Short Moral Stories In Hindi 2021 | नैतिक कहानियाँ

Moral Stories In Hindi | नैतिक हिंदी कहानियाँ

आज के हमारे इस पोस्ट में हम आपके लिए लेकर आये हैं Moral Stories In Hindi जिससे आपको कुछ ना कुछ सीखने को ज़रूर मिलेगा। हमने बचपन में हमारे बुजुर्गों से बहुत सी नैतिक हिंदी कहानियाँ सुनी हैं कुछ वैसी ही Moral Stories In Hindi हम आपके लिए लेकर आये हैं। तो चलिए शुरू करते हैं Short Moral Stories In Hindi और सीखते हैं कुछ नया।

1 . बेल और लोमड़ी – Moral Stories In Hindi

एक जंगल में कुछ बैल रहते थे। वो सभी बैल बहुत चुस्त और तंदरुस्त थे। जंगल में इन्हे कही भी घूमना हो तो ये सब एक साथ मिल कर जाते थे। एक दिन ये सब बैल मिल कर घास खा रहे थे और एक लोमड़ी ने उन्हें घास चरते हुआ देखा। उन चुस्त तंदरुस्त बैलो को देख कर लोमड़ी के मुँह में पानी आ गया। लोमड़ी उनसे दूर बैठ कर उन्हें देख रही थी। उसी वक़्त दो भेड़िये लोमड़ी के तरफ आ रहे थे। लोमड़ी ने कहा ”एक मिनट रुक जाओ मित्र मुझे मार कर तुम्हे क्या मिलेगा। तुम्हे मेरे शरीर में सिर्फ हड्डियां मिलेगी कुछ मास नहीं मिलगा। अगर तुम मुझ पर विश्वास करोगे तो में तुम्हे कुछ अच्छा खाना दिखती हूँ।

भेड़िये ने घुसे में बोला ,”ठीक है बता दो हमे। मित्रो वहां देखो वहां बहुत सारे बैल है। वे बहुत तगड़े और तंदरुस्त है। अगर हम एक को भी पकड़ लेते है तो हमे पेट भर खाना मिलगा। भेड़िये ने लोमड़ी से कहा ,”हमे पहले उन बेलो को देखा है। अगर हम उनके नज़दीक गए तो उनके सिंग से हमे वो मर सकते है। उनके नज़दीक जाना बेहद खतरनाक हो सकता है लेकिन इसके लिए कुछ योजना बनानी पड़ेगी तो लोमड़ी ने भेड़िये को कहा ,”तुमने जो कहा वो सच है उनके पास जाना खतरनाक होगा।

अगर में उनके पास गयी तो कुछ खतरा नहीं होगा। उन्हें मुझ से बिलकुल डर नहीं लगेगा। तुम जा कर उस बड़े पत्थर के पीछे छुप जाओ। लोमड़ी धीरे से बैल के पास जाने लगी। उसको आते देख बैल हस के बोला ,”क्या लोमड़ी तुम यहाँ हमारा शिकार करने आयी हो। तुम तो बहुत बूढी और कमजोर दिख रही हो। तुम्हे हमारा मास खाना है? अगर में तुम पे चढ़ गया तो तुम मर जाओगी”, ऐसा उस तंदरुस्त बैल ने लोमड़ी से कहा।

तुमने जो कहा वो शायद सच होगा, लेकिन जब तक मृत्यु नहीं आती तब तक मुझे ज़िंदा रहना होगा। अगर मैंने मेरे शरीर को रोज़ खाने के लिए मास नहीं दिया तो भूख से में मर जाऊँगी। दूसरे बैल ने उसे ग़ुस्से से पूछा ,”हम सब बैलो में से तुम्हे किसका शिकार करना है। ये आप में से कोई भी एक हो सकता है, मुझे बस मास चाहिए।

वो लोमड़ी पर बहुत गुस्सा हो गया। प्रचंड क्रोध के साथ एक बैल ने उसे बोला ,”तुम तो मेरे पैर जितनी छोटी दिख रही हो और तुम हमे मारने आयी हो। में तुम्हें मेरे पैर के निचे अभी कुचल दूँगा। ऐसा कह कर वो लोमड़ी के पास गया। लोमड़ी बहुत चालाकी से वह से भाग गयी। उसने लोमड़ी को आगाह किया ,”जैसा मैंने कहा वैसा ही करो और अपनी ज़िंदगी बचा लो वापस यहाँ आओगी तो मर जाओगी।

वो लोमड़ी जो भाग गयी थी वो वापस आ गयी फिर बैल ने लोमड़ी से कहाँ, “तुम वापस क्यों आ गयी क्या तुम हमसे मज़ाक कर रही हो”, अब में तुम्हे नहीं छोड़ूगा। फिर बैल ने लोमड़ी का पीछा किया थोड़ी देर बाद लोमड़ी धेरे से भागने लगी। जब बैल उसे पकड़ने ही वाला था उस वक़्त वो जोर से भागने लगी ताकि उसे बैल से छुटकारा मिले।

बाकि बैल उस बैल को बड़ी बड़ी आवाज़ दे रही थे की उसके पीछे मत जाओ। लोमड़ी भाग रही थी, और भागते हुए उस बड़े पत्थर के पास आ गयी। वहाँ पर छुपे हुए भेड़ियों ने जोर से उस बैल पर छलांग मारी। उन्होंने बैल का गाला काटना शुरू किया ताकि वो चिल्ला न सकेऔर उसे मर डाला। फिर उन भेड़ियों और लोमड़ी ने उस बैल को खा कर अपनी भूख मिटाई।

कई बार गलत काम करने के लिए धोके बाज़ लोग हमे प्रेरित करते है, हमे बड़ी होशियारी से काम करना चाहिए। 

2. चोर और संत – Short Moral Stories In Hindi

एक बार रामापुर गांव में एक किसान रहता था जिसे राजकिशोर कहा जाता था। राजकिशोर गांव के सभी जरूरतमंद लोगों की मदद करता था यही कारण है कि लोग उसका सम्मान करते थे। एक दिन राजकिशोर अपने खेत में देखने जा रहा था कि खेत में काम कैसा चल रहा है। जब वह कुछ ही दूर पहुंचा था अचानक घटा छा गई और बारिश शुरू हो गई।

राजकिशोर तुरंत एक पेड़ के नीचे जाकर खड़ा हो गया इस बीच एक साधु आया जो बारिश में भीग रहा था। वह साधु भी उस पेड़ के नीचे खड़े होने के लिए सोच रहा था और साधु के पीछे पीछे एक कुत्ता भी आ रहा था। दोनों बुरी तरह भीग गए थे। तब उस साधु से राजकिशोर ने कहा, “स्वामी आइए और इस पेड़ के नीचे खड़े हो जाइए बारिश में क्यों बीग रहे हैं”, साधु ने राजकिशोर से बात नहीं की पर पेड़ के नीचे आकर खड़ा हो गया।

राजकिशोर ने कहा, “आप कौन हैं स्वामी क्या यह आपका पालतू जानवर है” साधु ने जवाब देते हुए कहा “मैंने बहुत दूर की यात्रा की है मैं एक साधु हूं, मेरा अपना कोई गांव नहीं मैं हर जगह घूमता हूं भीख मांगता हूं और ईश्वर का नाम जपता हूं। जब से मैंने इस गांव में प्रवेश किया है यह कुत्ता मेरे पीछे-पीछे चला आ रहा है। बारिश की वजह से आज मुझे कुछ खाने को नहीं मिल सका”

राजकिशोर को साधु से बड़ी सहानुभूति हुई “स्वामी कृपया आप दुखी ना होइए यदि आप बुरा ना माने तो आप हमारे घर चलें”, राजकिशोर ने कहा साधु ने कहा। ”

साधु ने कहा, “नहीं नहीं तुम्हारे लिए बोझ क्यों बनूं बारिश की वजह से हम इस पेड़ के नीचे मिल गए, नहीं मैं ये पसंद नहीं करूंगा हम अपने रास्ते चले जाएंगे”

राजकिशोर ने कहा, “स्वामी मैं आपको आश्रय दे सकूं मैं इसे मैं अपना स्वभाग्य समझूंगा कृपया भोजन करें और आज रात मेरे घर चलकर आराम करें और कल सुबह चले जाइएगा”

साधु इसके लिए सहमत हो गया कुछ देर में बारिश भी कम हो गई राजकिशोर साधु को लेकर अपने घर चले गया। गली के कुत्ते ने भी उनका पीछा किया राजकिशोर ने साधु को सभी स्वादिष्ट भोजन परोसे और उस कुत्ते को भी भोजन दिया। बारिश की वजह से उस दिन तापमान बहुत ठंडा था। कुछ समय बाद राजकिशोर के सभी परिवार के सदस्य दरवाजा बंद करके कंबल ओढ़ कर सोने चले गए।

राजकिशोर ने साधु के सोने के लिए कमरे में व्यवस्था की थी। कुत्ता उसके बिस्तर के नीचे सोया था। आधी रात को साधु उठा, उस समय राजकिशोर के सभी परिवार के सदस्य गहरी नींद में थे। साधु ने सारे घर में सन्नाटा देखा तो सोचा सभी मूल्यवान चीजों को चुराने के लिए सही समय है और ये सोच कर चीजें चुरा ली और घर से भागने की सोचने लगा।

कुत्ते ने साधु को देखा और जोर से भोकना शुरू कर दिया। साधु ने वहां से भागने की कोशिश की लेकिन नहीं भाग सका। राजकिशोर के परिवार के सदस्यों ने साधु को रोक लिया जब राजकिशोर को पता चला कि वह तो चोर है, तो उसे बहुत बुरा लगा।

राजकिशोर ने कहा “ऐसे मूर्खता तुम 1 साधु का रूप धारण करके चोरी कर रहे हो मुझे तुमसे सहानुभूति हुई तुम्हें अपने घर में आशय दिया और तुमने हमारे ही घर में चोरी करने की साजिश रच डाली, अरे ये कुत्ता तुम से बेहतर है हमारे घर का अन्ना खाकर अपना फर्ज निभाया”।

“हालांकि तुम एक इंसान हो लेकिन तुम से बेहतर तो यह कुत्ता है तुम्हें इस तरह नहीं छोड़ा जा सकता है”. राजकिशोर मैं उसे राजा के सैनिकों को दे दिया बाद में राजकिशोर ने उस कुत्ते को अपने घर में पाल लिया।

किसी के भरोसे को कभी भी नहीं तोडना चाहिए।

3. तरबूज का रस – Moral Stories In Hindi

रामपुर नाम का एक गांव था। उस गांव में जगन्नाथ नाम का एक किसान रहता था। उसके पास 1 एकड़ जमीन थी लेकिन वह जमीन बहुत उपजाऊ नहीं थी और क्योंकि खेत जंगल के पास था तो थोड़ी सी जो फसल उगती भी थी तप उसे भी जंगल के जानवर खा जाते थे।

जगन्नाथ के खेत के बीच एक बड़ी सी चट्टान थी और जब भी जगन्नाथ काम करके थक जाता था तो उस चट्टान पर लेट जाता था और आराम करता था। रोज की तरह एक दिन जगन्नाथ खेत में काम कर रहा था, गर्मी का मौसम था उसे प्यास लगती थी और उसके साथ लाया हुआ पानी खत्म हो चुका था। जगन्नाथ कहता है, “अरे इसमें पानी तो खत्म हो गया और लाना मैं भूल गया अब क्या करूं मुझे बहुत प्यारी लगी है और यहां आस-पास एक भी लहर नहीं है इतनी तेज धूप में तो पेड़ भी सूख गए हैं और क्या किया जा सकता है मुझे कुछ समय के लिए पेड़ की छाया के नीचे आराम कर लेना चाहिए”

फिर वह जाता है और उस चट्टान पर सो जाता है थोड़ी देर बाद वह उठता है देखता है कि उसकी पीठ गीली है। जगन्नाथ ने कहा, “यह क्या, यहां पानी कैसे आया? कुछ देर सोचता है और कहता है, “ओह जब इस चट्टान को कहत से निकलने के लिए हमने इस चट्टान में छेद करके इसको तोड़ने की कोशिश की थी हो सकता है ये छेद तब हो गया हो”।

“लेकिन उस समय मशीन ही खराब हो गई थी और हमने चट्टान को हटाने का इरादा छोड़ दिया था। हो सकता है कि यह वही छेद हो लेकिन इस छेद में पानी कैसे आया। अरे हाँ मैं भूल गया पिछले साल अच्छी बारिश हुई थी इसीलिए यह छेद बारिश के दौरान भर गया होगा लेकिन यह पानी लाल रंग का क्यों है चलो पहले मैं इसे पीके देखता हूं बड़ी प्यास लगी है।

जगन्नाथ अपनी हथेली में भर कर पानी पीता है। पानी पी कर वह कहता है, “इस पानी का स्वाद तो एकदम अलग है, पानी बहुत मीठा है यह पानी नहीं है ऐसा लगता है कि यह तरबूज का रस है” जगन्नाथ बार-बार उस पानी को पीकर देखता है और वह असल तरबूज का रस ही निकलता है (जगन्नाथ तो खुशी से गदगद हो गया फिर उसके मन में एक शंका हुई) चट्टान से रस कैसे आ रहा है मुझे लगता है इस चट्टान के अंदर कुछ है मुझे किसी को नहीं बताना चाहिए।

कितने सालों से मैं यहाँ काम करता आ रहा हूँ लेकिन आज तक कभी भी मुझे पता नहीं चला यह तो मेरी अच्छी किस्मत है। जगन्नाथ तो खुशी से झूम उठता है क्योंकि यह गर्मी का मौसम है और तरबूज के रस की अच्छी मांग होगी वह सोचता है, मैं इसको बेचकर खूब कमा सकता हूं।

वह पानी के तरबूज के पास जाने के लिए एक सुरंग तैयार करता है। वहां एक दरवाजा भी बनाता है। उसे बाकी सब से छुपाने के लिए वह मिट्टी से ढक देता है। उसने बड़ी सूझबूझ से तरबूज के रस के लिए तरबूज में छोटा सा छेद किया और एक पाइप से जोड़ दिया जिसके जरिए जूस आराम से निकल रहा था फिर वह गांव में घूमने लगा और तरबूज का रस बेचने लगा।

रस बहुत स्वादिष्ट था तो लोगों ने तरबूज का रस खरीद कर पीने में दिलचस्पी दिखाई दूसरे तरबूज का रस बेचने वाले यह देख कर चौक पड़े। रोजाना वह अपने खेत जाता और सुरंग से होगा तरबूज के पास जाकर उसका रस निकालता और लाकर बेच देता। जगन्नाथ के कारण अन्य सभी तरबूज जूस बेचने वालों का धंधा मंद पड़ गया इसलिए वह सब इससे जलन करने लगे वे सभी तरबूज बेचने वालों को चेतावनी देते हैं कि वह जगन्नाथ को तरबूज ना भेजें अब से हम देखेंगे कि वह कैसे तरबूज का रस बेचता है।

लेकिन फिर भी जब अगले दिन जगन्नाथ तरबूज का रस बेचता हुआ दिखाई दिया तो अन्य सभी व्यवसाय चौक गए, “अरे इस जगन्नाथ को कैसे तरबूज का रस मिल गया इसे तरबूज का रस कहां से मिल रहा है” एक व्यवसाई ने दूसरे व्यवसाई से कहा, “मुझे नहीं लगता कि किसी ने भी उसे तरबूज भेजा है कुछ तो बात है वह स्वादिष्ट रस को कैसे हासिल कर रहा है हमें किसी भी तरह यह राज़ जानना होगा”

हम सभी को उस पर नजर रखनी होगी अब से हर दिन हम में से एक को दिन के वक्त जगन्नाथ की निगरानी करनी चाहिए वह हाल ही में आया है और हम सब का धंधा चौपट कर के रख दिया है अगर हम उसको इसी तरह छोड़ देते हैं तो हमें भीख मांगने की नौबत आ सकती है। हम सबको कुछ करना पड़ेगा इस जगन्नाथ का।

फिर तो हर दिन एक व्यक्ति यह देखने लगा कि जगन्नाथ क्या कर रहा है लेकिन वह तो आधी रात को खेत में जाता था और वहां से रस ले आता था।

एक व्यवसाई ने कहा, “अरे पूरे दिन हम उस पर नजर रख रहे हैं और उसकी हर गतिविधि पर गौर कर रहे हैं वह तो कहीं भी नहीं जा रहा है फिर उसे रस कैसे मिल रहा है मुझे तो लगता है कि सभी के सो जाने के बाद वह जूस लाता है।

फिर उस रात कोई व्यापारी नहीं सोया वे जगन्नाथ के घर के बाहर इंतजार कर रहे थे ताकि वे उसे पकड़ सके लेकिन वह आराम से सोता रहा अगले दिन जगन्नाथ फिर अपने ठेले पर तरबूज का रस भेजता दिखाई दिया।

एक व्यवसाई ने कहा, “ये कहाँ जाता है और कहाँ से रस लाता है इसका पता लगाना हमारे लिए ना मुमकिन है ना तो हम इसे दिन में पकड़ पाए ना रात में, हमारे लिए यही बेहतर है कि हम किसी और काम को चुनकर करने लगे।

यह सोचकर वह वहां से चले जाते हैं दरअसल जगन्नाथ को अंदाजा जा हो गया था यह परेशानी आएगी और उसने बड़ी चतुराई से उस सुरंग के तरबूज से अपने घर तक एक पाइप लाइन की व्यवस्था करी थी और उस पाइप लाइन से रस निकाल रहा था कुछ दिनों के अंदर ही जगन्नाथ बहुत धनवान हो गया एक बड़ा सा घर भी बना लिया और खुशी से रहने लगा।

सफल होने का मौका सबको मिलता है बस वो मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहिए। 

4. हाथी और तोता – Story For Kids In Hindi

एक तोता बहुत लंबे समय से पिंजरे में रह रह कर तंग आ गया था। वह खुले आकाश में उड़ना चाहता था। अपने बहुत प्रयत्न करने के बाद तोता पिंजरे से निकलकर जंगल में आ पहुंचा। तोते को जंगल का वातावरण बहुत पसंद आ गया। हर रोज तरह-तरह के मीठे फल खाता था और जंगल के चारों ओर घूमता था।

तोते जंगल में अपना जीवन बहुत खुशी खुशी बिताने लगा। एक दिन तोते को एक बड़े पेड़ के नीचे सोता हुआ एक हाथी दिखाई दिया। उसे ऐसे देख कर तोते को एक नटखट शरारत करने की सूझी। चाहे जो कुछ भी हो वह हाथी को नींद से जगाना चाहता था इसलिए वह बहुत तेजी से पेड़ के ऊपर से नीचे आया और अपनी चोंच से हाथी पर वार किया।

चोंच के वार से हाथी जाग गया और उसने आंखें खोल कर देखा तो तोता पेड़ के ऊपर जाकर हंसने लगा। तोते को हस्ता देखकर समझ गया की ये इसी का किया हुआ है। हाथी नाराज होकर बोला, “अरे तोते क्या परेशानी है” तोते ने जवाब दिया “मजाक है मेरे दोस्त और वह हंसने लगा” हाथी को कुछ फर्क नहीं पड़ा वह आंखें बंद करके फिर से सो गया।

कुछ देर बाद तोते ने हाथी के पास आकर दोबारा उसको परेशान किया और तुरंत वहां से उड़कर पेड़ के पास चले गया। हाथी फिर से गुस्से से चिल्लाया। “अरे तू फिर से आ गया कुछ काम नहीं है क्या” लेकिन तोते को यह मजाक लगा। वह बार-बार ऐसी शरारत करने लगा, और इससे हाथी तंग आ चुका था।

फिर हाथी वहां से उठकर चले गया तोते को और मजा आ गया उसने फिर से हाथी के पास जाकर जोर से मारा और हाथी क्रोधित हो गया। हाथी ने सोचा कुछ ना कुछ करके उस तोते को सबक सिखाना पड़ेगा। हाथी एक तालाब के पास गया और अपने सर को छोड़कर पूरा शरीर पानी में डूबा दिया। यह देख तोते को बहुत मजा आया तोते ने सोचा हाथी मुझसे डर कर पानी में जाकर छुप गया।

वह खूब हंसने लगा और फिर से तोता वहां जाकर हाथी के ऊपर बैठ गया। तोते ने हाथी को चोंच चुभाना चाहा लेकिन हाथी को पता था कि तोता आएगा इसलिए उसने पहले से ही सूंड में पानी भर कर रखा था। तोता चोंच मारने ही वाला था इतने में हाथी ने पानी को झटके से तोते पर झोंक दिया।

तोते को बहुत जोर से लगा और वह तालाब में गिर गया। तोता जान के लिए तड़प रहा था हाथी को तोते पर दया आ गई इसलिए उसने तोते को पानी से बाहर निकाल कर जमीन पर रख दिया तोते ने हाथी से क्षमा मांगी। तोते को बहुत अच्छा सबक मिला और फिर हाथी जोर से हंस कर वहां से चला गया। अब तोते को बड़े और छोटे की बीच अंतर पता चल गया।

मज़ाक तब तक अच्छा है जब तक उससे किसी को तकलीफ ना हो।


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