बच्चों की कहानियाँ | Best Moral Stories In Hindi For Kids

Moral Stories In Hindi For Kids

हेलो दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस Blog में आज हम आपके लिए लेकर आए हैं Moral Stories In Hindi For Kids . बच्चों को ज्ञानवर्धक जानकारी देने का एक अच्छा ज़रिया है Hindi Kahaniyan जिससे आप बच्चो को अच्छे संस्कार दे सकते है वो भी मनोरंजक तरीके से। हम सभी दादी-नानी से राजाओं की, परियों की, पशु-पक्षियों की और भूतप्रेत,जिन्न आदि की कहानियां सुन-सुन कर बड़े हुए हैं।

बेशक आज ज़माना बदल गया है और इसलिए हम Digital तरीके से आपके लिए लेकर आए हैं Moral Stories In Hindi For Kids  और ये Hindi Kahaniyan आप कभी भी कहीं भी अपने Laptop, Mobile, Tablet आदि पर पड़ सकते हैं। Hindilikh एक ऐसी Website है जहाँ आपको न सिर्फ Hindi Kahani For Kids बल्कि इसके साथ आपको Bhutiya Kahani, Hindi Kavita और Mahabharat और Ramayan Ki Kahani जैसी अच्छी-अच्छी कहानियां पढ़ने को मिलेंगी। तो चलिए शुरू करते है आज की Moral Stories In Hindi For Kids और सीखते हैं कुछ नया इन Hindi Kahaniyon के ज़रिया।

शेर का हिस्सा (Educational Stories In Hindi)

Educational Stories In Hindi
Educational Stories In Hindi

एक घनघोर जंगल था। उस जंगल में अनेक जानवर रहते थे। एक दिन रीछ ,भेड़िया ,लोमड़ी तथा शेर साथ – साथ शिकार करने निकले। शेर इन सबका अगुआ था। शीघ्र ही उन्होंने एक भैंस पर हमला कर उसे मार डाला। लोमड़ी ने भैंस के चार हिस्से किए।

सभी जानवर अपना – अपना हिस्सा खाने केलिए बेताब हो रहे थे। तभी शेर ने दहाड़ते हुए कहा ,”सब लोग शिकार से दूर हट जाओ और मेरी बात सुनो। क्योंकि शिकार करने में मैं तुम लोगों का सहयोगी था। दूसरे हिस्से पर भी मेरा ही अधिकार है। क्योंकि शिकार करने में मैं तुम लोगों का अगुआ था। और तीसरा हिस्सा भी मेरा ही है।

क्योंकि यह हिस्सा मुझे अपने बच्चों के लिए चाहिए। अब रहा चौथा हिस्सा ! यदि तुममें से किसी को यह हिस्सा चाहिए , तो आ जाओ , मुझसे लड़ाई में जीत कर ले जाओ अपना हिस्सा।”
रीछ , भेड़िया और लोमड़ी ने चारों हिस्से शेर को दे दिए और वहाँ से चुपचाप खिसक गए।
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शिक्षा *****

|| जिसकी लाठी उसकी भैंस ||

घोड़े को सबक (Educational Moral Stories In Hindi)

एक आदमी के पास एक घोड़ा और एक गधा था। एक दिन वह इन दोनों को ले कर बाजार जा रहा था। उसने गधे की पीठ पर खूब सामान लादा था। घोड़े की पीठ पर कोई सामान नहीं था।

रास्ते में गधे ने घोड़े से खा ,”भाई ,मेरी पीठ पर बहुत ज्यादा वजन है। थोड़ा बोझ तुम भी अपनी पीठ पाओ ले लो। ”
घोड़े ने कहा ,”बोझ ज्यादा हो या कम ,मुझे इससे कुछ लेना – देना नहीं है। यह बोझ तुम्हारा है और इसे तुम्हें ही उठा कर चलना है। मुझसे इसके बारे में कुछ मत कहो। ”
यह सुन कर गधा चुप हो गया। फिर वे तीनों चुपचाप चलने लगे। थोड़ी देर बाद भारी भोझ के कारण गधे के पाँव लड़खड़ाने लगे और वह रास्ते पर गिर पड़ा। उसके मुँह से झाग निकलने लगा।

इसके बाद उस आदमी ने गधे की पीठ से सारा सामान उतार दिया। उसने यह सारा बोझ घोड़े की पीठ पर लाद दिया।

चलते -चलते घोड़ा सोचने लगा ,’यदि मैंने गधे का कुछ भार अपनी पीठ पर ले लिया होता,तो कितना अच्छा होता। अब मुझे सारा भोझ उठा कर बाजार तक ले जाना पड़ेगा।’
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शिक्षा *****

|| दूसरों के दुःख दर्द में हाथ बटाने से हमारा दुःख दर्द भी काम हो जाता है ||

भेड़िया और बाँसुरी (Hindi Story For Kids In Hindi)

एक भेड़िया था। एक बार वह भेड़ों के झुंड से एक मेमने को उठा लाया। उसे ले कर वह जंगल की ओर जा रहा था कि मेमने ने कहा ,”भेड़िए चाचा ,मैं जानता हूँ कि आप मुझे खा जाएँगे। पर मुझे खाने के पहले क्या आप मेरी आखिरी इच्छा पूरी करेंगे ?”
“क्या है तेरी आखिरी इच्छा।?”भेड़िए ने पूछा।
मेमने ने कहा ,”चाचा ,मुझे पता है ,आप बाँसुरी बहुत अच्छी बजाते हैं। मुझे बाँसुरी की धुन बहुत अच्छी लगती है। इसलिए मुझे मारने के पहले कृपा कर बाँसुरी की धुन तो सुना दीजिए !”

भेड़िया बैठ गया और उसने बाँसुरी बजाना शुरू कर दिया। थोड़ी देर के बाद जब भेड़िए ने बाँसुरी बजाना बंद किया तो मेमने ने उसकी तारीफ करते हुए कहा , “वाह !वाह !बहुत सूंदर !चाचा ,आप तो उस गड़रिए से भी अच्छी बाँसुरी बजाते हैं। इतनी सुरीली बाँसुरी कोई भी नहीं बजा सकता। चाचा।,एक बार फिर बजाइए न !”
मेमने की बातें सुन कर भेड़िया फूल कर कुप्पा हो गया। इस बार वह और जोश में आ कर पहले से ज्यादा ऊँचे सुर में बाँसुरी बजाने लगा।

इस बार बाँसुरी के स्वर गड़रिए और उसके शिकारी कुत्तों के कानों में पड़े। गड़रिया अपने शिकारी कुत्तों के साथ दौड़ता हुआ वहाँ आ पहुँचा। शिकारी कुत्तों ने भेड़िए को धरदबोचा और उसका काम तमाम कर दिया। मेमना भागता हुआ भेड़ों के झुंड में जा मिला।

शिक्षा *****

|| धीरज और सूझबूझ से ही हम संकट को पार कर सकते है ||

बिल्ली और लोमड़ी (Hindi Kahani For Kids 2021)

एक बार एक बिल्ली और एक लोमड़ी कुत्तो के बारे में चर्चा कर रही थी।
“मुझे तो इन शिकारी कित्तो से नफरत हो गयी है।” लोमड़ी ने कहा
“मुझे भी,” बिल्ली बोली।
“मानती हूँ की ये बहुत तेज़ दौड़ते है,” लोमड़ी ने कहा , “पर मुझे पकड़ पाना इनके बस की बात नहीं। मैं इन कुत्तो बच कर दूर निकल जाने की कई तरकीबें जानती हूँ। ”

“कौन-कौन सी तरकीबें जानती हो तुम ?” बिल्ली ने पुछा।
“कई तरकीबें है,” शेखी बघारते हुए लोमड़ी ने कहा, “कभी मैं कांटेदार झाड़ियों में से होकर दौड़ती हूँ। कभी घनी झाड़ियों में छिप जाती हूँ। कभी किसी मांद में घुस जाती हूँ। कुत्तों से बचने की अनेक तरकीबों में से ये तो कुछ ही है।”
“मेरे पास तो सिर्फ एक ही अच्छी तरकीब है,” बिल्ली ने कहा।
“ओह ! बहुत दुःख की बात है। केवल एक ही तरकीब ? खैर, मुझे भी बताओ वह तरकीब ?” लोमड़ी ने कहा।

“बताना क्या है, अब मैं उसी तरकीब पर अमल करने जा रही हूँ। उधर देखो, शिकारी कुत्ते दौड़ते हुए आ रहे है। ” यह कहते हुए बिल्ली कूद कर एक पेड़ पर चढ़ गयी। अब कुत्ते उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते थे।

शिकारी कुत्तो ने लोमड़ी का पीछा करना शुरू कर दिया। वह कुत्तो से बचने के लिए एक-एक कर कई तरकीबें आजमाती रही। फिर भी वह उनसे बच नहीं सकी। अंत में शिकारी कुत्तो ने उसे धरदबोचा और मार डाला।
बिल्ली लोमड़ी पर तरस खाती हुयी मन ही मन बोली, ‘ओह, बेचारी लोमड़ी मारी गयी। इसकी अनेक तरकीबों की अपेक्षा, मेरी एक ही तरकीब कितनी अच्छी रही !’

शिक्षा *****

||अनेक तरकीबें आजमानी की बजाये एक ही सधी तरकीब पर भरोसा करना चाहिए। ||

खरगोश और उसके मित्र (Moral Stories For Kids In Hindi)

एक खरगोश था। उसके अनेक मित्र थे। वह हमेशा अपने मित्रों से मिलता और उनके साथ गपशप भी करता। हौके – मौके वह उनके मदद भी करता। मगर एक दिन खरगोश खुद संकट में पड़ गया। कुछ शिकारी कुत्ते उसका पीछा करने लगे। यह देखकर खरगोश जान बचाने के लिए सरपट भागने लगा। भागते -भागते खरगोश का दम फूलने लगा। वह थक कर चूर हो गया। मौका देख कर वह एक घनी झाड़ी में घुस गया और वही छिप कर बैठ गया। पर उसे डर सता रहा था कि कुत्ते किसी भी क्षण वह आ पहुँचेगे और सूँघते -सूँघते उसे ढूँढ़ निकलेंगे।

वह समझ गया कि यदि समय पर उसका कोई मित्र न पहुँच सका ,तो उसकी मृत्यु निश्चित है। तभी उसकी नजर अपने मित्र धोड़े पर पड़ी। वह रस्ते पर तेजी से दौड़ता हुआ जा रहा था। खरगोश ने घोड़े को बुलाया तो घोड़ा रुक गया। उसने घोड़े से प्रार्थना की ,”घोड़े भाई ,कुछ शिकारी कुत्ते मेरे पीछे पड़े हुए हैं। कृपया मुझे अपनी पीठ पर बेठा लो और कहीं दूर ले चलो। नहीं तो ये शिकारी कुत्ते मुझे मार डालेंगे। ”

घोड़े ने कहा ,”प्यारे भाई ,मैं तुम्हारी मदद तो जरूर करता ,पर इस समय मैं बहुत जल्दी में हूँ। वह देखो ,तुम्हारा मित्र बैल इधर ही आ रहा है। तुम उससे कहो। वह जरूर तुम्हारी मदद करेगा।” यह कह कर घोड़ा सरपट दौड़ता हुआ चला गया। खरगोश ने बैल से प्रार्थना की ,”बैल दादा ,कुछ शिकारी कुत्ते मेरा पीछा कर रहे हैं। कृपया आप मुझे अपनी पीठ पर बैठा लें और कहीं दूर ले चलें। नहीं तो कुत्ते मुझे मार डालेंगे। ”

बैल ने जवाब दिया ,”भाई खरगोश !मैं तुम्हारी मदद जरूर करता। पर इस समय मेरे कुछ दोस्त बड़ी बेचैनी से मेरा इंतजार कर रहे होंगे। इसलिए मुझे वहाँ जल्दी पहुँचना है। देखो ,तुम्हारा मत्र बकरा इधर ही आ है है। उससे वहा कहो। वह जरूर मदद करेगा।” यह कह कर बैल भी चला गया।

खरगोश ने बकरे से विनती की ,”बकरे चाचा ,कुछ शिकारी कुत्ते मेरा पीछा क्र रहे हैं। तुम मुझे अपनी पीठ पर बिठा कर कहीं दूर ले चलो ,तो मेरे प्राण बच जाएँगे। वरना वे मुझे मार डालेंगे। ”
बकरे ने कहा ,”बेटा ,मैं तुम्हें अपनी पीठ पर दूर तो ले जाऊँ ,पर मेरी पीठ खुरदरी है। उस पर बैठने से तुम्हारे कोमल शरीर को बहुत तकलीफ होगी। मगर चिंता न करो। देखो ,तुम्हारी दोस्त भेड़ इधर ही आ रही है। उससे कहोगे तो वह जरूर तुम्हारी मदद करेगी।” यह कह कर बकरा भी चलता बना।
खरगोश ने भेड़ से भी मदद की याचना की ,पर उसने भी खरगोश से बहाना करके अपना पिंड छुड़ा लिया।

इस तरह खरगोश के अनेक पुराने मित्र वहाँ से गुजरे। खरगोश ने सभी सी मदद करने की प्रार्थना की , पर किसी ने उसकी मदद नहीं की। सभी कोई-न-कोई बहाना कर चलते बने। खरगोश के सभी मित्रों ने उसे उसके भाग्य के भरोसे छोड़ दिया।
खरगोश ने मन -ही -मन कहा ,’अच्छे दिनों में मेरे अनेक मित्र थे। पर आज संकट के समय कोई मित्र काम नहीं आया। मेरे सभी मित्र केवल अच्छे दिनों के ही साथी थे।’
थोड़ी देर में शिकारी कुत्ते आ पहुँचे। उन्होंने बेचारे खरगोश को मार डाला। अफसोस की बात है कि इतने सारे मित्र होते हुए भी खरगोश बेमौत मारा गया।

शिक्षा*****

|| स्वार्थी मित्रों पर विश्वास करने से सर्वनाश ही होता है ||

चुहिया की बेटी का विवाह (Education Story In Hindi)

एक चुहिया थी। उसे एक सुन्दर कन्या थी। वह अपनी बेटी का विवाह सबसे शक्तिशाली व्यक्ति से करना चाहती थी। बहुत सोच-विचार करने पर उसे लगा की भगवान सूर्य उसकी कन्या के लिए उपयुक्त वर साबित होंगे।
चुहिया सूर्य भगवान् के पास गयी। उसने कहा, “सूर्य देवता, क्या आप मेरी सुन्दर कन्या से विवाह करेंगे ? क्या उसे आप अपनी पत्नी के रूप में पसंद करेंगे ?
सूर्य भगवान ने कहा, “चुहिया चाची, आपने मुझे अपनी बेटी के योग्य वर समझा, इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ। पर मैं सबसे ज्यादा शक्तिशाली नहीं हूँ। मुझसे अधिक शक्तिशाली तो वरुण देवता हैं। वे अपने बादलों से मुझे ढक देते हैं। ”

अतः चुहिया जल के देवता वरुण के पास गयी और बोली, ” वरुण देवता, क्या आप मेरी सुन्दर कन्या से विवाह करेंगे ? क्या उसे आप अपनी पत्नी के रूप में अपनाएंगे ?”
वरुण देवता ने जवाब दिया, “देखो देवी, “आपने मुझे अपनी बेटी के योग्य वर समझा, इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ। पर मैं सबसे ज्यादा शक्तिशाली नहीं हूँ। मुझसे अधिक शक्तिशाली तो वायु देवता हैं। वे मेरे बादलों को दूर-दूर तक उड़ा ले जाते हैं।

इसलिए चुहिया चाची वायु देवता के पास गयी और कहने लगी, “वायु देवता, क्या आप मेरी सुन्दर कन्या से विवाह करेंगे ? क्या आप उसे आप अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करेंगे ? “वायु देवता ने कहा, “आपने मुझे अपनी बेटी के योग्य वर समझा, इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ। पर मैं सबसे ज्यादा शक्तिशाली नहीं हूँ। मुझसे अधिक शक्तिशाली तो पर्वतराज हैं। वे मेरे मार्ग में खड़े हो जाते हैं और मुझे रोक देते हैं। मैं चाहे कितनी ही ताकत लगाऊं, पर पर्वतराज को रास्ते से नहीं हटा पता। ”

तब चुहिया चाची पर्वतराज के पास गयी और उनसे बोली, “पर्वतराज, क्या आप मेरी सुन्दर कन्या से विवाह करेंगे ? क्या आप मेरी बेटी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करेंगे ? ”
पर्वतराज ने कहा, “चाची, आपने मुझे अपनी बेटी के योग्य वर समझा, इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ। पर मैं सबसे ज्यादा शक्तिशाली नहीं हूँ। मुझसे अधिक शक्तिशाली तो मूषकराज (चूहों के राजा) हैं। वे और उनके साथी मेरे चट्टानी शरीर में बड़े-बड़े बिल खोद कर मुझे खोखला कर डालते हैं।

अतः में चुहिया मूषकराज के पास गयी और बोली, “हे मूषकराज, क्या आप मेरी सुन्दर कन्या से विवाह करेंगे ? क्या आप उसे आप अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करेंगे ? ” मूषकराज यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा, “हाँ, मैं आपकी बेटी से अवश्य विवाह करूँगा। ”
तब गाजे-बाजे के साथ धूमधाम से चुहिया की बेटी और मूषकराज का विवाह संम्पन्न हुआ।

शिक्षा*****

|| दूर के ढोल सुहावने लगते हैं ||


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