Real Life Story Of Shinchan In Hindi [Truth]

Real Life Story Of Shinchan In Hindi – कॉर्टून की दुनियाँ में शिनचैन (Shinchan) एक जाना पहचाना नाम है। शिनचैन टेलीविज़न पर पहली बार 13 April 1992 को दिखाया गया था। Shinchan का पहला एपिसोड बहुत कम लोगों ने देखा लेकिन एक महीने में ही इसकी रेटिंग 10% हो गयी और साल के अंत तक शिनचैन की रेटिंग 20% हो गयी।

शिनचैन का अतरंगी डांस, बेबाकी से बात करना और अपनी शरारतों से अपने माँ-बाप को तंग करना लोगों को खासा पसंद आता है खासकर बच्चे इस कॉर्टून को बहुत ही ज्यादा पसंद करते हैं। लेकिन शिनचैन की कुछ शरारतें ऐसी भी होती हैं जिन्हें हम टेलीविज़न पर नहीं देखते जिनकी वजह से शिनचैन को 50 से भी ज़्यादा देशों में बैन किया जा चूका है और जहाँ आता है वह भी बहुत सारी एडिटिंग के बाद दिखाया जाता है।

लेकिन आज हम आपको Shinchan की उस कहानी से रूबरू करवाएंगे जिसे आज तक टेलीविज़न पर कभी दिखाया नहीं गया और शायद कभी दिखाया जायेगा भी नहीं। तो चलिए शुरू करते हैं Real Life Story Of Shinchan In Hindi.

Real Life Story Of Shinchan In Hindi

बात है सन 1970 के आस पास की आज से लगभग 50 साल पहले जापान के एक शहर कासुकाबे में एक परिवार रहता था। हिरोशी नोहारा, मिसाई नोहारा और उनके दो बच्चे शिनचैन नोहारा और हिमावारी नोहारा साथ ही उनका एक डॉग भी था जिसका नाम था शीरो। शिनचैन 5 साल का एक बेहद शरारती बच्चा था।

हिरोशी नोहारा एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे और मिसाई नोहारा एक हाउस वाइफ थी जिन्हें शॉपिंग करना खासकर सेल से शॉपिंग करना बेहद पसंद था। शिनचैन वैसे तो 5 साल का ही था लेकिन वो जितना शरारती था उतना ही समझदार भी था शिनचैन की माँ मिसाई अक्सर बहार जाते वक़्त शिनचैन और हिमावरी को घर पर ही छोड़कर जाती थी।

एक दिन Shinchan के पापा हिरोशी को अपने किसी काम से शहर से बाहर जाना था तो मिसाई और दोनों बच्चे घर पर ही थे की अचानक मिसाई को याद आया की उसे बाजार जाना था घर की कुछ ज़रूरी चीज़ें ख़रीदने। पहले मिसाई ने सोचा की शिनचैन और हिमावारी को घर पर ही छोड़ कर वो सामान लेने चली जायेगी और जल्द ही वापस आ जाएगी पर फिर जाने क्यों उसका मन बदल गया।

मिसाई शिनचैन और हिमावारी को लेकर ही बाजार चली गयी और एक जनरल स्टोर में सामान लेने के लिए गयी थोड़ी ही देर बाद Shinchan ने देखा की उसकी बहन हिमावारी दूकान के बाहर चली गयी और चलते चलते सड़क के बीचों बीच आ गयी शिनचैन ये देखकर डर गया और हिमावारी को आवाज़ देने लगा की गाड़ियाँ चल रही है वापिस आ जाओ लेकिन हिमावारी को Shinchan की आवाज़ सुनाई नहीं दी।

कहीं हिमावारी को कुछ हो ना जाये इस डर से Shinchan खुद उसे लेने सड़क के बीच चला गया और तभी अचानक एक तेज़ रफ़्तार ट्रक आ गया और उन दोनों से टकरा गया इस हादसे से शिनचैन और हिमावारी की वहीँ दर्दनाक मौत हो गयी।

जब आवाज़ सुनी तो मिसाई भी दूकान के बाहर आयी और जब हिमावारी और शिनचैन को देखा तो वो खुद को संभाल नहीं पायी। शिनचैन के पापा को खबर मिली और फिर वो भी आए। इस हादसे से हिरोशी और मिसाई नोहारा बाहर नहीं निकल पा रहे थे और अपने बच्चों की यादों में खोए रहते थे।

यह घटना वहाँ के लोकल न्यूज़ पेपर में भी छपी और धीरे धीरे लोगों को इसके बारे में पता लगने लगा। मिसाई अपने बच्चों की मौत से डिप्रेशन में चली गयी और अपने बच्चों की यादों में खोकर उनकी तस्वीरें बनाने लगी। वो सोचती रहती थी की अगर उसके बच्चे अभी वहाँ होते तो क्या करते और यही सब सोचकर उसने अपनी बच्चों पर एक किताब ही लिख दी।

शिनचेन क्यों बनाया गया?

हिरोशी और मिसाई को डिप्रेशन में रहते काफी वक़्त हो गया था और फिर उनकी बनायीं हुयी तस्वीरों को लेकर एक कॉमिक बुक निकाली गयी और फिर बाद में एक फेमस कार्टून क्रिएटर योषितो उसुई (Yoshito Usui) को इस पूरी घटना के बारे में पता चला और वो भी इस घटना से इतने प्रभावित हुए की उन्होंने सोच लिया की वो इस दर्दनाक कहानी को पूरी दुनियाँ के सामने लेकर आएंगे।

लेकिन योषितो उसुई को ये भी डर था की कहीं Shinchan की मौत से बच्चों पर बुरा असर ना हो इसलिए उन्होंने Shinchan कार्टून का आखरी एपिसोड कभी भी ना दिखने का फैसला किया जो आज तक कायम हैं और कभी भी Shinchan का आखरी एपिसोड जिसमे उसकी मौत हो गयी उसको कभी भी टेलीविज़न पर प्रकाशित नहीं किया जाएगा।

शिनचैन 1992 में शुरू हुआ लेकिन आज भी शिनचैन की उम्र केवल 5 साल की ही है और हमेशा इतनी ही रहेगी। शिनचैन जापान का सबसे ज्यादा देखे जाने वाला कार्टून है जिनका अंदाज़ा हम इसी से लगा सकते हैं की हम शिनचैन में जिस कासुकाबे शहर को देखते हैं आज जापान सरकार ने उसका नाम कासुकाबे से बदल कर शिनचैन ही रख दिया है।

शिनचैन की आवाज कौन निकालता है?

शिनचैन भारत में भी उतना ही चर्चित है जितना की जापान में लेकिन भारत में शिनचैन के चर्चित होने का एक और कारण है और वो है शिनचैन की आवाज़। शिनचैन शो जब हिंदी में डब होता है तो शिनचैन की आवाज़ एक डबिंग आर्टिस्ट आकांक्षा शर्मा देती हैं। आकांक्षा शर्मा एक बेहतरीन डबिंग आर्टिस्ट हैं जिन्हें शिनचैन की आवाज़ से एक अलग पहचान मिली और आज शिनचैन की आवाज़ आकांक्षा शर्मा की पहचान बन गयी है।


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