2010 की वो सर्द रात – True Horror Story In Hindi

True Horror Story in Hindi

हेलो दोस्तों आप सभी का स्वागत है हमारे इस ब्लॉग में आज हम आपको एक बेहद ही रहस्यमयी और भूतिया कहानी से रूबरू करने वाले है, यह एक True Horror Story in Hindi है जिसे जानकार आप सभी हैरत में पड़ जायेंगे | दोस्तों वैसे तो भूत प्रेत और सुपर नेचुरल पावर्स को मानना या ना मानना किसी इंसान के विश्वास का विषय है |

जहाँ कुछ लोग भूत प्रेत के ओचित्त पर विश्वास करते है और उनसे डर कर रहते है वही कुछ लोग इनको कोरी बकवास मानते है और सुपर नेचुरल जैसी किसी भी चीजों को सिरे से नकार देते है |

हमारी आज की Real Ghost Stories In Hindi भी एक ऐसे ही व्यक्ति की है जो एक समय पैर भूत प्रेत जैसी किसी भी चीज़ पर विश्वास नहीं करता था लेकिन 2010 की एक सर्द रात ने उस व्यक्ति की सोच को पूरी तरह बदल दिया और समय के साथ ही उसको मानना पड़ा की ऐसी अनजान शक्तियां भी होती है और ये शक्तियां अपना वजूद साबित करने के लिए किसी के विश्वास की मोहताज नहीं होती |


ये Real Horror Story In Hindi भी ऐसे ही एक व्यक्ति की है जो भूत प्रेत पैर विश्वास नहीं करता था |
“36 वर्षीय इस व्यक्ति का नाम समीर था, समीर भोपाल का रहने वाला था और समीर भोपाल राजा भोज एयरपोर्ट पर ग्राउंड स्टाफ के तौर पर काम करता था | स्वाभाव से हसमुख और तर्कों पर विश्वास करने वाले समीर ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की एक रात में उसके इन तर्कों पर से विश्वास उठ जायेगा |

2010 की वो सर्द रात - True Horror Story In Hindi
2010 की वो सर्द रात – True Horror Story In Hindi

दिसम्बर की उस सर्द रात में समीर रोज की तरह ही अपना काम ख़तम करके घर की ओर निकला लेकिन एयरपोर्ट से कुछ ही दूर चलते ही उसकी बाइक अचानक खराब हो गयी फिर समीर ने अपनी बाइक एक सुरक्षित जगह पर खड़ी करके आगे का रास्ता बस से पूरा करने का निर्णय किया | कुछ दूर चलते ही समीर बस स्टॉप पर पहुंच गया जहाँ समीर और एक साधू के अलावा कोई नहीं था अपने हसमुख और बातूनी स्वभाव के कारण समीर की उस साधू से बात होने लगी और बातों का सिलसिला भूत प्रेत और आत्माओं तक जा पंहुचा |

समीर इन बातों के शुरू होते ही अपना नजरिया उस साधू के सामने रखने लगा और उस साधू के साथ तर्क-वितर्क करने लगा साधू बार-बार समीर को ये समझाने की कोशिश करने लगा की भूत प्रेत होते है और अगर कोई उनके चंगुल में फस जाता है तो उसको अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है, पर समीर नहीं माना और बातों ही बातों में समीर ने कुछ ऐसा बोल दिया जिससे उस साधू को बुरा लग गया |

तब साधू ने अपने सच्चई बताते हुए बोला की वो एक मामूली साधू नहीं है वह एक अघोरी साधू है और अपनी साघना से बहुत सी सिध्दियों को प्राप्त कर चूका है, उसने दावा किया की वो अपनी शक्तियों से भूत प्रेत से बात कर सकता है और उन्हें वश में कर सकता है यह सुनकर समीर उसका मज़ाक उड़ाने लगा |

यह सब सुनकर साधू ने समीर से कहा की अगर वो चाहे तो पास के शमशान में चलकर देख सकता है और अघोरी साधू अपनी बातों को सच साबित कर सकता है, समीर ने आवेश में आकर साथ चलने के लिए हामी भर दी वह नहीं जानता था की उसका ये फैसला उसकी ज़िन्दगी पूरी तरह बदल सकता है |

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उन दोनों ने शमशान जाने का फैसाला किया जो की समीर के घर से कुछ ही दूरी पर था | वहां पहुंचकर उस अघोरी ने अपनी क्रिया को करना शुरू किया | अघोरी ने ज़मीन में एक छड़ी गाड़ी और उस छड़ी में एक धागा बांधा और उस धागे को समीर के हाथ में बांधकर उसको भी ज़मीन पर बिठा दिया |

उस अघोरी ने समीर को शख्त हिदायत दी की अब आगे कुछ भी हो वो उस धागे को नहीं छोड़े, अभी तक समीर थोड़ा डरा था लेकिन अभी भी उसे लग रहा था की शायद ये सब नाटक है और वो साधू अपने आपको साबित नहीं कर पायेगा | उधर उस साधू ने छड़ी के पास एक कतार में कुछ पताशे और चीनी रख दी और मंत्र पढ़ने लगा |

मंत्र पड़ते वक़्त साधु के हाव भाव देखकर समीर अब डरने लगा लेकिन वो तय कर चूका था अब चाहे जो भी वो उस धागे को नहीं छोड़ेगा, कुछ ही देर में साधू ने समीर को अपनी आँखे बंद करने को कहा और फिर मंत्र पूरा होते ही आँखे खोलने को कहा |

मंत्र पूरा होते ही जब समीर ने आँखे खोली तो नज़ारा देखकर उसके रोंगटे खड़े हो गए धागे के नीचे रखे हर खाने के पास एक-एक आत्मा बैठी थी, जिनके आर-पार देखा जा सकता था ये देखकर उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी तभी उस साधू ने कहा की ये उन्ही लोगों की आत्मा है जिन्हे इसी शमशान में जलाया गया है।

एक बार फिरसे समीर को चेतावनी दी की जबतक ये आत्माएं अपने आगे रखे खाने को खा नहीं लेती तबतक धागे को नहीं छोड़ना है लेकिन अब तक समीर डर के मारे कांपने लगा था और घबराहट में उसके हाथ से वो धागा छूट गया | हाथों से धागा छूटते ही समीर घर की ओर भागा, समीर को अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था की उसने अभी मर्त लोगो को देखा जिनमे कुछ की मौत तो वो खुद अपनी आँखों से देख चूका था।

जब वह घर की तरफ भाग रहा था तब उसे ऐसा लग रहा था की कोई उसका पीछा कर रहा है कभी उसे भीड़ के शोर की आवाज आती तो कभी उसको ऐसा लगता की कोई उसको आवाज दे रहा है | जैसे तैसे समीर अपने घर पंहुचा और घर जाके उसने अपने माता पिता को पूरा वाक्या सुनाया, समीर की हालत देखकर उसके माता पिता को भी उसकी बातों पर हामी भरनी पड़ी | उन्होंने सबकुछ ठीक होने का हवाला देके समीर को सुला दिया लेकिन अगली सुबह का नज़ारा तो और भयानक था।

समीर सोया थो अपने घर में था लेकिन समीर सुबह उसी शमशान में मिला और अभी भी वो धागा उसके हाथों में था जब उसे उठाकर उससे पुछा तो पाया की समीर बहकी-बहकी बातें कर रहा था और डॉक्टरी जांच में भी पता चला की समीर अपना दिमागी संतुलन खो चूका है | आज भी समीर के माता पिता उस रात को याद करके सहम जाते है और आज भी ये राज बना हुआ है की समीर उस शमशान में कैसा पंहुचा और कौन था वो अघोरी साधू”…


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