10+ Small Story In Hindi | Short Hindi Stories

Small Story In Hindi

Small Story In Hindi – हेलो दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस Blog में आज हम आपके लिए लेकर आए हैं Small Story In Hindi. Hindi Kahaniyan एक ऐसा ज़रियाँ है जिससे हम नैतिक मूल्यों को एक बेहद ही आसान तरीके से बच्चो को समझा सकते हैं। आज के समय में जहाँ बच्चे सिर्फ Laptop, Mobile, Tablet आदी पर ही अपना समय व्यतीत करते हैं, हम इन्ही संसाधनों का इस्तेमाल करके बच्चों को हिंदी कहानियों के ज़रिये शिक्षा दे सकते हैं जिसे बच्चे आसानी से समझ सके और वे इन हिंदी कहानियों में छुपे नैतिक मूल्यों को समझ भी सके।

Hindilikh एक ऐसी Website है जहाँ आपको न सिर्फ Short Hindi Stories बल्कि इसके साथ आपको Bhutiya Kahani, Hindi Kavita और Mahabharat और Ramayan Ki Kahani जैसी अच्छी-अच्छी और ज्ञानवर्धक कहानियां पढ़ने को मिलेंगी। तो चलिए शुरू करते है आज की Kids Moral Story In Hindi और सीखते हैं कुछ नया इन Hindi Kahaniyon के ज़रिया।


लालची बंटी (Short Hindi Stories)

बंटी नाम का एक प्यारा लड़का था। उसे टाफियाँ बहुत पसंद थीं। एक दिन वह अपनी माँ के साथ अपनी मौसी के घर गया। मौसी बंटी की आदत से परिचित थी। इसलिए वह टाफियाँ से भरा मर्तबान ही उसके लिए खरीद लाई थी।

मौसी ने अलमारी से टाफियों का मर्तबान निकाल कर बंटी सामने रख दिया। बंटी इतनी सारी टाफियाँ देख कर पुलकित हो गया। मौसी ने कहा ,”बंटी ,तुम्हें जितनी टाफियाँ चाहिए ,बेहिचक ले लो।” बंटी ने झटपट मर्तबान का ढक्कन खोल कर हाथ भीतर डाल दिया। उसने ढेर सारी टाफियाँ अपनी मुट्ठी में भर लीं।

मर्तबान का मुँह बहुत ही छोटा था। टाफियाँ से भरी बंटी की मुट्ठी मर्तबान के मुँह से बड़ी हो गई थी। इसलिए बंटी का हाथ बाहर नहीं निकल पा रहा था। उसने बहुत कोशिश की। अपने दूसरे हाथ से मर्तबान को आगे -पीछे सरकाया। उसे तेजी से गोल -गोल घुमाया। पर उसका हाथ मर्तबान से बाहर नहीं निकला।

बंटी की परेशानी देख कर माँ ने कहा ,”बेटे ! अक्ल से काम लो। अपनी मुट्ठी खोल कर कुछ टाफियाँ मर्तबान में गिरा दो। फिर तुम्हारा हाथ आसानी से बाहर निकल आएगा।” बंटी ने वैसा ही किया। उसका हाथ आराम से मर्तबान से बाहर आ गया।

शिक्षा –

|| अधिक लालच करना अच्छा नहीं होता ||


शहर में कितने कौए? (Moral Stories In Hindi)

बादशाह अकबर अक्सर अपने दरबारियों से अनोखे प्रश्न और तरह -तरह की पहेलियाँ पूछते रहते थे। इस तरह वे अपने दरबारियों की बुद्धि एवं हाजिरजवाबी की परीक्षा लेते रहते थे। एक बार उन्होंने अपने दरबारियों से एक विचित्र सवाल पूछा। प्रश्न था ,”इस शहर में कितने कौए ?”

उन्होंने एक -एक कर सभी दरबारियों पर नज़र डाली। बारी -बारी से हर दरबारी खड़ा होता और जवाब न सूझने पर अपना सर झुका लेता । कोई भी दरबारी बादशाह के सवाल का जवाब नहीं दे सका।

इतने में बीरबल ने दरबार में प्रवेश किया। वे सभी दरबारियों से ज्यादा बुद्धिमान थे। उन्होंने देखा कि सभी दरबारी सिर झुकाए खड़े हैं। वे फौरन समझ गए कि आज बादशाह ने दरबारियों के सामने जरूर कोई जटिल समस्या रखी है ,जिसे कोई भी दरबारी हल नहीं कर सका है।

बीरबल ने शिष्टतापूर्वक बादशाह का अभिवादन किया और वे अपने आसन पर बैठ गए। बादशाह ने उनसे पूछा,”बीरबल,तुम बताओ ,इस शहर में कितने कौए हैं ?”

हाजिरजवाब बीरबल फौरन खड़े हो गए। उन्होंने झट से जवाब दिया ,”हुजूर ,इस शहर में कुल पचास हजार तीन सौ अठहत्तर कौए है।”

“मगर,यह बात तुम इतने विश्वास के साथ कैसे कह सकते हो , बीरबल ?” बादशाह ने आष्चर्य व्यक्त करते हुए कहा।

बीरबल ने जवाब दिया ,”हुजूर यदि आपको इसमें संदेह हो ,तो गिनवा कर देख लीजिए। अगर वे पचास हजार तीन सौ अठहत्तर से ज्यादा है ,तो इसका मतलब कि कुछ कौए बहार से अपने मित्रों और रिश्तेदारों से मिलने इस शहर में आए हुए हैं। यदि वे इससे कम है ,तो समझ लीजिए कि यहाँ के वे कौए अपने मित्रों और रिश्तेदारों से मिलने बाहर गए हुए हैं। ”

बादशाह बीरबल की हाजिरजवाबी से बहुत खुश हुए। उन्होंने कहा ,”शाबाश बीरबल ,तुम सचमुच लाजवाब हो। ”

शिक्षा –

|| जैसा सवाल वैसा जवाब ||


पिपहरीवाला और गाँव के लोग (Hindi Kahani)

एक गाँव में हज़ारों चूहे थे। गाँव में ऐसी कोई जगह नहीं थी, जहाँ चूहे न हों। घर में, गोदाम में, दुकान में, खेतों में, हर जगह चूहे ही चूहे नज़र आते थे। ये चूहे ढेरों अनाज खा जाते थे। घर का सामान, कपडे, कागज़-पत्र सब कुछ वे कुतर डालते। चूहों के कारण गाँव के लोगों को काफी नुक्सान उठाना पढता था। वे किसी भी कीमत पर एक चूहों से छुटकारा पाना चाहते थे।

एक दिन एक पिपहरीवाला उस गाँव में आया। उसने देखा की गाँव के लोग चूहों से परेशान हैं। तब उसने गाँव के लोगों से कहा, “मैं गाँव के सारे चूहों को ख़तम कर दूँगा। पर इसके लिए तुम लोग को मुझे पाँच हज़ार रूपए देने होंगे।”

गांववालों ने पिपहरीवाला को पाँच हज़ार रूपए देना मंज़ूर कर लिया। पिपहरीवाला मधुर स्वर में अपनी पिपहरी बजाने लगा। पिपहरी की आवाज़ सुन कर सभी चूहे घरों, दुकानों, गोदामों और खेत खलिहानों से निकल कर दौड़ते हुए रास्ते पर आ गए। वे पिपहरी की आवाज़ सुन कर नाचने लगे। पिपहरीवाला पिपहरी बजाते-बजाते नदी की ओर चल पड़ा। चूहे भी नाचते-नाचते उसके पीछे-पीछे चले। वह नदी के पानी में उतर गया। उसके पीछे-पीछे चूहे भी पानी में कूद गए। इस तरह सारे चूहे पानी में डूब कर मर गए।

इसके बाद पिपहरीवाला गाँव में लौटा। उसने गाँव के लोगों से अपने पाँच हज़ार रूपए मांगे। पर गाँववालों ने पैसे देने से इंकार कर दिया।

पिपहरीवाला ने कहा, “तुम लोग बईमान हो। अब मैं फिर से पिपहरी बजा रहा हूँ। इस बार तुम लोगों को पाँच हज़ार के बजाय दस हज़ार रूपए देने पड़ेंगे।

उसने पहले से भी अधिक मधुर स्वर में पिपहरी बजानी शुरू की। पिपहरी की आवाज़ सुन कर गाँव के सारे बच्चे रास्ते पर आ गए और मस्त हो कर नाचने लगे। पिपहरीवाला पिपहरी बजाता रहा और बच्चे मस्ती में नाचते रहे। बहुत देर तक यों ही चलता रहा। गाँव के लोग न पिपहरीवाला को पिपहरी बजाने से रोक पाए और न ही अपने बच्चों को नाचने से।

गाँव के लोगों को लगा की चूहों की तरह उनके बच्चों के भी नाचते नाचते प्राण निकल जाएँगे। उन्हें अब पिपहरीवाला को पैसे न देने का बड़ा पछतावा हुआ।

आख़िरकार गाँव के लोगों ने पिपहरीवाला से विनती की, “ये रहे तुम्हारे दस हज़ार रूपए। अपने पैसे लो और पिपहरी बजाना बंद करो।”

पिपहरीवाला ने पिपहरी बजाना बंद कर दिया। पैसे अपनी जेब में डाल कर वह गाँव से चल पड़ा। पिपहरी की आवाज़ बंद होते ही बच्चों ने नाचना बंद कर दिया। वे अपने अपने घर लौट गए। गाँव के लोगों में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी।

शिक्षा –

|| बेइमानी की सज़ा हमेशा बहुत भारी होती है ||


राजा सोलोमन और शीबा की रानी (Hindi Kahani)

राजा सोलोमन अपनी बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध था। शीबा की रानी उसकी बुद्धि की परीक्षा लेना चाहती थी। एक दिन वह अपने दोनों हाथों में फूलों के दो हार लेकर राजा सोलोमन के दरबार में आई। दोनों हार देखने में एक जैसे थे। पर उनमें से एक हार असली फूलों का और दूसरा कागज के फूलों का था। उसने राजा से कहा ,”हे राजन ,कृपया यह बताइए कि इन दोनों हारों में से कौन -सा हार असली फूलों का और कौन -सा नकली फूलों का है। आपको सिंहासन पर बैठे -बैठे ही इसका निर्णय करना है।”

राजा ने दोनों हारों को बड़े ध्यान से देखा। दोनों एक जैसे दिखाई दे रहे थे। सिर्फ दूर से देख कर असली -नकली का निर्णय करना बहुत मुश्किल था। राजा सोच में पड़ गया। आखिर में उसे एक तरकीब सूझी। उसके राजमहल के एक ओर हरी -भरी फुलवारी थी। उसने अपने एक सेवक को आदेश दिया कि वह बगीचे की ओर वाली खिड़की खोल दे। सेवक ने खिड़की खोल दी। खिड़की खलते ही बगीचे से कुछ मधुमक्खियाँ अंदर आईं। वे रानी के दाएँ हाथ के हार के आसपास मंडराने लगीं।

यह देख कर राजा ने मुसकराते हुए कहा ,”रानी साहिबा , मेरे बगीचे की मधुमक्खियाँ ने मुझे आपके सवाल का जवाब दे दिया है। आपके दाहिने हाथ का हार फूलों से बना है। ”

रानी ने आदरपूर्वक राजा का अभिवादन करते हुए कहा ,”राजन ,आपने सही उत्तर दिया है। मेरे दाहिने हाथ का हार असली फूलों से बना है। आप सचमुच बहुत बुद्धिमान हैं। ”

शिक्षा –

|| जहाँ आँखें सही निर्णय लेने में असमर्थ हों ,वहाँ बुद्धि से काम लेना चाहिए ||


चंडूल और किसान ( Story In Hindi )

गेहूँ के एक खेत में चंडूल चिड़िया ने अपना घोंसला बनाया था। वह अपने बच्चों के साथ उस घोंसले में रहती थी। गेहूँ की फसल तैयार होने और कटने तक उनका घोंसला सुरक्षित था।

एक दिन चंडूल ने अपने बच्चों से कहा ,”अब फसल तैयार हो गयी है और कटने वाली है। इसलिए हमें कहीं और घोंसला बनाना चाहिए।”

दूसरे दिन किसान खेत पर आया। उसने किसी से बातचीत करते हुए कहा ,”कल मैं अपने रिश्तेदारों को बुला कर फसल की कटाई करूँगा।” किसान की यह बात चंडूल और उसके बच्चों ने सुनी।

बच्चों ने कहा,”माँ ,जल्दी कर ! कल सूर्य निकलने से पहले हमें यह घोसला छोड़ देना चाहिए। किसान कल फसल की कटाई करने वाला है। ”

माँ ने कहा ,”घबराने की जरूरत नहीं है। वह कल सवेरे फसल की कटाई शुरू कर ही नहीं सकता। ”

दूसरे दिन किसान खेत पर आया। उसका कोई भी रिश्तेदार कटाई में उसकी मदद करने नहीं पहुँचा था। इसलिए वह खाली हाथ वापस चला गया। जाते -जाते उसने कहा,”कल मैं अपने पड़ोसियों को बुलाऊँगा और फसल की कटाई जरूर करूँगा। ”

चंडूल के बच्चों ने फिर अपनी माँ से कहा,”माँ ,जल्दी कर ! अब हमें इस घोंसले को छोड़ देना चाहिए।” पर माँ ने जवाब दिया ,”रुको ,अभी घोंसला छोड़ने की कोई जरूरत नहीं है।”

अगले दिन ठीक वही हुआ ,जैसा चंडूल चिड़िया ने सोचा था। किसान का कोई भी पड़ोसी उसकी मदद के लिए नहीं आया। मगर अब की बार किसान ने कहा ,”दूसरों के भरोसे बैठे रहने से काम नहीं चलेगा। कल मैं खुद इस फसल की कटाई करूँगा।

यह सुन कर चंडूल ने अपने बच्चों से कहा ,”अब हमें तुरंत इस घोंसले को छोड़ देना चाहिए ,क्योंकि कल किसान जरूर फसल की कटाई करेगा। ”

शिक्षा –

|| अपना काम अपने ही भरोसे होता है ||


गरीब आदमी और अमीर आदमी (Short Hindi Stories)

एक गरीब मोची और धनि व्यापारी ,दोनों पड़ोसी थे। मोची के घर में ही जूते -चप्पल सीने की छोटी -सी दुकान थी। काम करते -करते वह अक्सर मौज में आ कर गाने लगता था। वह बहुत निशिंचित और मस्तमौला आदमी था। उसे कभी अपने घर के दरवाजे और खिड़कियाँ बंद करने की जरूरत महसूस नहीं हुई। वह रात को भगवान की प्रार्थना करता और मजे से सो जाता।

अमीर आदमी इस गरीब ,पर हँसमुख मोची की ओर ईर्ष्या भरी नजरों से देखा करता। गरीब होने के बावजूद उस मोची को किसी बात की चिंता नहीं थी। जबकि अमीर आदमी को तरह -तरह की चिंताएँ सताती रहती थी। गाने -गुनगुनाने की कौन कहे ,वह कभी खुल कर हँस भी नहीं सकता था। रात को वह अपने मकान के सारे दरवाजे और खिड़कियाँ बंद कर लेता था। फिर भी ,उसे चैन की नींद नहीं आती थी !

एक दिन अमीर आदमी ने मोची को अपने घर बुलाया। उसने उसे पाँच हजार रुपये दिए और कहा ,”लो ,ये पैसे रख लो। इन्हें अपने ही पैसे समझो। इन पैसों को मुझे लौटने की जरूरत नहीं है।” गरीब आदमी ने पैसे ले लिये।

इतने पैसे पा कर गरीब आदमी को पहले तो बहुत खुशी हुई। पर जल्दी ही इन पैसों ने उसके शांतिपूर्ण और निशिंचित जीवन में खलल पैदा कर दी। पैसे पाने पर जीवन में पहली बार उसने अपने घर का दरवाजा और खिड़कियाँ बंद कर उनमें चटखनी लगाई। यह देखने के लिए कि पैसे सुरक्षित हैं या नहीं ,रात को कई बार उसकी नींद टूटी।

दूसरे दिन बड़े सवेरे गरीब मोची ,अपने घनी पड़ोसी के घर पहुँचा। उसने पाँच हजार रुपये उस व्यापारी को लौटाते हुए हाथ जोड़ कर कहा ,”सेठ जी ,मेहरबानी करके आप अपना यह पैसा वापस ले लीजिये। इन पैसों ने तो एक ही रात में मेरी नींद हराम कर दी। मैं हँसना-गाना अब भूल गया।

शिक्षा –

|| पैसे से हर प्रकार की खुशी नहीं प्राप्त की जा सकती ||


चतुर ज्योतिषी (Small Story In Hindi)

एक सम्राट था। एक बार उसने एक प्रसिद्ध ज्योतिषी को अपने दरबार में बुलाया। ज्योतिषी अचूक भविष्यवाणी करने के लिए मशहूर था। सम्राट ने बड़े सम्मान से उसका स्वागत किया और उसे ऊँचे आसान पर बिठाया।

फिर सम्राट ने उसे अपनी जन्म-कुंडली दी और कहा, “पंडित जी, कृपया जन्म-कुंडली पढ़ कर मेरा भविष्य बताइए।”

ज्योतिषी ने बड़ी सावधानी से सम्राट की जन्म-कुंडली का अध्ययन किया। फिर उसने कहा, “महाराज, आपके ग्रह आपका जो भविष्य बता रहे हैं, वही मैं आपको बताऊँगा। मैं काल्पनिक कहानियाँ कभी नहीं कहता।”

सम्राट ने कहा, “मैं समझ गया की आप क्या कहना चाहते हैं। आप निर्भीक हो कर मेरा भविष्य बताइए।”

ज्योतिषी ने सम्राट के भविष्य की अच्छी अच्छी बातें बताना शुरू किया। सम्राट का चेहरा आनंद से खिल गया। भविष्य के बारे में अच्छी अच्छी बातें सुन कर उसे बहुत ख़ुशी हुई।

फिर ज्योतिषी ने सम्राट के भविष्य की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की भविष्यवाणी करना शुरू किया। इन बातों को सुन कर सम्राट बहुत दुःखी हुआ। एक बार तो उसके मर को बहुत गहरी ठेस लगी। उसने क्रोध भरे स्वर में ज्योतिषी से कहा, “बंद करो अपनी ये वाहियात बातें। अब मुझे सिर्फ यह बताओ की तुम्हारे ग्रहों की सूचना के अनुसार तुम्हारी मौत कब होने वाली है?”

चतुर ज्योतिषी सम्राट का आशय समझ गया। उसने जवाब दिया, “महाराज, मेरी मृत्यु आपकी मृत्यु पहले होने वाली है।”

सम्राट ज्योतिषी को मृत्युदंड देने वाला था। पर उसने अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी सुन कर अपना इरादा बदल दिया। उसका ग़ुस्सा शांत हो गया। सम्राट ने ज्योतिषी के बुद्धिमत्तापूर्ण उत्तर की बहुत सराहना की। उसने ज्योतिषी को मूल्यवान उपहार दिए और उसे सम्मानपूर्ण विदा किया।

शिक्षा –

|| संकट के समय चतुराई से काम लेना चाहिए ||


क्या अच्छा क्या बुरा (Moral stories for Kids In Hindi)

एक गांव में एक किसान था। वह बहुत ही आस्तिक प्रवृत्ति का इंसान था और उसे ईश्वर पर अन्धा विश्वाश था। उसका कहना था कि ईश्वर जो भी करते हैं, वो हमारे भले के लिए करते हैं। एक दिन उसका घोड़ा रस्सी तोड़कर जंगल की ओर भाग गया। इस पर उसके पड़ोसियों ने आकर दुख जताया और कहा की तुम तो कहते थे की भगवान जो करते हैं हमारे अच्छे के लिए करते हैं तो आज तुम पर ये दुःख कैसे दे दिया। याह सब सुनकर भी किसान शांत रहा।

दो दिन बाद किसान का घोड़ा वापस आ गया और अपने साथ तीन जंगली घोड़े और लेकर आया । इस बार लोगों ने आकर ख़ुशी प्रकट की। लेकिन किसान इस बार भी शांत रहा। दो दिन बाद उन्हीं में से एक जंगली घोड़े की सवारी करते समय उसका पुत्र गिर गयाऔर उसकी एक टांग टूट गयी। पड़ोसियों ने फिर आकर अफसोस प्रगट किया। लेकिन किसान फिर भी शांत ही रहा।

कुछ दिन बाद राजा की सेना के कुछ लोग गांव में आये और गांव के नौजवानों को जबरदस्ती सेना में भर्ती करने के लिए लेकर गए । किसान का लड़का पैर टूटने होने की वजह से बच गया। तब उस किसान ने कहाँ हम नहीं जानते की ईश्वर कब किस तरह से हमारी मदद करते हैं इसलिए ईश्वर जो करते है, हमें उसे अपने लिए अच्छा ही मानना चाहिए। फिर चाहे उस वक़्त वो हमें सही लगे या गलत।

शिक्षा –

|| ईश्वर किसी का बुरा नहीं करते ||


कर्म करो (Small Story In Hindi)

एक गाँव में एक लकड़हारा रहता था। वह रोज जंगल में लकड़ी काटने के लिए जाता था। वहां उसे हमेशा एक अपाहिज लंगड़ी लोमड़ी दिखाई पड़ती थी। वह सोचता रहता था की इस घने जंगल में इस अपाहिज लोमड़ी को भोजन कैसे प्राप्त होता होगा? जबकि यह शिकार भी नहीं कर सकती। एक दिन उस लकड़हारे ने सोचा कि आज तो मैं पता लगाऊंगा की यह अपाहिज लंगड़ी लोमड़ी इस घने जंगल में जीवित कैसे है? वह लकड़हारा उसी के पास के एक वृक्ष पर चढ़कर बैठ गया।

थोड़ी देर बाद उसने देखा कि एक शेर अपना शिकार लेकर आया और वहीं पास की एक झाड़ी में बैठकर खाने लगा। शेर का पेट भर जाने के बाद शेर बचे हुआ शिकार को वह वहीं छोड़ कर चला गया। उस बचे हुए शिकार को लोमड़ी ने खाया और अपना पेट भर लिया। यह देखकर लकड़हारे ने सोचा कि मैं तो यूँ ही भोजन के लिए इतनी मेहनत करता हूँ।

जब भगवान इस अपाहिज लंगड़ी लोमड़ी का पेट भरते हैं। तो मेरा क्यों नहीं भरेंगे? यह सोचकर लकड़हारे ने अपनी कुल्हाड़ी नीचे फेंक दी। उसने वही पेड़ के नीचे अपना आसन जमा लिया और भोजन का इंतजार करने लगा। कई दिन बीत गए, लेकिन कोई उसके लिए भोजन लेकर नहीं आया।

वह भूख से इतना कमजोर हो गया कि चलने फिरने में भी असमर्थ हो गया। लेकिन उसका विश्वास दृढ़ था। तभी उसे एक आवाज सुनाई दी। “अरे मूर्ख! तुझे अपाहिज लोमड़ी ही दिखाई दी। मेहनत करके अपना पेट भरता वह शेर नहीं दिखाई दिया। अगर बनना ही है तो उस शेर की तरह बन मेहनती, उस अपाहिज लंगड़ी लोमड़ी की तरह क्यों बनता है ? शेर की तरह सोच जो स्वयं का पेट तो भरता ही है, साथ ही इस अपाहिज लोमड़ी का भी पेट भरता है।”

यह सुनकर लकड़हारे को अपनी गलती का अहसास हो गया।

शिक्षा –

|| इस संसार में कर्म किए बिना कुछ नहीं मिलता ||


आलसी बेटा (Story In Hindi)

एक गाँव में एक किसान रहता था। उस किसान के दो बेटे थे रामू और किशन। किसान का बड़ा बेटा किशन बहुत ही आलसी किस्म का था जबकि छोटा बेटा रामू बहुत ही तेज़ और काम करने को हमेशा तत्पर रहने वाला था।

किसान ने अपने दोनों बेटों को पढ़ाया रामू गाँव के ही स्कूल तक पढ़ा जबकि किशन को आगे की पढ़ाई के लिए शहर भेज दिया। किशन वहाँ पढ़ा लेकिन जब बात नौकरी करने की आयी तो किशन ने ना जाने कितने नौकरी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। कभी उसे शहर से बहार नहीं जाना था, तो कभी उसे अपनी तनख्वा काम लगती, तो कभी उसे लगता की ये नौकरी उसके लिए छोटी है।

ऐसे करते करते किशन को बहुत समय हो गया लेकिन वो अपनी आलस और नुक्स निकालने के ब्यवहार के चलते कही भी नौकरी नहीं कर पाया और थक हारकर अपने गाँव वापिस आ गया। जब वह वापिस आया तो देखा की उसका घर पूरी तरह से बदल गया है जहाँ पहले उसका घर पुराना था वहीँ अब उसका घर पक्का बन गया है, वहीँ जहाँ पहले उसके पिताजी खेती के लिए बैल का इस्तेमाल करते थे वहीँ अब उनके पास एक ट्रैक्टर भी था और उनके पास पहले से ज्यादा खेती और रुपया पैसा था।

जब उसने अपने पिताजी से पुछा के कैसे ये सब हुआ तो पिताजी ने बताया की रामू ने दिन रात मेहनत करके ये सब हासिल किया है वो ना दिन देखता ना रात देखता बस अपने काम को ही सर्वपरी मानता था जिसकी वजह से आज वह अपने जीवन में बहुत सफल है और साथ थी उसकी मेहनत से हमारी ज़िन्दगी भी बदल गयी।

किशन को यह सब देख और सुनकर खुद पर शर्म आयी। उसने उसी समय ठान लिया की वो भी अपना आलस छोड़ कर मेहनत ज़रूर करेगा और एक सफल इंसान बनकर ही घर आएगा। वो उसी समय वापिस शहर जाकर अपने लिए नौकरी ढूंढने लगा।

शिक्षा –

|| आलस मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है ||


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