Unakoti Story In Hindi | Hindi Kahani

Unakoti Story In Hindi

Unakoti Story In Hindi – भारत एक धार्मिक विविधताओं वाला देश है। यूं तो लगभग हर धर्म में कुछ ना कुछ मान्यताएं, किवदंतियां और रहस्मयी घटनाओं का जिक्र होता है लेकिन हिंदू धर्म एक ऐसा धर्म है जिसमें सबसे अधिक देवी देवताओं का वर्णन मिलता है। जितने अधिक देवी देवता, उतने अधिक किवदंतियां और मान्यताएं और उससे भी अधिक रहस्य जिनका जवाब ना तो साइंस के पास होता है और ना ही किसी ज्ञानी के पास।

आप लोगों ने अनेकों मिस्टीरियस मंदिरों और देव स्थलों के बारे में तो सुना होगा जहां कुछ ना कुछ विचित्र मान्यताएं और विश्वास प्रचलित हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे देव स्थल के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में आप में से अधिकतर लोगों ने कभी नहीं सुना होगा। एक ऐसी जगह जहां हिंदू देवी देवताओं की 99,99,999 मूर्तियां मौजूद है।

लेकिन इन 1 करोड़ में से एक कम मूर्तियों को किसने बनाया? कब बनाया और क्यों बनाया इस बात की पुख्ता जानकारी आज तक किसी के पास नहीं है। आमतौर पर किसी जगह से जुड़े तथ्य उस जगह को मिस्टीरियस यानी रहस्मयी बनाते हैं लेकिन यह जगह उन जगहों में से एक है जहां तथ्यों के अभाव ने इसे मिस्टीरियस बना रखा है

तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं आज की Mysterious  Shiv Temple Unakoti Story In Hindi और जानते हैं इस बेहद मिस्टीरियस देव स्थल “उनाकोटी” के बारे में।

Mysterious Shiv Temple Unakoti Story In Hindi

“उनाकोटी” जिसका हिंदी अर्थ है “एक करोड़ में एक कम” यह स्थान त्रिपुरा के पास भारत-बांग्लादेश सीमावर्ती इलाके में मौजूद है और यहां मौजूद है एक अनोखी जगह जो त्रिपुरा के कैलाशहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर है और यहां स्थित है एक ऐसा देव स्थल जहां यह दावा किया जाता है की यहां तकरीबन एक करोड़ देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को बड़ी-बड़ी चट्टानों पर तराशा गया है।

वहीँ चौकाने वाली बात ये है की इतने दुर्गम स्थान पर इतनी सारी मूर्तियों को किसने बनाया और कब बनाया यह कोई नहीं जानता। सुंदर घने जंगलों से गुजरती टेढ़ी मेंढ़ी मगडंडियां और इन मगडंडियां के साथ होकर जाती कलकल करती नदियां मानो सभी खुद को कृतर्त कर देने के लिए उनाकोटी की ओर बढ़ चली जाती है।

इस जगह पर पहुंचकर कर जिस दिव्यता का अनुभव होता है वह अनुभव किसी भी इंसान को विप्र बना देता है। भगवान शंकर का एकांत में बना यह संसार वाकई आने वाले लोगों का मन मोह लेता है। यहाँ पहुंचते ही सबसे पहले दिखाई देती है भगवान शंकर की विशाल 30 फुट की एक मूर्ति जिसमें 10 फुट के मुकुट से भगवान भोलेनाथ को सुसज्जित किया गया है और इस मूर्ति के पास ही दिखाई देती है देवी गंगा की एक मूर्ति जिन्हें अपनी सवारी मगर पर विराजमान दिखाया गया है।

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इस मूर्ति को उनाकोटी काल भैरव के नाम से भी जाना जाता है। इस मूर्ति के बगल में आधी जमीन में गड़ी नंदी बैल की मूर्ति है। इसके अलावा भोलेनाथ की इस दुनिया में महाबली हनुमान, देवी दुर्गा, सूर्य देव, त्रिलोक पति विष्णु, और ब्रह्मांड के रचयिता ब्रह्मा जी समेत अनेकों देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। जिनमें से कई मूर्तियों की खोज की जा चुकी है और बहुत से मूर्तियां अभी भी इन पहाड़ियों की दुर्गम स्थानों पर कहीं छुपी हुई है।

इस जगह पर शिव पुत्र गणेश जी की 3 अद्भुत मूर्तियां है। इन मूर्तियों की खासियत यह है कि इन तीनों मूर्तियों में गणेश जी के दोनों दाँतों को दर्शाया गया है लेकिन जैसा कि हम सभी जानते हैं कि गणेश जी का एक दांत भगवान परशुराम ने अपनी कुल्हाड़ी के घाट से तोड़ दिया था और तभी से गणेशजी को एकदन्त के नाम से भी जाना जाता है।

लेकिन यहां बनी इन मूर्तियों में गणेश जी के दोनों दाँतों को दर्शना शायद यह संकेत है कि यहां बनी ये मूर्तियां शायद परशुराम-गणेश युद्ध से पहले की है क्योंकि यह मूर्तियां चट्टानों पर उकेरी गई है इसलिए इनकी कार्बन डेटिंग करके इनकी उम्र पता लगाना नामुमकिन है और सबसे ज्यादा आश्चर्य की बात यह है कि इन मूर्तियों का जिक्र ना तो किसी ऐतिहासिक दस्तावेज में है और ना ही किसी धार्मिक पुस्तक में ही है।

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सिर्फ किवदंतियां और मान्यताएं ही है जो उनाकोटी के अस्तित्व में आने का पूरक है और यही किवदंतियां और मान्यताएं ही यहां आने वाले लोगों की आस्था की जड़ है। यहां के लोगों की अगर मानें तो इन मूर्तियों को “कल्लू कुमार” नामक एक शिल्पकार ने बनाया था।

कल्लू कुमार माँ पार्वती के परम भक्त और मां पार्वती ने जब उनसे खुश होकर उन्हें अपने दर्शन दिए तो कल्लू कुमार ने मां पार्वती से यह वरदान मांगा कि मां पार्वती उन्हें भी कैलाश ले जाएं लेकिन शंकर भगवान यह नहीं चाहते थे और उन्होंने कल्लू कुमार के सामने यह शर्त रखी कि अगर वह 1 दिन में एक करोड़ देवी देवताओं मूर्तियां बनाएंगे तो वह मां पार्वती के साथ उन्हें कैलाश ले जा सकते हैं।

शर्त को सुनते ही कल्लू कुमार अपने काम पर लग गए लेकिन अपनी पूरी कोशिश के बाद भी कल्लू कुमार 99,99,999 मूर्ति बना पाए यानी 1 कोटी से एक कम। यह सब लीला सिर्फ इसलिए रची गई थी ताकि कल्लू कुमार को कैलाश ना ले जाना पड़े और इसी मान्यता के आधार पर यह माना जाता है की यहां मौजूद सभी मूर्तियां कल्लू कुमार ने ही बनाई थी।

इसके अलावा आज तक कोई भी ऐसा पुख्ता सबूत किसी के पास नहीं है जो इन मूर्तियों के अस्तित्व की गवाही दे सके क्योंकि कल्लू कुमार की कहानी आज की वास्तविक दुनिया के हिसाब से ज्यादा तर्कसंगत नहीं लगती इसलिए इन मूर्तियों को किसने बनाया यह आज भी एक मिस्त्री है।

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काफी सालों से देख-रेख के अभाव में यहां मौजूद कई मूर्तियां खराब और नष्ट हो गई है। उसके बाद ए.एस.आई यानी “आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया” ने इस जगह के संरक्षण की जिम्मेदारी ले ली और इस जगह को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा देने की जद्दोजहद जारी है हो सकता है बहुत जल्द पूरी दुनियाँ इस मिस्टीरियस जगह को जानने लगे।


भगवान शंकर की इस दिव्य संसार को जानकर यकीनन आपको कुछ नया देखने और सीखने को मिला होगा। हमारी आज की ये Unakoti Story In Hindi पसंद आयी होगी. अगर आप ऐसी ही Hindi Kahani पढ़ना चाहतें हैं तो Hindilikh Website को Bookmark कर सकतें हैं या Website को Subscribe भी कर सकतें हैं. Durga ChalisaHanuman Chalisa के साथ साथ हम Moral Stories In Hindi For Kids और Short Story For Kids In Hindi हमारी Website पर पब्लिश करते रहतें हैं.

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