फिर एक दिन समीर खुद प्रिया के घर उसके माँ पापा को समझाने के लिए गया।

लेकिन इस बार प्रिया के पिताजी खुद को संभाल नहीं पाए और समीर पर हाथ उठा दिया। समीर रोया गिड़गिड़ाया लेकिन प्रिया के पिताजी टस से मस नहीं हुए। समीर की बेइज़्ज़ती और आँसुंओं को देखकर प्रिया ने समीर को हाथ पकड़ कर घर से भर कर दिया और जाते जाते कहा “समीर मुझे भूल जाओ, मैं अपनी माँ की दी हुयी कसम से बंध गयी हूँ।”

समीर रोते बिलखते घर आ गया। प्रिया के पिता जी ने प्रिया का कॉलेज जाना बंद करवा दिया और घर से निकलना भी। समीर कॉलेज जाता और प्रिया की राह देखते बैठा रहता लेकिन वो नहीं आती। कई दिनों तक ऐसा ही चलता रहा ना समीर की प्रिया से बात होई ना मुलाकात होती।

वक़्त गुज़रता रहा और कॉलेज के आखरी एग्जाम आ गए। अब समीर प्रिया से मिला लेकिन अपनी माँ की दी हुयी कसम की वजह से प्रिया ने समीर से बात नहीं की और भीगी आँखें लेकर अपने पेपर दिये और घर चली गया।
पेपर ख़तम होने के बाद समीर घर पर ही रहता था कहीं आना जाना किसी से मिलना जुलना उसने बंद कर दिया।

कुछ दिन बाद समीर और प्रिया के एक दोस्त ने समीर को बताया की आज प्रिया की शादी है। समीर को भरोसा ही नहीं हो रहा था उसने रो रोकर चिल्ला चिल्ला कर पूरे घर में इधर उधर भाग रहा था। समीर घर से निकला और सीधे प्रिया के घर के बहार पहुँच गया। उस वक़्त प्रिया के फेरे चल रहे थे और समीर बाहर खड़ा देख रहा था समीर चिल्ला रहा था रो रहा था मगर प्रिया के घर वालों ने उसे अंदर जाने नहीं दिया और समीर की आँखों के सामने ही प्रिया किसी और को हो गयी।

उस शाम से लेकर उस पूरी रात समीर प्रिया के घर के बाहर ही बैठा रहा। ढूंढते हुए जब समीर के घर वाले आये तो उसको लेकर घर वापिस गए। समीर की हालत कुछ ठीक नहीं थी वो खिड़की से प्रिया के घर की तरफ ही देखता रहता था। जैसे तैसे वक़्त गुज़रा और तीन महीनो के के समीर अब नार्मल हुआ था।

मगर अब भी समीर कहीं खाएं खोया रहता था। उसका मन बहलाने के लिए समीर के माता पिता ने क्या कुछ नहीं किया लेकिन समीर उस सदमे से बाहर आना ही नहीं चाहता था। एक यूँ ही बैठे बैठे समीर ने एक कागज़ पर कुछ लाइन्स लिखी –

“इश्क़ को तरसना भी ज़रूरी था
आँखों का बरसना भी ज़रूरी था
था ज़रूरी के हम दोनों एक हो जाते
फिर मोहब्बत में बिछड़ना भी ज़रूरी था

तेरा काँधे पे सर रखना
हाथ फिर थाम लेना भी
मुझे पागल बनाकर फिर
छोड़ना भी ज़रूरी था

मेरी दुनियाँ में आये तुम
मुबारक़ इश्क़ हो तुमको
सजाकर घर मोहब्बत का
जलाना भी ज़रूरी था

करके वादा मुकरना भी ज़रूरी था
बहक कर संभालना भी ज़रूरी था
ज़रूरी था मोहब्बत आज़माये हम
मोहब्बत में तबाह होना ज़रूरी था”

और ये वो पहली ग़ज़ल के कुछ शेर थे जिसे समीर ने प्रिया के बिछड़ने के बाद लिखी थी। उस दिन के बाद समीर अपने कमरे से काम निकलता था और सारा सारा दिन कुछ ना कुछ लिखता रहता था। एक दिन जब समीर के पापा उसके कमरे में आये तो देखकर दंग रह गए।

उन्होंने देखा की कमरे में हर तरफ केवल कागज़ ही कागज़ थे और उनपर लिखी शायरियों को पढ़कर समीर के पिताजी के मुँह से निकला “एक समीर को खोया और दुसरे समीर को पाया।” फिर उन्होंने अपने एक दोस्त को बुलाया जो की एक अच्छे बुक पब्लिकेशन के प्रमुख थे। जब उन्होंने समीर के लिखे हुए शेर और ग़ज़ल पढ़े तो हैरान हो गए।

उसके बाद समीर ने ना जाने कितनी किताबें और ना जाने कितने शेर और कतात लिखे। समीर को ना पैसों से प्यार ना किसी चीज़ से मोह बस उसे कुछ लोग चाहिए होते थे जो उसके प्यार का दर्द उसके लफ़्ज़ों से सुन सके और जब भी समीर किसी मुशायरे में जाता लोग उसके शेर पढ़ने के अंदाज़ पर फ़िदा हो जाते। समीर को देश विदेश में बहुत नाम मिला और लोगों के प्यार मिला।

प्रिया को समीर का प्यार याद रहा या नहीं, प्रिया ने समीर की किताबें उसके शेर पढ़े या नहीं किसी नहीं पता लेकिन समीर की हर बात में हर शेर में प्रिया का ज़िक्र होता ही था।

तो ये थी हमारी आज की Love Story In Hindi। अगर ये Sad Love Story In Hindi आपके दिल को छू गयी और आपको ज़रा भी पसंद आयी तो नीचे सोशल शेयर बटन है वहां से आप अपने सोशल मीडिया पर इस Sad Story In Hindi को अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं जिससे हमें भी नए लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।


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