Moral Stories For Kids In Hindi | Hindi Story

Moral Stories For Kids In Hindi

हेलो दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस blog में आज हम आपके लिए लेकर आए हैं Moral Stories For Kids In Hindi. बच्चों को ज्ञानवर्धक जानकारी देने का एक अच्छा ज़रिया है Hindi Kahaniyan जिससे आप बच्चो को अच्छे संस्कार दे सकते है वो भी मनोरंजक तरीके से। हम सभी दादी-नानी से राजाओं की, परियों की, पशु-पक्षियों की और भूतप्रेत,जिन्न आदि की कहानियां सुन-सुन कर बड़े हुए हैं।

बेशक आज ज़माना बदल गया है और इसलिए हम digital तरीके से आपके लिए लेकर आए हैं Moral Stories For Kids In Hindi और ये Hindi Kahaniyan आप कभी भी कहीं भी अपने laptop, mobile, tablet आदि पर पड़ सकते हैं। Hindilikh एक ऐसी website है जहाँ आपको न सिर्फ Moral Stories For Kids In Hindi बल्कि इसके साथ आपको Bhutiya kahani, Hindi Kavita और Mahabharat और Ramayan ki kahani जैसी अच्छी-अच्छी कहानियां पढ़ने को मिलेंगी। तो चलिए शुरू करते है आज की Moral Stories For Kids In Hindi और सीखते हैं कुछ नया इन Hindi Kahaniyon के ज़रिया।

कंजूस करोड़ीमल (Moral Stories For Kids In Hindi)

करोड़ीमल नाम का कंजूस आदमी था। एक दिन वह नारियल खरीदने के लिए बाजार गया। उसने नारियलवाले से नारियल की कीमत पूछी। “अठारह रुपये का एक ,”नारियलवाले ने कहा।
“अठारह रुपये !यह तो बहुत महँगा है। मैं पंद्रह रुपये दूँगा।” करोड़ीमल ने कहा।
नारियलवाले ने जवाब दिया ,”यहाँ तो नहीं ,लेकिन यहाँ से एक मील की दूरी पर आपको जरूर पंद्रह रुपये में एक नारियल मिल जाएगा। ”

करोड़ीमल ने विचार किया ,’पैसा बहुत मेहनत से कमाया जाता है। मील भर पैदल चल लेने पर कम -से -कम कुछ रुपयों की तो बचत हो जाएगी।’
वे पैदल चलते -चलते एक मील तक गए। वहाँ उन्हें एक नारियलवाले की दुकान दिखाई दी। उन्होंने दुकानदार से नारियल की कीमत पूछी।
दुकानदार ने कहा ,”पंद्रह रुपये का एक। ”

करोड़ीमल ने कहा ,”पंद्रह रुपये !यह तो बहुत ज्यादा है। मैं तो अधिक से अधिक दस रुपये दूँगा। ”
“अगर तुम एक मील आगे चले जाओ ,तो वहाँ तुम्हें दस रुपये में नारियल मिल जाएगा।”दुकानदार ने कहा
करोड़ीमल ने फिर विचार किया ,’पैसा बहुत मूलयवान होता है। कुछ रुपए बचाने के लिए मील भर पैदल चलने में क्या हर्ज है ?’
वे फिर चलते -चलते एक मील चले गए। वहाँ उन्हें नारियल की एक दुकान दिखाई दी। उन्होंने नारियलवाले से नारियल की कीमत पूछी।
“दस रुपये का एक ,”नारियलवाले ने जवाब दिया।

करोड़ीमल ने कहा।,”एक नारियल के दस रुपये ?यह तो बहुत अधिक है। मैं तो केवल पाँच रुपये दूँगा। ”
“तो फिर एक काम करो ,”नारियलवाले ने कहा ,”तुम समुद्र के किनारे -किनारे एक मील तक चलते जाओ। वहाँ नारियल की कई दुकानें हैं। तुम्हें वहाँ पाँच रुपये में ही नारियल मिल जाएगा। ”
करोड़ीमल ने फिर विचार किया ,’पाँच रुपये बचाने के लिए एक मील चल लेने में क्या हर्ज है ?पैसा बहुत मूलयवान है!’

करोड़ीमल वहाँ से चलते -चलते एक मील दूर समुद्र -तट पर पहुँच गए। वहाँ नारियलवालों की कई दुकानें थीं। करोड़ीमल ने एक दुकानदार से नारियल की कीमत पूछी।
दुकानदार ने कहा ,”पाँच रुपये का एक नारियल।”
करोड़ीमल ने कहा ,”पाँच रुपये !मैं तो इसके दो रुपये दूँगा।”

नारियलवाले ने कहा ,”तो फिर सामनेवाले नारियल के पेड़ पर चढ़ जाओ और तोड़ लो जितने चाहिए उतने। तुम्हारा एक पैसा भी खर्च नहीं होगा।”
“हाँ ,यही ठीक रहेगा।” करोड़ीमल ने कहा और देखते -ही -देखते वे एक नारियल के पेड़ पर चढ़ गए। उन्होंने अपने दोनों हाथों से एक नारियल पकड़ा और उसे जोर का झटका दिया। नारियल तो टूट गया ,पर साथ -ही -साथ पेड़ से उनके पैर की पकड़ भी छूट गई। फिर क्या था ,करोड़ीमल नारियल सहित धड़ाम से समुद्र रेत पर आ गिरे। उनके पैर की हड्डी टूट गई और शरीर पर भी कई जगह खरोंचें आ गईं। एक नारियल के लिए करोड़ीमल को सिर्फ इतनी ही कीमत अदा करनी पड़ी !

शिक्षा*****

|| लालच बुरी बला है ||

ब्राह्मण और तीन ठग (Moral Stories For Kids In Hindi)

एक दिन सवेरे -सवेरे एक ब्राह्मण सुनसान रास्ते से जा रहा था। उसके साथ एक बकरी भी थी। तीन ठगों की नजर ब्राह्मण और उसकी बकरी पर पड़ी। एक ठग ने कहा ,”मैं चाहता हूँ कि इस मोटी -ताजी बकरी को किसी तरह हथिया लिया जाए। ”

दूसरे ठग ने कहा ,”चलाे ,हम बकरी छीन कर भाग चलें। यह मोटू ब्राह्मण हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। ”
तीसरे ठग ने कहा ,”नहीं ,बकरी छीन कर भागने की कोई जरूरत नहीं है !मैंने एक अच्छी तरकीब सोच ली है।” फिर उसने वह तरकीब अपने साथियों को बताई। दोनों ठगों ने अपने साथी की योजना सुनी तो वे खुशी से उछल पड़े। उन्होंने उसी तरकीब से ब्राह्मण की बकरी ले लेने का निशचय किया।

योजना के अनुसार एक ठग ने ब्राह्मण से जा कर कहा ,”पंडित जी ,प्रणाम !आपका यह कुत्ता तो बहुत अच्छा है। क्या यह शिकारी कुत्ता है ?”ब्राह्मण को यह सुन कर बहुत गुस्सा आया। उसने कहा ,”अरे बेवकूफ ,चल दूर हट !कितने शर्म की बात है कि तू बकरी को कुत्ता कहता है।”
“तो क्या आपके इस कुत्ते को मैं बकरी कहूँ ,तो आप मुझे बुद्धिमान मानेंगे ?हा !हआ !हाआआ !”हँसता हुआ वह ठग चला गया।
थोड़ी देर के बाद दूसरा ठग ब्राह्मण के पास आया। उसने ब्राह्मण से कहा ,”प्रणाम पंडित जी ! ताज़्ज़ुब है !आपके पास सवारी के लिए इतना मजबूत ट्ट्टु है, फिर भी आप इसके साथ -साथ पैदल जा रहे हैं !”

ब्राह्मण ने कहा ,”हे भगवान !अरे ,क्या तुम्हें यह बकरी ट्ट्टु दिखाई दे रही है ?”
ठग ने कहा ,”मैं तो समझ रहा था कि आप कोई विद्वान ब्राह्मण होंगे ,पर आप तो सनकी लगते हैं। आपको तो ट्ट्टु और बकरी में कोई फर्क ही नज़र नहीं आता !”यह कहते हुए वह ठग भी चलता बना।

कुछ समय के बाद तीसरे ठग ब्राह्मण के पास आया। उसने कहा ,”पुरोहित जी ,प्रणाम !अरे आप इस गधे को कहाँ लिये जा रहे हैं ?”
यह सुन कर ब्राह्मण चकरा गया। उसने कहा ,”क्या यह गधा है ?”

“बिलकुल !गधा ही तो है यह !”ठग ने दावे के साथ कहा। यह सुनकर ब्राह्मण घबरा गया। उसे लगा की उसकी बकरी वास्तव में कोई पिशाचनी है। वह समय समय पर अपना रूप बदलती रहती है। इसलिए ब्राह्मण बकरी को वहीँ छोड़कर भाग खड़ा हुआ।
यहाँ देखकर तीनो ठग बहुत खुश हुए। वे ख़ुशी ख़ुशी बकरी को लेके चलते बने।

शिक्षा*****

|| लोगों की बातें सुनके अपनी धारणा मत बदलो ||


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