Motivational Poems In Hindi | Motivational Kavita In Hindi

Motivational Poems In Hindi

हेलो दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस Blog में आज हम आपके लिए लेकर आए हैं Motivational Poems In Hindi. आज कल लोग बहुत जल्दी हार मान लेते हैं। कुछ लोग अपनी परेशानियों से तंग आकर, या हार जाने के डर से कोशिश करना ही छोड़ देते हैं। ये Motivational Kavita In Hindi आपके जीवन में यकीनन एक नयी ऊर्जा लेकर आएँगी साथ ही आपको कुछ कर गुजरने की हिम्मत भी देती।


तुम मुझको कब तक रोकोगे (Hindi Kavita)

मुट्ठी में कुछ सपने लेकर,
भरकर जेबों में आशाएं
दिलो में है अरमान यही,
कुछ कर जाएं… कुछ कर जाएं

सूरज-सा तेज़ नहीं मुझमें,
दीपक-सा जलता देखोगे
सूरज-सा तेज़ नहीं मुझमें,
दीपक-सा जलता देखोगे

अपनी हद रौशन करने से,
तुम मुझको कब तक रोकोगे
तुम मुझको कब तक रोकोगे

में उस माटी का वृक्ष नहीं,
जिसको नदियों ने सींचा है
में उस माटी का वृक्ष नहीं,
जिसको नदियों ने सींचा है

बंजर माटी में पलकर मैंने,
मृत्यु से जीवन खींचा है
मैं पत्थर पर लिखी इबारत ,
हूँ मैं पत्थर पर लिखी इबारत हूँ
शीशे से कब तक तोड़ोगे

मिटने वाला नाम नहीं,
तुम मुझको कब तक रोकोगे
तुम मुझको कब तक रोकोगे

इस जग में जितने जुल्म नहीं,
उतने सहने की ताकत है
इस जग में जितने जुल्म नहीं,
उतने सहने की ताकत है
तानों के भी शोर में रहकर
सच कहने की आदत है

मैं सागर से भी गहरा हूँ
मैं सागर से भी गहरा हूँ
तुम कितने कंकड़ फेंकोगे,
चुन-चुन कर आगे बढूंगा मैं,
तुम मुझको कब तक रोकोगे
तुम मुझको कब तक रोकोगे

जुक जुककर सीधा खड़ा हुआ,
अब फिर झुकने का शोख नहीं
जुक जुककर सीधा खड़ा हुआ,
अब फिर झुकने का शोख नहीं

अपने ही हाथों रचा स्वय
तुमसे मिटने का खौफ नहीं
तुम हालातो की भट्टी में
जब जब भी मुझको झोकोंगे

तब तपकर सोना बनुंगा में,
तुम मुझको कब तक रोकोगे
तुम मुझको कब तक रोकोगे
तुम मुझको कब तक रोकोगे

वापस आना पढता है (Hindi Poem)

वापस आना पढता है
फिर वापस आना पढता है
जब वक़्त की चोटें हर सपने हर लेतीं हैं
जब वक़्त की चोटें हर सपने हर लेतीं हैं
जब राह की कीलें पग छलनी कर देती हैं
ऐसे में भी गगन भेद हुंकार लगाना पढता है
ऐसे में भी गगन भेद हुंकार लगाना पढता है
भाग्य को भी अपनी मुट्ठी अधिकार से लाना पढता है
वापस आना पढता है
फिर वापस आना पढता है

कहाँ बंधी ज़ंजीरों में हम जैसे लोगों की हस्ती
कहाँ बंधी ज़ंजीरों में हम जैसे लोगों की हस्ती
ध्वंस हुआ विध्वंस हुआ भवरों में कहाँ फांसी कश्ती
विपदा में मन के बल का हथियार चलना पढता है
विपदा में मन के बल का हथियार चलना पढता है
अपनी हिस्से का सूरज भी खुद खींच के लाना पढता है
वापस आना पढता है
फिर वापस आना पढता है

पत्थर की बंधिश से भी
क्या बहती नदियाँ रूकती है
पत्थर की बंधिश से भी क्या
बहती नदियाँ रूकती है

हालातों की धमकी से क्या अपनी नज़रें झुकती है
क़िस्मत से हर पन्ने पर क़िस्मत लिखवाना पढता है
क़िस्मत से हर पन्ने पर क़िस्मत लिखवाना पढता है
जिसमे मशाल सा जज़्बा हो वो दीप जलाना पढता है
वापस आना पढता है
फिर वापस आना पढता है
फिर वापस आना पढता है

विश्वाश पे अपने खड़े रहो (Motivational Poems In Hindi)

अगर जूनून सर पे तेरे और अंतर में हो विश्वाश
फिर ठोकर और ठुकराने का होगा कहाँ तुम्हें एहसास
मकसद में सच्चाई है तो सीना ठोक के यही कहो
मकसद में सच्चाई है तो सीना ठोक के यही कहो
झुकना होगा दुनियां तुमको विश्वाश पे अपने खड़े रहो
अड़े रहो, अड़े रहो,अड़े रहो

दुनियां बदली है जिसने भी पहले उसको इंकार मिला
दुनियां बदली है जिसने भी पहले उसको इंकार मिला
अपमानों का हार मिला और तानों का हार मिला
हर स्वाश में अब विश्वाश भरो और लहरों के विपरीत बाँहों
हाथों में विजय मशाल लिए विश्वाश पे अपने खड़े रहो
विश्वाश पे अपने खड़े रहो
अड़े रहो, अड़े रहो,अड़े रहो

अपने सपने तुम स्वयं चुनो और बुन लो विश्वाश की डोरी से
अपने सपने तुम स्वयं चुनो और बुन लो विश्वाश की डोरी से
तुम विजय गर्जना के नायक तुमको क्या करना लोरी से
तुम स्वयं सिद्ध इस जीवन के उन्मुक्त गगन में उड़े चलो
आरम्भ आज से नव युग का विश्वाश पे अपने खड़े रहो
विश्वाश पे अपने खड़े रहो
अड़े रहो, अड़े रहो,अड़े रहो

तू किस लिए हताश है (Motivational Kavita In Hindi)

तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है

जो तुझ से लिपटी बेड़ियाँ
समझ न इन को वस्त्र तू
जो तुझ से लिपटी बेड़ियाँ
समझ न इन को वस्त्र तू
ये बेड़ियां पिघाल के
बना ले इनको शस्त्र तू
बना ले इनको शस्त्र तू

तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है

चरित्र जब पवित्र है
तो क्यों है ये दशा तेरी
चरित्र जब पवित्र है
तो क्यों है ये दशा तेरी
ये पापियों को हक़ नहीं
की ले परीक्षा तेरी
की ले परीक्षा तेरी

तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है तू चल, तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है

जला के भस्म कर उसे
जो क्रूरता का जाल है
जला के भस्म कर उसे
जो क्रूरता का जाल है
तू आरती की लौ नहीं
तू क्रोध की मशाल है
तू क्रोध की मशाल है

तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है

चूनर उड़ा के ध्वज बना
गगन भी कपकाएगा
चूनर उड़ा के ध्वज बना
गगन भी कपकाएगा
अगर तेरी चूनर गिरी
तो एक भूकंप आएगा
एक भूकंप आएगा

तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है

गुज़र जायेगा (Motivational Poems In Hindi)

गुज़र जाएगा गुज़र जाएगा
मुश्किल बहुत है मगर वक़्त ही तो है
गुज़र जाएगा गुज़र जाएगा
ज़िंदा रहने का ये जो जज़्बा है
फिर उभर आएगा
गुज़र जाएगा गुज़र जाएगा

माना मौत चेहरा बदल कर आयी है
माना मौत चेहरा बदल कर आयी है
माना रात काली है, भयावह है, गहराई है
लोग दरवाज़ों पे रास्तों पे रुके बैठे है
लोग दरवाज़ों पे रास्तों पे रुके बैठे है
कई गबराये हैं, सहमे हैं, छिपे बैठे है
मगर यकीन रख, मगर यकीन रख

ये बस लम्हां है दो पल में बिखर जाएगा
ज़िंदा रहने का ये जो जज़्बा है
फिर असर लाएगा
मुश्किल बहुत है मगर वक़्त ही तो है
गुज़र जाएगा गुज़र जाएगा

बाज़ार खाली, सड़कें सूनी, मोहल्ले वीरान है
बाज़ार खाली, सड़कें सूनी, मोहल्ले वीरान है
खौफ बरपा है, हर तरफ लोग हैरान है
ये वो कहर है जो दुनियां को डराने आया
ये वो कहर है जो दुनियां को डराने आया
मगर नासमझ है जो इंसान को हराने आया
इतिहास गवाह है, ये मसला भी सुलझ जाएगा
इतिहास गवाह है, ये मसला भी सुलझ जाएगा

ज़िंदा रहने का ये जो जज़्बा है
गुम हुआ है टूटा नहीं
ज़िंदा रहने का ये जो जज़्बा है
गुम हुआ है टूटा नहीं
यही जज़्बा फिर असर लाएगा
फिर उभर आएगा
मुश्किल बहुत है मगर वक़्त ही तो है
गुज़र जाएगा गुज़र जाएगा गुज़र जाएगा


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