Best Moral stories for Kids In Hindi (2021)

Moral stories for Kids In Hindi (2021)

हेलो दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस Blog में आज हम आपके लिए लेकर आए हैं Moral stories for Kids In Hindi. बच्चों को ज्ञानवर्धक जानकारी देने का एक अच्छा ज़रिया है Hindi Kahaniyan जिससे आप बच्चो को अच्छे संस्कार दे सकते है वो भी मनोरंजक तरीके से। हम सभी दादी-नानी से राजाओं की, परियों की, पशु-पक्षियों की और भूतप्रेत,जिन्न आदि की कहानियां सुन-सुन कर बड़े हुए हैं।

बेशक आज ज़माना बदल गया है और इसलिए हम Digital तरीके से आपके लिए लेकर आए हैं Moral stories for Kids In Hindi और ये Hindi Kahaniyan आप कभी भी कहीं भी अपने Laptop, Mobile, Tablet आदि पर पड़ सकते हैं। Hindilikh एक ऐसी Website है जहाँ आपको न सिर्फ Kids Story In Hindi बल्कि इसके साथ आपको Bhutiya Kahani, Hindi Kavita और Mahabharat और Ramayan Ki Kahani जैसी अच्छी-अच्छी कहानियां पढ़ने को मिलेंगी। तो चलिए शुरू करते है आज की Moral Stories For Kids In Hindi और सीखते हैं कुछ नया इन Hindi Kahaniyon के ज़रिया।


असली माँ (Moral Stories For Kids In Hindi)

एक बार दो स्त्रियाँ एक बच्चे के लिए झगड़ रही थी। प्रत्येक स्त्री यह दावा कर रही थी कि वही उस बच्चे की असली माँ।है। जब किसी तरह झगड़ा नहीं सुलझा , तो लोगो ने उन दोनों को न्यायधीश के सामने पेश किया।

न्यायधीश ने ध्यानपूर्वक दोनों की दलीलें सुनीं। न्यायधीश के लिए भी यह निर्णय करना मुश्किल हो गया कि बच्चे की असली माँ कौन थी।

नयायधीश ने बहुत सोच -विचार किया। आखिरकार उसे एक उपाय सुझा। उसने अपने कर्मचारी को आदेश दिया,” इस बच्चे के दो टुकड़े कर दो और एक -एक टुकड़ा दोनों स्त्रियों को दे दो।”

न्यायधीश का आदेश सुन कर उसमें से एक स्त्री ने धाड़ मार कर रोते हुए कहा,”नहीं , नहीं ! ऐसा ,जुल्म मत करो। दया करो सरकार। भले ही यह बच्चा इसी स्त्री को दे दो ,लेकिन मेरे लाल को जिंदा रहने दो। मैं बच्चे पर अपना दावा छोड़ देती हूँ। ”

पर दूसरी स्त्री कुछ नहीं बोली। वह चुपचाप यह सब देखती रही। अब चतुर न्यायधीश को मालूम हो गया था कि बच्चे की असली माँ कौन है। उसने बच्चा उस स्त्री को सौंप दिया ,जो उस पर अपना दावा छोड़ने के लिए तैयार थी। उसने दूसरी स्त्री को जेल भेज दिया।

शिक्षा *****

|| सच्चाई की सदा विजय होती है ||

भेड़ के वेश में भेड़िया (Panchatantra Hindi Stories)

एक दिन एक भेड़िए को कहीं से भेड़ की खाल मिल गई। खाल ओढ़ कर वह मैदान में चर रही भेड़ों के झुंड में शामिल हो गया। भेड़िए ने सोचा,’सूर्य अस्त हो जाने के बाद गड़रिया भेड़ों को भाड़े में बंद कर देगा। भेड़ों के साथ मैं भी भाड़े में घुस जाऊँगा। रात को किसी मोटी भेड़ को उठा कर भाग जाऊँगा और मजे से उसे खाऊँगा।’

शाम हुई तो गड़रिया भेड़ो को बाड़े में बंद कर घर चला गया। भेड़िया चुपचाप अँधेरा होने का इंतजार करने लगा। धीरे -धीरे अँधेरा गहराने लगा। यहाँ तक तो सब कुछ भेड़िए की योजना के अनुसार ही हुआ। फिर एक अनहोनी घटना घट गई।

एकाएक गड़रिए का नौकर बाड़े में आया। उसके मालिक ने रात के भोजन के लिए किसी मोटी भेड़ को लाने के लिए उसे भेजा था। संयोग से नौकर भेड़ की खाल ओढ़े भेड़िए को ही उठा कर ले गया और उसे हलाल कर डाला।

भेड़िया भेड़ खाने के लिए आया था। परंतु उस रात वह गड़रिए और उसके मेहमानों का आहार बन गया।

शिक्षा *****

|| बुरा सोचने वाले का अंत बुरा ही होता है ||

घमंडी मोर और बुद्धिमान सारस (Moral Stories In Hindi)

एक मोर था। वह बहुत घमंडी थाऔर अपनी सुंदरता का बखान करता रहता था। वह रोज़ नदी के किनारे जाता , पानी में अपनी परछाईं देखता और अपनी सुंदरता की तारीफ करता।

वह कहता,”जरा मेरी पूँछ तो देखो। कितने मनमोहक रंग हैं मेरे पंखों के ! वास्तव में मैं दुनिया के सभी पक्षीयों से अधिक सुन्दर हूँ। ”

एक दिन मोर को नदी के किनारे एक सारस दिखाई दिया। उसने सारस को देख कर अपना मुँह फेर लिया। सारस का अपमान करते हुए उसने कहा , ” कितने रंगहीन पक्षी हो तुम ! तुम्हारे पंख तो एकदम सादे और फीके हैं। ”

सारस ने कहा,”तुम्हारे पंख सचमुच बहुत सुन्दर हैं। मेरे पंख तुम्हारे पंखों जितने सुन्दर नहीं हैं। पर इससे क्या होता है ? तुम अपने पंखो से ऊँची उड़ान तो नहीं भर सकते ! जबकि मैं अपने पंखो से बहुत आसमान में बहुत ऊँचाई तक उड़ सकता हूँ।” इतना कह कर सारस उड़ता हुआ आकाश में बहुत ऊँचे चला गया। मोर शर्मिंदगी से उसकी ओर देखता ही रह गया।

शिक्षा *****

|| सुंदरता की अपेक्षा उप्योगिता अधिक महत्वपुर्ण है ||

टेढ़ा पेड़ (Kids Moral Story In Hindi)

एक जंगल में एक अजीब टेढ़ामेढ़ा पेड़ था। उसके तने और डालियों का आकर बहुत भद्दा था। उसके आसमान के अन्य पेड़ सीधे और सुन्दर आकर के थे। सुंदर आकारवाले ऊँचे -ऊँचे पेड़ो को देख कर टेढ़ा पेड़ कहता ,”कितने सुंदर और सीधे हैं ये पेड़ !” फिर उदास हो कर मन -ही -मन बुदबुदाता ,”कितना अभागा हूँ मैं ! आखिर मैं ही टेढ़ामेढ़ा और भद्दा क्यों हूँ ?”

एक दिन एक लकड़हारा उस जंगल में आया। उसने टेढ़े पेड़ को देख कर कहा ,”यह पेड़ तो मेरे किसी काम का नहीं है।” उसने सुंदर आकारवाले सीधे पेड़ो को ही पसंद किया और देखते -देखते उन्हें काट कर जमीन पर गिरा दिया।

इसके बाद टेढ़े पेड़ को कभी अपने भद्देपन पर दुःख नहीं हुआ। वास्तव में अपने भद्देपन के कारण ही वह लकड़हारे की कुल्हाड़ी का शिकार होने से बच गया था।

शिक्षा *****

|| तुम्हारे पास जो है , उसी में खुश रहो ||

माँ का प्यार (Short Hindi Stories)
माँ का प्यार (Short Hindi Stories)
माँ का प्यार (Short Hindi Stories)

एक पारी थी। एक बार उसने घोषणा की ,”जिस प्राणी का बच्चा सबसे ज्यादा सुंदर होगा ,उसे मैं पुरस्कार दूँगी। ”

यह सुन कर सभी प्राणी अपने -अपने बच्चों को ध्यान से देखा। जब उसने बंदरिया के चपटी नाकवाले बच्चे को देखा , तो वह बोल उठी ,”छी: ! कितना कुरूप है बच्चा ! इसके माता -पिता को तो कभी परस्कार नहीं मिल सकता।”

परी की यह बात सुन कर बच्चे की माँ के दिल को बहुत ठेस लगी। उसने अपने बच्चे को हृदय से लगा लिया और उसके कान के समीप अपना मुँह ले जा कर कहा,” तू चिंता न कर मेरे लाल ! मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ। मेरे लिए तो तू ही सबसे बड़ा पुरस्कार है। मैं कोई दूसरा पुरस्कार प्राप्त करना चाहती। भगवान तुझे लंबी उम्र दे।

शिक्षा *****

|| दुनिया की कोई चीज माँ के प्यार की बराबरी नहीं कर सकती ||

कौन बनेगा राजा (Short Hindi Stories)

एक बार की बात है एक जंगल में दो शेर रहते थ। एक का नाम सज्जन सिंह था एवं दूसरे का नाम दुष्यंत सिंह था। सज्जन सिंह के पास बुद्धि और बल दोनों ही थे परन्तु दुष्यंत सिंह को केवल अपनी ताक़त पर विशवास था।

दोनों के बीच कौन जंगल का राजा है इस बात की हौड़ लगी रहती थी। एक दिन दुष्यंत सिंह ने सज्जन सिंह को दौड़ के लिए ललकारा। दौड़ के नियम के अनुसार जो पहले गोल चट्टान के टुकड़े को एक तरफ से दूसरी तरफ ले जाएगा वह विजेता होगा। और वही इस जंगल का राजा कहलाएगा।

दौड़ शुरू हुई दुष्यंत सिंह ने गोल चट्टान को अपने सर पर उठा लिया और चलने लगा वहीँ सज्जन सिंह जो बुद्धिमान था उसने अपनी बुद्धि से तरकीब लगाई और उसने चट्टान के टुकड़े को ज़मीन पर घुमाते हुए ले जाना शुरू कर दिया

इसलिए सज्जन सिंह को चट्टान बोझ नहीं सहना पड़ा और बड़ी ही तेजी से वह चट्टान को घुमाकर वह इस दौड़ को आसानी से जीत गया अब जंगल के सभी जानवरों ने शर्त के अनुसार सज्जन सिंह को अपना का राजा उसे घोषित कर दिया।

शिक्षा *****

|| जहाँ बल प्रयोग भी फीका पड़ जाता है वहां बुद्धि काम आती है ||

यह भी देखें:- बदसूरत ऊँट हिंदी कहानी

अपना अपना नजरिया (Small Hindi Story For Kids In Hindi)

एक बार एक संत अपने शिष्यों के साथ नदी में स्नान कर रहे थे । तभी एक राहगीर वंहा से गुजरा तो महात्मा को नदी में नहाते देख वो उनसे कुछ पूछने के लिए रुक गया । वो संत से पूछने लगा ” महात्मन एक बात बताईये कि यंहा रहने वाले लोग कैसे है क्योंकि मैं अभी अभी इस जगह पर आया हूँ और नया होने के कारण मुझे इस जगह को कोई विशेष जानकारी नहीं है ।”

इस पर महात्मा ने उस व्यक्ति से कहा कि ” भाई में तुम्हारे सवाल का जवाब बाद में दूंगा पहले तुम मुझे ये बताओ कि तुम जिस जगह से आये वो वंहा के लोग कैसे है ?” इस पर उस आदमी ने कहा “उनके बारे में क्या कहूँ महाराज वंहा तो एक से एक कपटी और दुष्ट लोग रहते है इसलिए तो उन्हें छोड़कर यंहा बसेरा करने के लिए आया हूँ ।”

महात्मा ने जवाब दिया बंधू ” तुम्हे इस गाँव में भी वेसे ही लोग मिलेंगे कपटी दुष्ट और बुरे ।” वह आदमी आगे बढ़ गया ।

थोड़ी देर बाद एक और राहगीर उसी मार्ग से गुजरता है और महात्मा से प्रणाम करने के बाद कहता है ” महात्मा जी मैं इस गाँव में नया हूँ और परदेश से आया हूँ और इस ग्राम में बसने की इच्छा रखता हूँ लेकिन मुझे यंहा की कोई खास जानकारी नहीं है इसलिए आप मुझे बता सकते है ये जगह कैसे है और यंहा रहने वाले लोग कैसे है ?”

महात्मा ने इस पर फिर वही प्रश्न किया और उनसे कहा कि ” मैं तुम्हारे सवाल का जवाब तो दूंगा लेकिन बाद में पहले तुम मुझे ये बताओ कि तुम पीछे से जिस देश से भी आये हो वंहा रहने वाले लोग कैसे है ??”

उस व्यक्ति ने महात्मा से कहा ” गुरूजी जन्हा से मैं आया हूँ वंहा भी सभ्य सुलझे हुए और नेकदिल इन्सान रहते है मेरा वंहा से कंही और जाने का कोई मन नहीं था लेकिन व्यापार के सिलसिले में इस और आया हूँ और यंहा की आबोहवा भी मुझे भा गयी है इसलिए मेने आपसे ये सवाल पूछा था ।” इस पर महात्मा ने उसे कहा बंधू ” तुम्हे यंहा भी नेकदिल और भले इन्सान मिलेंगे ।” वह राहगीर भी उन्हें प्रणाम करके आगे बढ़ गया ।

शिष्य ये सब देख रहे थे तो उन्होंने ने उस राहगीर के जाते ही पूछा गुरूजी ये क्या अपने दोनों राहगीरों को अलग अलग जवाब दिए हमे कुछ भी समझ नहीं आया । इस पर मुस्कुराकर महात्मा बोले वत्स आमतौर पर हम आपने आस पास की चीजों को जैसे देखते है वैसे वो होती नहीं है इसलिए हम अपने अनुसार अपनी दृष्टि से चीजों को देखते है और ठीक उसी तरह जैसे हम है । अगर हम अच्छाई देखना चाहें तो हमे अच्छे लोग मिल जायेंगे और अगर हम बुराई देखना चाहें तो हमे बुरे लोग ही मिलेंगे । सब देखने के नजरिये पर निर्भर करता है ।

शिक्षा *****

|| जीवन में सकारात्मकता रखनी चाहिए ||

यह भी देखें:- नमक का व्यापारी हिंदी कहानी

पुण्यात्मा बाघ (Short Story For Kids In Hindi)

एक जंगल में एक बाघ रहता था। वह बहुत बूढ़ा हो गया था। उसमे अब पहले जैसे ताकत और फुर्ती नहीं रह गई थी। उसने सोचा ,’अब मैं शिकार कर नहीं सकता। इसलिए पेट भरने के लिए मुझे कोई अन्य उपाय करना होगा। ‘

बहुत सोचने -विचरने के बाद बाघ को एक युक्ति सूझी। उसने घोषणा की ,”अब मैं बहुत बूढ़ा हो गया हूँ ,इसलिए मैं अपनी बाकी जिंदगी पुण्यकर्मों में लगाऊँगा। अब से मैं घास और फल खा कर अपना गुजारा करूँगा और निरंतर प्रभु के नाम का स्मरण करूँगा। इसलिए जंगल के पशु – पक्षियों को मुझसे डरने की अब कोई जरूरत नहीं है।”

कुछ भोलेभाले जानवर बाघ की चिकनी – चुपड़ी बातों में आ गए। वे कहने लगे,”कितना महान संत है यह ! हमें चल कर इसके दर्शन करना चाहिए।” इस प्रकार प्रतिदिन कुछ जानवर बाघ के दर्शन के लिए उसकी गुफा में जाने लगे। बाघ इन भोलेभाले जानवरों को देखते ही उन पर टूट पड़ता और उन्हें मार कर खा जाता। इस प्रकार बूढ़ा बाघ आराम से अपना पेट भरने लगा।

एक दिन एक लोमड़ी को इस पुण्यात्मा बाघ के बारे में जानकारी मिली। उसने मन -ही -मन कहा ,’मैं बाघ की बातों पर विश्वास नहीं करती। बाघ भला घास और फल खा कर कैसे जिंदा रह सकता है ? मैं खुद जाऊँगी और सच्चाई का पता लगा कर ही रहूँगी। ‘

दूसरे दिन लोमड़ी बाघ की गुफा के पास पहुँची। गुफा के प्रवेशद्वार पर पहुँच कर वह ठिठक गई। वहाँ जमीन पर गुफा में गए हुए जानवरों के पंजों एवं खुरों के निशान पड़े हुए थे। लोमड़ी ने बारीकी से उन निशानों का निरीक्षण किया। उसे फौरन पता चल गया कि गुफा में जाने वाले जानवरों के पंजों एवं खुरों के निशान तो दिखाई देते है , पर गुफा से बाहर निकलने वाले किसी जानवर के पैरों के निशान कहीं नहीं हैं। लोमड़ी ने मन -ही -मन कहा ,’इस ढोंगी पुण्यात्मा को जिन्दा रखने के लिए मैं अपनी जान नहीं दूँगी।’ वह गुफा के दरवाजे से ही लौट आई।

शिक्षा *****

|| मक्कार की चिकनी -चुपड़ी बातों में कभी नहीं आना चाहिए ||


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