Short Story For Kids In Hindi | Kids Story In Hindi (2021)

Short Story For Kids In Hindi

हेलो दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस Blog में आज हम आपके लिए लेकर आए हैं Short Story For Kids In Hindi . बच्चों को ज्ञानवर्धक जानकारी देने का एक अच्छा ज़रिया है Hindi Kahaniyan जिससे आप बच्चो को अच्छे संस्कार दे सकते है वो भी मनोरंजक तरीके से। हम सभी दादी-नानी से राजाओं की, परियों की, पशु-पक्षियों की और भूतप्रेत,जिन्न आदि की कहानियां सुन-सुन कर बड़े हुए हैं।

बेशक आज ज़माना बदल गया है और इसलिए हम Digital तरीके से आपके लिए लेकर आए हैं Short Story For Kids In Hindi और ये Hindi Kahaniyan आप कभी भी कहीं भी अपने Laptop, Mobile, Tablet आदि पर पड़ सकते हैं। Hindilikh एक ऐसी Website है जहाँ आपको न सिर्फ Kids Story In Hindi बल्कि इसके साथ आपको Bhutiya Kahani, Hindi Kavita और Mahabharat और Ramayan Ki Kahani जैसी अच्छी-अच्छी कहानियां पढ़ने को मिलेंगी। तो चलिए शुरू करते है आज की Short Story For Kids In Hindi और सीखते हैं कुछ नया इन Hindi Kahaniyon के ज़रिया।


सफेद हंस (short story for kids in hindi)

सफेद हंस (short story for kids in hindi)
सफेद हंस (short story for kids in hindi)

एक गांव में एक किसान था जिसका नाम था मोहन। मोहन अमीर तो बहुत था , किन्तु बहुत आलसी था। वह न तो अपने खेत देखने जाता था, न खलिहान। अपनी गाय-भैंसो की भी कभी खोज खबर नहीं लेता था। वह अपने घर के सामान की भी देखभाल नहीं करता था। उसने सब काम नौकरो पर छोड़ रखा था। उसके आलस्य के कारण सारे घर की व्यवस्था अस्त-व्यस्त था।

एक दिन मोहन का मित्र गोपाल उससे मिलने उसके घर आया। उसने जब घर का कुप्रबंध देखा तो समझ गया कि समझाने से आलसी मोहन समझने वाला नहीं है। अतः उसने मोहन की भलाई करने के उद्देश्य से उससे कहा, –“मित्र ! तुम्हारी विपत्ति देखकर ,मुझे बड़ा दुःख हो रहा है। तुम्हारी परेशानी दूर करने का एक उपाय मैं जानता हूँ। “

मोहन बोला,–“वह उपाय क्या है मुझे बताओ मैं उसे जरूर करूँगा। “

गोपाल बोला, — “सब पक्षियों के जागने से पहले एक सफेद हंस पृथ्वी पर आता है और दोपहर दिन चढ़े लौट जाता है। यह तो पता नहीं कि वह कब कहाँ आएगा, किन्तु जो उसका दर्शन कर लेता है उसे फिर किसी चीज की कमी नहीं रहती। “

मोहन बोला, — “मैं उस हंस को जरूर ढूंढ कर उसके दर्शन करूँगा। “

गोपाल चला गया। मोहन अगले दिन सवेरे उठा और हंस की खोज में निकल पड़ा। सबसे पहले वह खलिहान में गया। वहां उसने देखा एक आदमी उसके ढेर से एक पोटली में गेंहू बांध कर ले जा रहा था। मोहन को देखकर उसने गेंहू वापस ढेर में डाल दिया और अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी।

उसके बाद मोहन गोशाला गया। वहां का ग्वाला गाय का दूध दुहकर अपनी पत्नी के लोटे में दाल रहा था। मोहन ने उसे डांटा। घर पर जलपान करके वह फिर हंस की खोज में निकल पड़ा और खेत पर गया। उसने देखा कि खेत पर अब तक मजदूर आये ही नहीं थे। वह वहां रुक गया। जब मजदूर आये तो उन्हें देर से आने के लिए लताड़ा और आगे से समय पर आने की हिदायत दी। इस प्रकार वह जहाँ भी गया वही उसकी कोई न कोई हानि रुक गई।

सफेद हंस की खोज में मोहन प्रतिदिन सवेरे उठने और घूमने लगा। अब उसके नौकर समय पर आकर ठीक काम करने लगे। उसके यहाँ चोरी होनी बंद हो गई। पहले वह रोगी रहता था, अब उसका स्वास्थ्य भी ठीक हो गया। जिस खेत से उसे दस मन अन्न मिलता था अब पच्चीस मन मिलने लगा। गोशाला से दूध भी अधिक आने लगा। इसी प्रकार काफी दिन बीत गए। एक दिन गोपाल मोहन के घर आया। मोहन ने उससे कहा,–“मित्र सफेद हंस तो मुझे अब तक नहीं दिखा, किन्तु उसकी खोज में जाने से मुझे बहुत फायदा हुआ है। “

गोपाल हँस पड़ा और बोला,–“परिश्रम ही सफेद हंस है। परिश्रम के पंख सदा उजले होते है। जो परिश्रम नहीं करता वह हानि उठाता है और जो परिश्रम करता है वह संपत्ति और सम्मान पाता है। ”

शिक्षा *****

|| आलस मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है ||


बीरबल और बेईमान अधिकारी (Short Hindi Stories)

एक दिन बादशाह के एक अधिकारी ने कड़ाके की ठंड में एक गरीब आदमी से शर्त लगाई | उसने गरीब आदमी से कहा ,”यदि तुम तालाब के ठंडे पानी में रात भर खड़े रहो , तो मैं तुम्हें पचास अशर्फियाँ दूँगा | “गरीब आदमी को पैसे की जरूरत थी | इसलिए उसने यह शर्त मान ली |

दूसरे दिन शाम को उस गरीब आदमी ने तालाब के पानी में प्रवेश किया और पूरी रात पानी में ठिठुरता हुआ खड़ा रहा | अधिकारी ने उस पर निगरानी रखने के लिए पहरेदार को लगा लिया था | प्रातः काल होने पर पहरेदारों ने अधिकारी को बताया कि बेचारा गरीब आदमी पूरी रात ठिठुरता हुआ तालाब के पानी में खड़ा रहा था | पर अधिकारी की नीयत में खोट थी | वह उस गरीब को पचास अशर्फियाँ देना नहीं चाहता था |

जब वह गरीब आदमी अपना इनाम पाने के लिए अधिकारी के पास पहुँचा , तो उसने उससे पूछा ,” क्या तालाब के पास कोई दीपक जल रहा था ?”

” हाँ ,सरकार ,” गरीब आदमी ने जवाब दिया |
“क्या तुमने उस दीपक की ओर देखा था ?” अधिकारी ने पूछा |
“हाँ ,सरकार , मैं रात भर उसी को देखता रहा |” गरीब आदमी ने कहा |

” अच्छा ,तो यह बात है !” अधिकारी ने कहा ,” तुम रात भर तालाब के पानी में इसीलिए खड़े रह सके , क्योंकि तुम्हें उस दीपक से गर्मी मिलती रही | इसलिए तुम्हें इनाम माँगने का कोई अधिकार नहीं है | भाग जाओ !” इस प्रकार अधिकारी ने उस गरीब को डाँट कर भगा दिया |

गरीब आदमी इससे बहुत दुःखी हुआ | वह सहायता के लिए बीरबल के पास पहुँचा | बीरबल ने बड़े ध्यान से उसकी बात सुनी | उन्होंने उसे ढाढ़स बँधाते हुए कहा ,” चिंता मत करो , मित्र। मैं तुम्हें न्याय अवश्य दिलाऊँगा।” बीरबल के
आश्वाशन पर वह अपने घर चला गया।

दूसरे दिन बीरबल दरबार में नहीं गए। अकबर ने बीरबल का पता लगाने के लिए अपने सेवकों को उसके घर भेजा। सेवकों ने वापस आ कर बादशाह से कहा,”महाराज , बीरबल ने कहा है कि वे खिचड़ी पकते ही वे दरबार में हाजिर हो जाएँगे। ”

काफी समय बीत गया , पर बीरबल नहीं आए। बादशाह ने बीरबल को बुलाने के लिए दूसरे सेवक भेजे। उन्होंने भी लौट कर वही संदेश दिया ,जो पहलेवाले सेवको ने दिया था।

बीरबल का विचित्र जवाब सुन कर बादशाह को बहुत आश्चर्य हुआ। वे स्वयं बीरबल के घर पहुँच गए। बीरबल ने जमीन पर आग जला रखी थी और तीन ऊँचे बाँसो पर एक मिट्टी की हँड़िया बँधी हुई थी।

बादशाह ने कहा ,” बीरबल ,यह क्या बेवकूफी है ? जमीन पर जल रही आग की आँच इतने ऊपर टंगी हँडिया तक कैसे पहुँच सकती है ?”

बीरबल ने जवाब दिया ,”महाराज ,यदि तालाब के पानी में खड़ा आदमी तालाब के पास के दीपक से गर्मी प्राप्त कर सकता है ,तो जमीन पर जल रही आग की आँच से ऊपर बँधी यह हँडिया क्यों नहीं गर्मी पा सकती ?”

बादशाह ने बीरबल से कहा ,” बीरबल पहेलियाँ मत बुझाओ। साफ -साफ कहो बात क्या है ?” तब बीरबल ने बादशाह को बताया कि किस तरह उसके एक अधिकारी ने एक गरीब आदमी से शर्त लगाई थी और अब इनाम देने से वह मुकर रहा है।

बादशाह अकबर ने तुरंत उस अधिकारी तथा गरीब आदमी को बुलाया। दोनों पक्षों की बात सुन कर बादशाह ने उस अधिकारी को आदेश दिया ,” तुम शर्त हार गए हो ! इसलिए इसी वक्त इस आदमी को अशर्फियाँ दे दो।”

अधिकारी को बादशाह का आदेश मानना पड़ा। उसने गरीब आदमी को तुरंत पचास अशर्फियाँ दे दी। उस गरीब आदमी ने बादशाह और बीरबल का लाख – लाख शुक्रिया अदा किया।

शिक्षा*****

|| जैसे को तैसा ||


यह भी देखें:- नमक का व्यापारी हिंदी कहानी

आदत नही छूटती (Moral stories for Kids In Hindi)

एक धोबी था। उसके पास एक गधा था। पर वह गधा बहुत ही दुर्बल और कमजोर था। एक बार धोबी एक जंगल से चला आ रहा था। उसे बाघ की खाल पड़ी मिली।

उसने सोचा क्यों न ये खाल मैं अपने गधे को पहनाकर चरने भेज दूँ। जिससे डरकर कोई इसके पास नहीं आएगा और ये आराम से घास चरकर मोटा ताजा हो जाएगा।

उसने ऐसा ही किया। और गधे को बाघ समझकर उसके पास कोई नही जाता था। और वह जिसके खेत मे मन हो,वहीं जाकर भरपेट चरता था। देखते ही देखते वह मोटा ताज़ा हो गया। पर एक दिन जब रात में वह चर रहा था। तभी पास में कुछ गधों की आवाज़ें आने लगी।

उसने उनकी आवाज़ सुनकर ख़ुद भी ढेंचू- ढेंचू करना शुरू कर दिया। जिससे खेत के मालिक ने उसे पहचान लिया। और उसकी ख़ूब पिटाई की। जिससे वह वहीं ढेर हो गया।

शिक्षा *****

|| जो मूल प्रवृत्ति होती है वह नही बदलती है ||


बुद्धिचंद की बुद्धि का चमत्कार (Story In Hindi)

बुद्धिचंद नाम का एक आदमी था। उसके पड़ोस में लक्ष्मीनंदन नाम का एक आदमी रहता था। बुद्धिचंद ने अपनी बेटी की शादी हो जाने के बाद लक्ष्मीनंदन ने बुद्धिचंद से अपने पैसे वापस माँगे।

बुद्धिचंद ने कहा,” सेठ जी, मैं आपका एक -एक पैसा चुकता कर दूँगा। मुझे थोड़ा समय दीजिए। ”

लक्ष्मीनंदन ने कहा,”मेरा ख्याल था कि तुम एक ईमानदार आदमी हो ! पर अब पता चला कि यह मेरी भूल थी। ”

बुद्धिचंद ने कहा,”सेठ जी ,धीरज रखिए ! मैं आपका कर्ज अवश्य चूका दूँगा। मैं बेईमान नहीं हूँ। ”

लक्ष्मीनंदन ने जवाब दिया,”अगर तुम बेईमान नहीं हो ,तो मेरे साथ अदालत में चलो। वहाँ न्यायधीश के सामने मुझे कर दो कि तुमने कर्ज के बदले अपना मकान मेरे पास गिरवी रखा है। ”

बुधीचंद ने कहा,”सेठ जी ,अदालत चलने की क्या जरूरत है ? मुझ पर विश्वास रखिए। मैं आपका पैसा जल्द से जल्द लौटा दूँगा।

पर लक्ष्मीनंदन ने बुधीचंद की एक न सुनी। वह अपनी इस जिद पर अड़ा रहा कि बुद्धिचंद अदालत चल कर दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दे। वास्तव में लक्ष्मीनंदन बुद्धिचंद के मकान को हड़पना चाहता था।

बुद्धिचंद लक्ष्मीनंदन के मन की बात ताड़ गया। उसने लक्ष्मीनंदन से कहा , “मैं अदालत चलने के लिए तैयार हूँ। पर वहाँ चलने के लिए मेरे पास न तो घोड़ा है और न …”

सेठ ने बीच ही में उसकी बात काट कर कहा ,

“तुम तैयार तो हो जाओ ,मैं तुम्हें अपना घोड़ा दे दूँगा। ”

“पर मेरे पास अच्छे कपड़े भी तो नहीं हैं। ” बुद्धिचंद ने कहा।

“चलो, मैं तुम्हें अपने कपड़े भी दे दूँगा।” लक्ष्मीनंदन ने कहा।

“मगर मैं पगड़ी की व्ययस्था कहाँ से करूंगा ?” बुद्धिचंद ने कहा।

“वह भी मैं तुम्हें दे दूँगा। और कुछ चाहिए ?लक्ष्मीनंदन ने कहा।

“सेठ जी, मेरे पास तो जूते भी नहीं हैं !” बुद्धिचंद ने कहा।

“मैं तुम्हें अपने जूते भी दे दूँगा। मगर अब देर मत करो ! झटपट तैयार हो जाओ।” लक्ष्मीनंदन ने मन -ही -मन खुश होते हुए कहा।

बुद्धिचंद ने लक्ष्मीनंदन की पोशाक पहन ली। सिर पर पगड़ी और पैरों में उसके जूते पहन लिए। वह लक्ष्मीनंदन के घोड़े पर सवार हो कर उसके साथ अदालत जाने के लिए चल पड़ा।

जब अदालत मैं बुद्धिचंद का नाम पुकारा गया ,तो वह न्यायधीश के सामने हाजिर हुआ। उसने न्यायधीश से कहा ,”श्रीमान ,सेठ लक्ष्मीनंदन का कहना है कि मेरा मकान और मेरे घर की सारी चीज़े इनकी हैं। इसके लिए ये हमेशा मुझसे झगड़ा करते रहते हैं। मुझे सेठ जी जबरन अदालत में ले कर आए हैं। श्रीमान ,कृपया आप मुझे इनसे कुछ सवाल पूछने की इजाजत दे। ”

न्यायधीश ने लक्ष्मीनंदन को बुलवाया और उसे बुद्धिचंद के सवालों का जवाब देने का आदेश दिया।
बुद्धिचंद ने लक्ष्मीनंदन से पूछा ,”मेरे सिर पर बँधी पगड़ी किसकी है?”
लक्ष्मीनंदन ने कहा ,”मेरी है !”
“मैंने जो कपडे पहन रखे हैं ,वे किसके हैं ?” बुद्धिचंद ने पूछा।
” मेरे हैं , और किसके ?” लक्ष्मीनंदन ने कहा।
“और मेरे पैरो में जो जूते हैं ,वे किसके है ?” बुद्धिचंद ने पूछा।
“जूते भी मेरे ही हैं। ” लक्ष्मीनंदन ने चीखते हुए कहा।

“और मेरे घोड़े पर सवार हो कर मैं यहाँ कचहरी आया हूँ , वह घोड़ा किसका है ?” बुद्धिचंदन ने पूछा।
“वह घोड़ा भी तो मेरे ही है ,”लक्ष्मीनंदन ने ऊँची आवाज में कहा, “पगड़ी , घोड़ा ,जूते , कपड़े सब मेरे हैं। ”
अदालत में मौजूद सभी लोग लक्ष्मीनंदन का जवाब सुन कर ठठा कर हँसने लगे। हर किसी को लगा की लक्ष्मीनंदन पागल हो गया है। अंत में न्यायधीश ने मुकदमा खारिज कर दिया।

बुद्धिचंद ने अपनी बुद्धि से अदालत में लक्ष्मीनंदन को हँसी का पात्र साबित कर दिया। इस तरह उसने लक्ष्मीनंदन के षड्यंत्र को विफल कर दिया।

शिक्षा*****

|| धूर्त के साथ धूर्तता से ही पेश आना चाहिए ||


यह भी देखें:- बदसूरत ऊँट हिंदी कहानी

भेड़िया और मेमना (Small Hindi Story For Kids In Hindi)

एक मेमना था। एक दिन वह झरने पर पानी पीने गया। वह पानी पी रहा था कि उसी समय एक भेड़िया भी वहाँ पानी पीने के लिए आया।

मेमने को देख कर भेड़िए ने सोचा ,’ इस नन्हे मेमने का मांस निश्चित रूप से बहुत मुलायम और स्वादिष्ट होगा।

मुझे अपने आहार के लिए इसका शिकार करना चाहिए।’
भेड़िया मेमने के पास गया और कहने लगा ,”तुम मेरे पीने का पानी गंदा कर रहे हो। ”

मेमने ने कहा , “यह कैसे हो सकता है ? पानी तो अपनी तरह से बह कर मेरी तरफ से बह कर मेरी तरफ आ रहा है। ”
भेड़िए ने कहा ,” मुझसे भहस मत करो। तुम शायद वही उज्जड़ प्राणी हो , जिसने पिछले महीने मुझे गाली दी थी।”

“मैं तो पिछले महीने पैदा भी नहीं हुआ था।” मेमने ने आश्चर्य से उसकी ओर देखते हुए कहा।
“तो फिर पिछले महीने तेरी माँ ने मुझे गाली दी होगी ,”कहते हुए भेड़िए बेचारे मेमने पर टूट पड़ा और उसे मर डाला।

शिक्षा *****

|| खतरनाक लोगों की छाया से भी दूर रहना चाहिए ||


कौए और कबूतर (Moral Stories In Hindi)

एक किसान के खेत में रोज कौओं का एक बड़ा झुंड आ जाता था। इससे उसकी खड़ी फसल का बहुत नुकसान होता था। किसान इन कौओं से परेशान हो गया था। आखिर उसने क्रोद्ध होकर कौओं को सबक सिखाने का निश्चित किया।

एक दिन उसने अपने खेत में जाल बिछा दिया। जाल के ऊपर उसने अनाज के कुछ दाने बिखेर दिए।

कौओं की नजर दोनों पर पड़ी। ज्यों ही वे दाने चुगने के लिए नीचे उतरे,सब-के-सब जाल में फँस गए।

किसान जाल में फँसे कौओं को देख कर बहुत खुश हुआ।
उसने कहा ,”अच्छा हुआ चारों , अब मैं तुममें से किसी को नहीं छोडूँगा।”

तभी किसान को एक करुण आवाज सुनाई दी। उसे सुन कर किसान को बड़ा आश्चर्य हुआ।
उसने ध्यान से जाल में देखा। कौओं के साथ उसमें एक कबूरत भी फँसा हुआ था।

किसान ने कबूतर से कहा ,”अरे ,इस टोली में तू कैसे शामिल हो गया ?पर मैं तुम्हें भी छोड़ने वाला नहीं हूँ। बुरे लोगों की संगति का फल तुम्हें भोगना ही पड़ेगा।” फिर किसान ने अपने शिकारी कुत्तों को इशारा कर दिया। कुत्ते दौड़ते हुए आ पहुँचे और उन पक्षियों पर टूट पड़े। एक – एक कर उन्होंने सबका काम तमाम कर दिया।

शिक्षा*****

|| बुरे लोगों की संगति दुखदायी होती है ||


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